जानवरों के लिए भी धड़कता था प्रतीक यादव का दिल, कुत्तों के लिए भी उठाई थी आवाज; किसे कहते थे अपनी बड़ी बेटी?
प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में 13 मई की सुबह अचानक निधन हो गया. बताया जा रहा है कि वह फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. फिटनेस आइकन प्रतीक को पशु प्रेमी भी कहा जाता था. उनका दिल हमेशा जानवरों के लिए धड़कता था. पढ़ें, यह खास रिपोर्ट...
Prateek Yadav Animal Welfare Work: समाजवादी पार्टी के संस्थापक व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और फिटनेस आइकन प्रतीक यादव का 13 मई की सुबह महज 38 साल की उम्र में अचानक निधन हो गया. राजनीति से दूर रहकर बिजनेस और अपनी फिटनेस के लिए पहचाने जाने वाले प्रतीक यादव का अचानक जाना बेहद भावुक और स्तब्ध करने वाली है. उनकी मौत किन वजहों से हुई, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा. प्रतीक एक पशु प्रेमी थे. उनका जानवरों को लेकर प्रेम अक्सर उनके सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाई देता था.
मिली जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 4:00 बजे प्रतीक यादव अपने घर के किचन में अचेत अवस्था में पाए गए. उनके साले अमन बिष्ट और एक दोस्त उन्हें तुरंत लखनऊ के सिविल अस्पताल लेकर भागे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें 'ब्रॉट डेड' (अस्पताल पहुंचने से पहले मृत) घोषित कर दिया. बताया जा रहा है कि वह फेफड़े की गंभीर बीमारी (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) से जूझ रहे थे, जिसके इलाज के लिए हाल ही में वह मुंबई भी गए थे.
बड़े भाई अखिलेश यादव का छलका दर्द
छोटे भाई के जाने की खबर सुनते ही पूर्व सीएम अखिलेश यादव भावुक होकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे. डॉक्टरों और प्रतीक के ड्राइवर से बात करते हुए उनका गला रुंध गया. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने नम आंखों से कहा, "मैंने उसे बचपन से देखा है... वह बचपन से ही अपनी सेहत और तंदुरुस्ती को लेकर बहुत सचेत रहता था. वह जीवन में बहुत मेहनत करके आगे बढ़ना चाहता था... वह बहुत अच्छा लड़का था. बहुत दुख है कि वह आज हमारे बीच नहीं है."
असम से बदहवास लौटीं पत्नी अपर्णा यादव
प्रतीक यादव की पत्नी और भाजपा नेता अपर्णा यादव एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने असम गई थीं. पति के निधन की खबर मिलते ही वह बदहवास हालत में लखनऊ एयरपोर्ट पर उतरीं और सीधे अपने आवास पहुंचीं. उनके आने तक प्रतीक के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर रोक कर रखा गया था.
सूना हो गया बेजुबानों का सहारा
राजनीतिक गलियारों के इतर, इस मौत से सबसे गहरा सन्नाटा प्रतीक यादव के उन बेजुबान दोस्तों के बीच पसरा है जिनके लिए उन्होंने अपनी जिंदगी समर्पित की थी. प्रतीक के द्वारा स्थापित जीव आश्रय फाउंडेशन के सैकड़ों आवारा और बीमार जानवर आज अपने सबसे बड़े रक्षक को खो चुके हैं. अब उनकी मौत के बाद उनके घर और उनके द्वारा शुरू किए गए पशु शेल्टरों में एक अजीब सी खामोशी छाई हुई है.
प्रतीक यादव किसे कहते थे अपनी बड़ी बेटी?
प्रतीक यादव अपनी पालतू कुतिया 'दुलारी' (Dulari) को अपनी बड़ी बेटी कहते थे. वह जानवरों से बेहद लगाव रखते थे और उनके सोशल मीडिया Prateek Yadav Instagram के बायो में भी लिखा था: "Dulari, my eldest Beti". प्रतीक यादव के जीवन में दिसंबर 2007 में दुलारी आई थी. वह उसे अपनी पहली संतान मानते थे और अक्सर कहते थे कि दुलारी ने ही उन्हें प्यार, करुणा और पितृत्व (Parenthood) का पाठ पढ़ाया है.
प्रतीक यादव ने क्यों किया जीव आश्रय' फाउंडेशन की स्थापना?
सड़कों पर बेसहारा और बीमार जानवरों की दुर्दशा देखकर प्रतीक यादव ने जीव आश्रय फाउंडेशन (Jeev Aashraya Foundation) नाम की संस्था शुरू की थी. यह संस्था आवारा कुत्तों और अन्य घायल जीवों का रेस्क्यू, इलाज, भोजन और रहने का प्रबंध करती है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध क्यों किया था?
आवारा कुत्तों के अधिकारों के लिए उन्होंने मजबूती से आवाज उठाई थी. नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों को सार्वजनिक जगहों से हटाकर शेल्टर होम में शिफ्ट करने के आदेश पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई थी. उन्होंने इस फैसले को 'बेहद क्रूर और इंसानियत से परे' बताते हुए इसे वापस (Rollback) लेने की अपील की थी.
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यादों को टैटू में समेटा
प्रतीक यादव ने अपने पालतू कुत्तों (दुलारी, नानू और लल्ला) की याद को हमेशा ताजा रखने के लिए अपने शरीर पर उनके विशेष मेमोरियल टैटू भी बनवाए थे.
सियासी सरहदों से परे शोक की लहर
एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के दफ्तर और यादव परिवार के समर्थकों में मातम है, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा, कांग्रेस और देश भर के नेताओं ने इस असमय मौत पर गहरा दुख जताया है. चाची डिंपल यादव और चाचा शिवपाल यादव भी तुरंत शोक संतप्त परिवार को संभालने के लिए घर पहुंचे. महज 38 साल की उम्र में, एक भरा-पूरा परिवार, दो छोटी बेटियां और अपने पीछे करोड़ों बेजुबानों की दुआएं छोड़कर प्रतीक यादव हमेशा के लिए शांत हो गए.




