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ग्रेटर नोएडा वेस्ट की इस सोसाइटी में लोगों को पहनना पड़ रहा हेलमेट, बिल्डिंग से गिर रहा प्लास्टर, मौत के डर में जी रहे निवासी

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में प्लास्टर गिरने से हुई मौत के बाद नोएडा सेक्टर-78 की अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2 सोसाइटी के निवासी भी दहशत में हैं. दीवारों से लगातार प्लास्टर गिरने के चलते लोग हेलमेट पहनकर बाहर निकल रहे हैं और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की इस सोसाइटी में लोगों को पहनना पड़ रहा हेलमेट, बिल्डिंग से गिर रहा प्लास्टर, मौत के डर में जी रहे निवासी
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arihant ambar society

( Image Source:  Statemirror )
मोहम्मद रज़ा
By: मोहम्मद रज़ा5 Mins Read

Updated on: 16 Jun 2026 5:21 PM IST

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक हाईराइज सोसाइटी में प्लास्टर गिरने से एक दर्दनाक मौत हो गई थी. इस हादसे के बाद से नोएडा और ग्रेटर नोएडा की बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों के मन में अपनी सुरक्षा को लेकर भारी डर बैठ गया है. लोग अब इस बात से बेहद चिंतित हैं कि कहीं उनके साथ भी ऐसा कोई हादसा न हो जाए. आज हालात ये हैं कि कई सोसाइटियों के निवासी हर समय इसी खौफ में जी रहे हैं कि कब उनके सिर पर बिल्डिंग का प्लास्टर या मलबा गिर जाए.

इसी तरह का एक नया और डराने वाला मामला नोएडा के सेक्टर-78 में स्थित 'अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2' सोसाइटी से सामने आया है. यहां रहने वाले निवासियों का कहना है कि उनकी सोसाइटी के टावरों की बाहरी दीवारों से आए दिन प्लास्टर के बड़े-बड़े टुकड़े टूटकर नीचे गिरते रहते हैं. यह खतरा इतना बढ़ गया है कि अब छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी को सोसाइटी के अंदर घूमते या आते-जाते समय बेहद सावधान रहना पड़ता है. अपनी जान बचाने के लिए सोसाइटी के कुछ बच्चों और निवासियों ने एक अनोखा और मजबूर रास्ता निकाला है. वे अब सोसाइटी के परिसर में टहलने या बाहर आने-जाने के लिए हेलमेट पहनकर निकलने लगे हैं.

सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द

सोसाइटी के परेशान लोगों ने अपनी इस बदहाली और डर को छुपाने के बजाय, इससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं ताकि उनकी आवाज सरकार तक पहुंच सके. निवासियों का आरोप है कि उन्होंने इस खतरनाक समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की, लेकिन प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की तरफ से इसका कोई पक्का और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया. अब ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हादसे के बाद, यहां के लोगों को उम्मीद है कि शायद अब प्रशासन और सरकार की नींद खुलेगी और वे इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देंगे.

तस्वीर : स्टेटमिरर- मोहम्मद रजा

कमजोर होती इमारतें और बढ़ता खतरा

स्टेटमिरर से बातचीत में लोगों ने बताया कि कई टावरों की बाहरी दीवारें और स्ट्रक्चर वक्त के साथ बेहद कमजोर और जर्जर होता जा रहा है. ऐसा नहीं है कि खतरा पहली बार मंडराया है. इससे पहले भी कई बार दीवारों से गिरते प्लास्टर की वजह से नीचे खड़ी गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंच चुका है. गनीमत यह थी कि तब कोई इंसान इसकी चपेट में नहीं आया, लेकिन टावरों के नीचे बनी सड़कों और पार्कों में टहलने वाले लोगों की जान पर हमेशा तलवार लटकी रहती है. हाल ही में हुए हादसे ने लोगों के इस डर को कई गुना बढ़ा दिया है.

तस्वीर : स्टेटमिरर- मोहम्मद रजा

बिल्डर की लापरवाही न OC मिला, न CC

निवासियों ने इस बदहाली के पीछे की मुख्य वजह भी बताई है. उनका कहना है कि सोसाइटी को बने इतना समय हो गया है, लेकिन बिल्डर को अभी तक प्राधिकरण (Authority) से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) नहीं मिला है. नियम के मुताबिक, इन सर्टिफिकेट्स के न मिलने के कारण सोसाइटी का पूरा नियंत्रण अभी तक वहाँ के निवासियों की संस्था यानी AOA (अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन) को नहीं सौंपा जा सका है. इसी वजह से सोसाइटी के मैंटेनेंस की पूरी जिम्मेदारी आज भी बिल्डर के पास ही है. लोगों का सीधा आरोप है कि बिल्डर केवल दिखावे के लिए नाममात्र की मरम्मत करवा देता है, जबकि कई टावरों की हालत अंदर और बाहर से बेहद खराब है और वहां तुरंत बड़े सुधार कार्य की जरूरत है.

तस्वीर : स्टेटमिरर- मोहम्मद रजा

'काम नहीं तो वोट नहीं'

लंबे समय से अनदेखी का शिकार हो रहे सोसाइटी के लोगों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है. उन्होंने साफ शब्दों में प्रशासन और राजनेताओं को चेतावनी दे दी है. निवासियों का कहना है कि अगर जल्द ही उनकी सुरक्षा के लिए कड़े कदम नहीं उठाए गए और बिल्डिंग को पूरी तरह ठीक नहीं किया गया, तो वे आने वाले चुनावों में अपने जनप्रतिनिधियों को वोट नहीं देंगे. लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव जीतने के बाद कोई भी नेता उनकी सुध लेने या समस्या जानने नहीं आया. सोसाइटी की एक महिला निवासी ने गुस्से में कहा, 'हम नेता बदलने के मूड में नहीं हैं, बल्कि इस बार मजबूर होकर NOTA (इनमें से कोई नहीं) का बटन दबाएंगे, ताकि सरकारों को पता चले कि जनता की जान की कीमत क्या होती है.'

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