पहले मुझे सैल्यूट करो, 40 रुपए बचाने के चक्कर में मिथिलेश बने फर्जी IPS, 1 मिनट 13 सेकेंड के वीडियो में देखें कैसे खुली पोल
लखनऊ के गोल मार्केट में एक युवक ने खुद को IPS अधिकारी बताकर पुलिसकर्मियों से सैल्यूट की मांग कर दी. पहचान पत्र और बैच नंबर पूछे जाने पर पता चला कि वह नोएडा की एक निजी कंपनी में अकाउंट एग्जीक्यूटिव है.
लखनऊ के गोल मार्केट में उस रात सब कुछ सामान्य था. सड़क किनारे चाय की दुकान पर लोग चाय की चुस्कियां ले रहे थे. कुछ लोग काम से लौट रहे थे, तो कुछ देर रात की बातचीत में व्यस्त थे. लेकिन तभी एक मामूली सा विवाद शुरू हुआ, जिसने कुछ ही मिनटों में एक ऐसे राज से पर्दा उठा दिया, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.
चाय विक्रेता वीरू गुप्ता का आरोप था कि एक ग्राहक बन लेकर पैसे दिए बिना जाने की कोशिश कर रहा है. देखते ही देखते दोनों के बीच बहस शुरू हो गई. आवाजें ऊंची हुईं तो आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई. किसी ने पुलिस को सूचना दे दी. कुछ देर बाद महानगर थाने की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंच गई. सब-इंस्पेक्टर आर्यन शर्मा और उनकी टीम ने सोचा था कि यह कोई सामान्य लेन-देन का विवाद होगा, लेकिन वहां पहुंचते ही मामला कुछ और ही निकला.
जानते हो मैं कौन हूं?
पुलिस ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो विवाद कर रहा व्यक्ति अचानक अपना परिचय देने लगा. उसने दावा किया कि वह नोएडा में तैनात एक IPS अधिकारी है. इतना ही नहीं, उसने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से सवाल करना शुरू कर दिया.
कैप क्यों नहीं पहनी है?
मुझे सैल्यूट क्यों नहीं किया? उसका अंदाज ऐसा था मानो वह वास्तव में किसी बड़े पद पर बैठा अधिकारी हो और सामने खड़े पुलिसकर्मी उसके अधीन काम करते हों. कुछ क्षणों के लिए वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए. पुलिस ने पूछा सिर्फ एक सवाल... और कहानी बदल गई. सब-इंसेक्टर आर्यन शर्मा ने शांति से उसकी बातें सुनीं. फिर एक साधारण सा सवाल पूछा कि 'सर, अपना आईडी कार्ड दिखा दीजिए.' यह सुनते ही कथित IPS अधिकारी थोड़ा असहज हो गया. उसने कहा कि आईडी कार्ड अभी साथ नहीं है. कल दिखा देगा.
पुलिस को शक गहरा गया.
फिर दूसरा सवाल आया- बैच कौन सा है? अब जवाब और भी कमजोर था. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को समझ आने लगा कि मामला कुछ गड़बड़ है. कुछ ही मिनटों में खुल गई पूरी सच्चाई. लगातार पूछताछ के बाद आखिरकार उस व्यक्ति का आत्मविश्वास टूटने लगा. जो कुछ देर पहले खुद को नोएडा का IPS अधिकारी बता रहा था, उसने अपनी असली पहचान बताई. उसका नाम मिथिलेश शुक्ला निकला.
लखनऊ में पकड़े जाने वाला नकली IPS कौन?
वह लखनऊ के मड़ियाव क्षेत्र के भारत नगर का निवासी है और नोएडा सेक्टर-18 स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में अकाउंट एग्जीक्यूटिव के रूप में काम करता है. यानी न वह IPS था और न ही किसी पुलिस सेवा से उसका कोई संबंध था. वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चा. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो में सफेद टी-शर्ट पहने मिथिलेश शुक्ला पुलिसकर्मियों से बहस करते दिखाई देता है. वह बार-बार अपने कथित IPS होने का रौब झाड़ता नजर आता है. जब पुलिस उससे पहचान पत्र मांगती है तो वह बात घुमाने की कोशिश करता है. एक जगह वह यह भी कहता सुनाई देता है कि 40 रुपये के बन के लिए वह भागने वाला नहीं है. लेकिन तब तक पुलिस उसकी कहानी की परतें खोल चुकी थी.
रातभर हवालात में उतरा सारा रौब
पुलिस ने मिथिलेश शुक्ला को हिरासत में ले लिया. जो व्यक्ति कुछ देर पहले सैल्यूट मांग रहा था, वह अब खुद पुलिस हिरासत में था. महानगर थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा के मुताबिक आरोपी ने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताकर पुलिस टीम को डराने और सरकारी कार्य में बाधा डालने की कोशिश की. पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालना, सरकारी अधिकारी का झूठा प्रतिरूपण करना और अन्य आरोप शामिल हैं.
40 रुपये का विवाद, लेकिन सबक बड़ा
इस पूरी घटना में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मामला सिर्फ 40 रुपये के बन से शुरू हुआ था. अगर भुगतान को लेकर विवाद न होता, तो शायद यह फर्जीवाड़ा इतनी जल्दी सामने भी नहीं आता. लेकिन गोल मार्केट की उस छोटी सी चाय की दुकान पर हुई बहस ने एक ऐसे 'IPS साहब' की हकीकत दुनिया के सामने ला दी, जिनका पूरा रौब एक आईडी कार्ड और बैच नंबर के सवाल पर खत्म हो गया.




