नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सहारे क्या मंजिल पर पहुंच पाएगी 'साइकिल', 19 फीसदी मुस्लिम वोटों वाले यूपी में 'मिनी सीएम' का कितना जोर?
यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बड़े मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी 14 फरवरी को सपा में शामिल हो गए. इससे मुस्लिम वोटों का समीकरण बदल सकता है. सपा को फायदा, जबकि कांग्रेस-बसपा को नुकसान हो सकता है.
Naseemuddin Siddiqui Joins SP, Impact on Muslim Vote Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस में लंबा समय बिताने वाले कद्दावर मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं. रविवार को लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की मौजूदगी में उन्होंने साइकिल का दामन थाम लिया. माना जा रहा है कि यह कदम यूपी की सियासत में मुस्लिम वोटों के समीकरण को सीधे प्रभावित कर सकता है.
सपा पहले से ही पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक (PDA) फॉर्मूले पर काम कर रही है. पार्टी के बड़े मुस्लिम चेहरे आजम खान (Azam Khan) जेल में हैं. ऐसे में अखिलेश यादव को एक प्रभावशाली मुस्लिम नेता की जरूरत महसूस हो रही थी. यूपी में लगभग 19% मुस्लिम वोट हैं, जो कई सीटों पर जीत-हार तय करते हैं. नसीमुद्दीन के आने से सपा को मुस्लिम समाज में मजबूत संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव
क्या मुस्लिम वोटों का झुकाव सपा की ओर बना रहेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और बसपा के कमजोर होने से मुस्लिम वोटों का झुकाव पहले ही सपा की ओर बढ़ा है. पिछले चुनावों के आंकड़े भी बताते हैं कि मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के साथ गया. ऐसे में नसीमुद्दीन सिद्दीकी का पार्टी में शामिल होना इस समर्थन को और पक्का करने की रणनीति माना जा रहा है. एक सर्वे के मुताबिक, विधानसभा चुनाव 2022 में सपा को 79 फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे, जबकि बसपा को 6 और कांग्रेस को महज 3 फीसदी ही वोट मिले. वहीं, लोकसभा चुनाव 2024 में सपा-कांग्रेस गठबंधन को 92 फीसदी मुस्लिमों के वोट मिले.
Nasimuddin Siddiqui (Credit-ANI)
कौन हैं नसीमुद्दीन सिद्दीकी?
- नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा संस्थापक Kanshi Ram के करीबी रहे और Mayawati सरकार में चार बार कैबिनेट मंत्री रहे.
- 2007 की बसपा सरकार में नसीमुद्दीन के पास कई अहम मंत्रालय थे और उन्हें ‘मिनी सीएम’ तक कहा जाता था.
- 2017 में बसपा से निकाले जाने के बाद नसीमुद्दीन कांग्रेस में चले गए, लेकिन 15 फरवरी को कांग्रेस से इस्तीफा देकर अब वे सपा में आ गए.
- बताया जा रहा है कि राहुल गांधी जब लखनऊ आए थे, तो उन्हें रिसीव करने के लिए नसीमुद्दीन सिद्दीकी को एयरपोर्ट पर एंट्री नहीं मिली थी और उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा था. इसी से नाराज होकर 24 जनवरी को उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया.
- बताया जा रहा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी करीब 1600 समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुए हैं, जिससे कई जिलों में पार्टी को संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है.
- राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह कदम, कांग्रेस और बसपा, दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है, जबकि सपा को सीधे फायदा मिलने की संभावना है.
क्या मुस्लिम वोटों को ओवैसी के पाले में जाने से रोक पाएंगे नसीमुद्दीन?
यूपी में Asaduddin Owaisi की पार्टी AIMIM भी मुस्लिम वोटों पर नजर बनाए हुए है और करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. हालांकि पिछले चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा. ओवैसी ने 95 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें से 94 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. हालांकि, ओवैसी की मौजूदगी से मुस्लिम वोटों का बिखराव संभव है.
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी
ऐसे में सपा ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को शामिल कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि मुस्लिम समाज का मजबूत नेतृत्व उनके साथ है. अब देखना होगा कि क्या यह कदम मुस्लिम वोटों को एकजुट रखने में सफल होता है या सियासी मुकाबला और दिलचस्प बनता है.





