हाई कोर्ट ने क्यों लगाया सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना? जानें पूरा मामला
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.
Upendra Dwivedi Fine Punjab and Haryana high court
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह मामला एक रिटायर मेजर को दिव्यांगता पेंशन देने में देरी और न्यायालय के आदेशों का पालन न करने से जुड़ा है.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने यह राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से काटकर पीड़ित अधिकारी को देने का निर्देश दिया है, साथ ही अनुपालन रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है.
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला पुणे निवासी रिटायर्ड मेजर राजदीप दिनकर पंडेरे से जुड़ा है. उन्हें 15 सितंबर 2012 को भारतीय सेना में नियुक्त किया गया था और शुरुआती दौर में वे पूरी तरह स्वस्थ थे. सेवा के दौरान उन्हें 4 लद्दाख स्काउट्स में तैनात किया गया, जहां उन्होंने लेह जैसे कठिन और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती निभाई. जून 2017 में ड्यूटी के दौरान उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्हें दिल्ली कैंट स्थित बेस हॉस्पिटल में मेडिकल जांच के लिए भेजा गया. जांच में ‘सिस्टाइटिस सिस्टिका ग्लैंडुलारिस’ बीमारी की पुष्टि हुई.
कितनी हुई थी सर्जरी?
बीमारी के बाद उनका ऑपरेशन किया गया और 19 सितंबर 2017 को उन्हें ‘लो मेडिकल कैटेगरी’ में डाल दिया गया. इसके बाद वर्षों तक उन्हें बार-बार मेडिकल बोर्ड और रीकैटेगराइजेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान उनकी हालत को देखते हुए कुल 24 सर्जरी की गईं. 2 सितंबर 2022 को उन्हें चंडीमंदिर स्थित वेस्टर्न कमांड अस्पताल के रिलीज मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश किया गया, जहां उन्हें सेवा से मुक्त करने की सिफारिश की गई. हालांकि, बोर्ड ने उनकी दिव्यांगता 15 प्रतिशत बताई और कहा कि यह सैन्य सेवा से संबंधित नहीं है, लेकिन इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया.
क्यों किया था कोर्ट का रुख?
14 सितंबर 2022 को 10 साल की सेवा के बाद उन्हें सेना से रिटायर कर दिया गया और 23 नवंबर 2022 को उनकी दिव्यांगता पेंशन की मांग खारिज कर दी गई. इसके खिलाफ उन्होंने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) की चंडीगढ़ पीठ का रुख किया. 10 अक्टूबर 2024 को ट्रिब्यूनल ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि उनकी बीमारी सैन्य सेवा से जुड़ी है और दिव्यांगता को 40 प्रतिशत माना जाना चाहिए, जिसे नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत तक राउंड ऑफ किया जाएगा. साथ ही 1 जुलाई 2022 से आजीवन पेंशन देने का आदेश दिया गया.
पेंशन क्यों नहीं हुई शुरू?
केंद्र सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 28 जुलाई 2025 को अदालत ने याचिका खारिज कर दी. अदालत ने स्पष्ट कहा कि मेजर पंडेरे का पेंशन अधिकार संदेह से परे है. इसके बावजूद आदेश लागू नहीं हुआ, जिसके बाद उन्होंने फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाया. 31 अक्टूबर 2025 को अदालत ने उनके पक्ष में आदेश जारी किया, लेकिन पेंशन फिर भी शुरू नहीं की गई.
लगातार आदेशों के बावजूद कार्रवाई न होने पर मेजर पंडेरे ने अवमानना याचिका दायर की. उनके वकील राजेश सहगल ने अदालत को बताया कि दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो पेंशन जारी की गई और न ही कोई आधिकारिक पत्र दिया गया. इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि पहले ही अंतिम अवसर दिया गया था, बावजूद इसके आदेश का पालन नहीं हुआ.




