‘3 साल से ज्यादा सस्पेंड रखना गलत’, हाईकोर्ट ने DSP को किया बहाल, NDPS केस से कैसे जुड़ा लखबीर सिंह का नाम?
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने DSP लखबीर सिंह को बहाल करते हुए कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को तीन साल से ज्यादा समय तक सस्पेंड रखना उचित नहीं है. NDPS और भ्रष्टाचार मामले से जुड़े इस केस में अदालत ने पुलिस विभाग को दो हफ्ते के भीतर बहाली का आदेश दिया.
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 12 मार्च को दिए अपने अहम फैसले में सरकार से कहा है कि वो सस्पेंडेड DSP लखबीर सिंह को बहाल करें. किसी भी सरकारी कर्मचारी को अनिश्चित समय यानी तीन साल से अधिक अवधि तक सस्पेंड रखना उचित नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता जुलाई 2022 से निलंबित थे और जांच प्रक्रिया भी तय समय में पूरी नहीं हुई. ऐसे में लंबे समय तक सस्पेंशन जारी रखना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है. अदालत ने संबंधित पुलिस अथॉरिटी को निर्देश दिया कि आदेश की तारीख से दो हफ्ते के भीतर DSP को फिर से सेवा में बहाल किया जाए. इस मामले की पूरी डिटेल 10 प्वाइंट्स में जानें.
1. हाई कोर्ट ने DSP लखबीर सिंह की बहाली पर क्या कहा?
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को अनिश्चित समय तक सस्पेंड रखना कानून के खिलाफ है. अदालत ने माना कि DSP लखबीर सिंह करीब तीन साल से ज्यादा समय से निलंबित थे. जबकि जांच प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई. इसी आधार पर अदालत ने उन्हें सेवा में बहाल करने का आदेश दिया.
2. जस्टिस जगमोहन बंसल ने सुनवाई में क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई जस्टिस जगमोहन बंसल की बेंच ने की. अदालत ने स्पष्ट कहा कि विभाग की जिम्मेदारी थी कि वह समय पर जांच अधिकारी नियुक्त करे और जांच पूरी कराए. लेकिन लंबे समय तक कार्रवाई न होने से कर्मचारी को लगातार सस्पेंड रखना उचित नहीं माना जा सकता.
3. DSP लखबीर सिंह ने हाई कोर्ट से क्या मांग की थी?
DSP लखबीर सिंह ने 22 जुलाई 2022 के सस्पेंशन आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. उन्होंने अदालत से सस्पेंशन रद्द करने और सेवा में बहाल करने की मांग की. अदालत ने उनकी दलीलों को सुनने के बाद पाया कि मामला लंबित रखने का कोई ठोस कारण नहीं था.
4. हाईकोर्ट अपने आदेश में क्या कहा?
27 फरवरी के आदेश में हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि संबंधित पुलिस अथॉरिटी याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर सेवा में बहाल करे. अदालत ने यह भी कहा कि जांच या ट्रायल लंबित होना अपने आप में लंबे सस्पेंशन का आधार नहीं हो सकता.
5. DSP को कैसे बनाया गया सरकारी गवाह?
जांच एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट में आवेदन देकर लखबीर सिंह को ‘अप्रूवर’ यानी सरकारी गवाह घोषित कर दिया. इसका मतलब है कि अब वह आरोपी के रूप में नहीं बल्कि गवाह के तौर पर अदालत में बयान देंगे. बाकी आरोपियों के खिलाफ ट्रायल अभी भी लंबित है.
6. NDPS केस से कैसे जुड़ा पूरा विवाद?
मामले की शुरुआत जून 2022 में हुई थी जब NDPS Act के तहत एक FIR दर्ज हुई. पुलिस ने सुरजीत सिंह नामक व्यक्ति के पास से 900 ग्राम अफीम और एक स्कूटर बरामद किया. जांच के दौरान ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े कई नाम सामने आए.
7. जांच में रिश्वत के आरोप कैसे आए सामने?
जांच में सामने आया कि आरोपी पिशोरा सिंह ने खुद को बचाने के लिए पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की. आरोप है कि उसने ASI और अन्य लोगों के जरिए DSP लखबीर सिंह तक पहुंच बनाई. कथित तौर पर 10 लाख रुपये की रिश्वत की डील तय होने की बात भी सामने आई.
8. छापों में कितने की नकदी और अफीम की बरामदगी?
जांच के दौरान पिशोरा सिंह के घर से 250 ग्राम अफीम और 1 लाख रुपये बरामद किए गए. वहीं DSP के चचेरे भाई हीरा सिंह के घर से करीब 9.97 लाख रुपये नकद मिले. इन बरामदगियों के बाद जांच एजेंसियों ने भ्रष्टाचार और ड्रग तस्करी से जुड़े आरोपों की जांच तेज कर दी.
9. भ्रष्टाचार और NDPS एक्ट के तहत क्यों हुई गिरफ्तारी?
आरोपों के आधार पर लखबीर सिंह को जुलाई 2022 में Prevention of Corruption Act 1988 और NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें सेवा से सस्पेंड कर दिया गया और विभागीय कार्रवाई शुरू की गई.
10. कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें क्या रहीं?
पिटीशनर की ओर से वकील संग्राम सिंह सरोन ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी सस्पेंशन का समय बढ़ाने की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. वहीं राज्य की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल अमन धीर ने कहा कि आरोपों का मेमोरेंडम दिया गया था, लेकिन जांच अधिकारी अब तक नियुक्त नहीं किया गया था.




