PM Kusum 2.0 से किसानों को डबल फायदा: सिंचाई होगी सस्ती, खेत से बनेगी बिजली, आय बढ़ाने का क्या है नया फॉर्मूला?
केंद्र सरकार PM Kusum 2.0 योजना लाने की तैयारी में है, जिसमें एग्रीवोल्टिक्स और सोलर पंप के जरिए किसानों को सस्ती बिजली मिलेगी. इससे किसान सिंचाई लागत घटाने के साथ-साथ बिजली बेचकर अतिरिक्त आय भी कमा सकेंगे.
केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएम-कुसुम योजना का नया संस्करण PM Kusum 2.0 लाने की तैयारी कर रही है. सरकार का मानना है कि कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा को साथ जोड़कर किसानों को भरोसेमंद बिजली, कम सिंचाई लागत और अतिरिक्त आय के नए अवसर मिल सकते हैं.
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित चौथे राष्ट्रीय एग्रो-आरई शिखर सम्मेलन में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा आधारित तकनीकें खेतों तक तेजी से पहुंच रही हैं, जिससे किसानों को सस्ती और भरोसेमंद बिजली मिल रही है.
पीएम-कुसुम योजना क्या है?
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना का उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप उपलब्ध कराना और खेतों में बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना है. इस योजना के तहत किसान अपने खेतों में सोलर पंप लगा सकते हैं या अपने मौजूदा कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ सकते हैं. इससे किसानों की डीजल या महंगी बिजली पर निर्भरता कम होती है और सिंचाई सस्ती हो जाती है.
सरकार के अनुसार अब तक इस योजना के तहत देशभर में 10 लाख से अधिक स्वतंत्र सौर कृषि पंप लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 13 लाख से अधिक ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरकरण किया गया है. इससे किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन करने वाले “ऊर्जादाता” भी बन रहे हैं.
पीएम-कुसुम 2.0 में क्या होगा खास?
सरकार इस योजना के नए संस्करण PM Kusum 2.0 में एक महत्वपूर्ण नया घटक जोड़ने की तैयारी कर रही है. इसके तहत 10 गीगावॉट का समर्पित एग्री-पीवी (Agri-PV) घटक शामिल किया जाएगा. इसका मतलब है कि किसान अपनी जमीन पर फसल के साथ-साथ सोलर पैनल भी लगा सकेंगे. इसे एग्रीवोल्टिक्स कहा जाता है, जिसमें खेती और बिजली उत्पादन एक साथ होता है.
इस मॉडल में खेत के ऊपर या किनारे सोलर पैनल लगाए जाते हैं, जबकि नीचे फसल की खेती जारी रहती है. इससे जमीन का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से हो पाता है और किसानों को दोहरा लाभ मिलता है—फसल से आय और बिजली से कमाई.
किसानों की आय कैसे बढ़ेगी?
सरकार का मानना है कि एग्रीवोल्टिक्स तकनीक किसानों की आय बढ़ाने में बड़ा योगदान दे सकती है. अध्ययनों के अनुसार, यदि किसान फसल उत्पादन के साथ बिजली भी पैदा करते हैं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. अनुमान है कि कुछ मामलों में किसानों की वार्षिक आय लगभग ₹60,000 प्रति एकड़ से बढ़कर ₹1 लाख प्रति एकड़ से अधिक तक पहुंच सकती है. इसके अलावा किसान सौर ऊर्जा से पैदा की गई बिजली को ग्रिड में बेचकर भी अतिरिक्त आय कमा सकते हैं.
सिंचाई लागत में कितनी होगी बचत?
सौर सिंचाई पंप किसानों के लिए लागत कम करने का एक प्रभावी तरीका बनकर सामने आए हैं. डीजल से सिंचाई करने पर गेहूं की फसल के लिए प्रति एकड़ करीब ₹6,790 तक खर्च हो सकता है, जबकि कपास जैसी फसलों के लिए यह खर्च ₹8,000 से अधिक तक पहुंच जाता है. वहीं यदि किसान सौर पंप का इस्तेमाल करते हैं तो वे प्रति एकड़ हर साल ₹5,000 से ₹6,500 तक की बचत कर सकते हैं. साथ ही इससे कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है और पर्यावरण को लाभ मिलता है.
कब से शुरू हो सकता है पीएम-कुसुम 2.0?
केंद्र सरकार इस योजना के नए संस्करण की तैयारी कर रही है. आधिकारिक घोषणा और विस्तृत दिशानिर्देश जल्द जारी किए जा सकते हैं. माना जा रहा है कि नीति और बजट से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा.
योजना का मकसद क्या है?
पीएम-कुसुम 2.0 का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करना है. सरकार का लक्ष्य है कि खेतों, घरों और ग्रामीण उद्यमों में छोटे-छोटे सौर ऊर्जा सिस्टम लगाकर भारत के 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता लक्ष्य को हासिल किया जाए. राज्य मंत्री Shripad Yesso Naik ने भी कहा कि एग्रीवोल्टिक्स भारत के ऊर्जा परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. यह एक ही जमीन पर खेती और बिजली उत्पादन को संभव बनाकर भूमि उपयोग की दक्षता को बढ़ाता है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया मॉडल?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन को बड़े पैमाने पर जोड़ा गया तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक नया मॉडल बन सकता है. इससे किसानों की आय बढ़ेगी, बिजली की उपलब्धता बेहतर होगी और देश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी तेज गति मिलेगी. इस तरह PM Kusum 2.0 सिर्फ एक ऊर्जा योजना नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और भारत के ऊर्जा परिवर्तन को तेज करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.




