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मिडिल ईस्ट युद्ध का असर राजस्थान तक: गैस सिलेंडर की कमी से डेस्टिनेशन वेडिंग और होटल इंडस्ट्री पर संकट

ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हो रही है. इसका सीधा असर राजस्थान के होटल, कैटरिंग, एक्सपोर्ट और टूरिज्म बिजनेस पर पड़ रहा है.

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( Image Source:  AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Updated on: 12 March 2026 4:36 PM IST

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध बहुत दूर का लगता है, लेकिन इसका असर भारत के राजस्थान राज्य तक पहुंच गया है. खासकर राजस्थान के पैलेस होटल, हेरिटेज रिसॉर्ट और डेस्टिनेशन वेडिंग के बिजनेस पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. राजस्थान में लोग बड़े-बड़े महलों और पुराने किले जैसे होटलों में शानदार शादियां करते हैं. जयपुर, उदयपुर, जोधपुर जैसे शहरों में यह बिजनेस तेजी से बढ़ रहा था.

होटल वाले सोच रहे थे कि मिडिल ईस्ट में वॉर और तनाव की वजह से अमीर लोग दुबई या अबू धाबी की बजाय राजस्थान में अपनी लग्जरी शादियां करवाएंगे. लेकिन अचानक एक नई समस्या सामने आ गई है- कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (बड़े गैस सिलेंडर जो होटल और रेस्टोरेंट में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होते हैं) की कमी.

एलपीजी सिलेंडर की कमी क्यों हुई?

यह युद्ध होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों पर असर डाल रहा है. भारत बहुत सारा एलपीजी विदेश से खरीदता है, और ज्यादातर यह खाड़ी देशों से आता है. युद्ध की वजह से जहाजों की आवाजाही रुक गई. भारत सरकार ने फैसला किया कि पहले घरों में इस्तेमाल होने वाली घरेलू गैस (डोमेस्टिक एलपीजी) को प्राथमिकता दी जाए. इसलिए कमर्शियल 19 किलो के बड़े सिलेंडर की सप्लाई कम कर दी गई या कई जगहों पर बंद कर दी गई.

होटल, कैटरर्स और बैंक्वेट हॉल वाले बहुत परेशान हैं. शादी का सीजन चल रहा है, जहां सैकड़ों-हजारों मेहमानों के लिए ढेर सारा खाना बनाना पड़ता है. अब गैस नहीं मिल रही तो:

  • खाने का मेन्यू छोटा करना पड़ सकता है
  • खाना पकाने का खर्च बढ़ रहा है
  • कुछ होटल इंडक्शन, इलेक्ट्रिक चूल्हे या लकड़ी का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर यह मुश्किल है

19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में भी करीब 115 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है. रीफिल में 2 से 8 दिन की देरी हो रही है. अगर यह समस्या हफ्ते भर से ज्यादा चली तो शादियों और बड़े इवेंट्स पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.

राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर और असरयह युद्ध सिर्फ गैस तक सीमित नहीं है. राजस्थान की इकोनॉमी कई तरीकों से खाड़ी देशों से जुड़ी है:

1. माइग्रेंट वर्कर्स की समस्या

राजस्थान के कई इलाकों, खासकर दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जैसे आदिवासी जिलों से हजारों लोग कुवैत, दुबई जैसे गल्फ देशों में काम करते हैं. वे कंस्ट्रक्शन, होटल और सर्विस सेक्टर में नौकरी करते हैं. अनुमान है कि राजस्थान से करीब 30,000 लोग कुवैत में हैं. युद्ध की वजह से फ्लाइट्स रुक रही हैं, तनाव बढ़ रहा है. ये लोग हर साल करीब 5,000 करोड़ रुपये घर भेजते हैं, जिससे गांवों में परिवारों का गुजारा चलता है. अब नौकरियां खतरे में हैं, लोग वापस लौट रहे हैं. कुछ ग्रुप्स पहले ही लौट आए हैं, जैसे जोधपुर के 106 लोग दुबई से कोच्चि या अहमदाबाद के रास्ते आए.

2. एक्सपोर्ट बिजनेस पर असर

राजस्थान का 10% एक्सपोर्ट (हैंडीक्राफ्ट, फर्नीचर, टेक्सटाइल, पत्थर, ज्वेलरी) गल्फ देशों में जाता है. शिपिंग रुकने और इंश्योरेंस महंगा होने से व्यापार धीमा पड़ गया. जोधपुर का लकड़ी का फर्नीचर और मेटल क्राफ्ट सबसे ज्यादा प्रभावित है. जयपुर की जेमस्टोन और ज्वेलरी इंडस्ट्री भी मुश्किल में है, क्योंकि दुबई और हांगकांग जैसे हब से ट्रेड प्रभावित हो रहा है. एयर रूट्स बदलने से कार्गो महंगा और धीमा हो गया. एक्सपोर्टर्स कहते हैं कि वेयरहाउस भरे पड़े हैं, माल नहीं भेज पा रहे.

3. टूरिज्म पर मिश्रित असर

कुछ अच्छा भी हो सकता है युद्ध की वजह से लोग दुबई की बजाय राजस्थान को सुरक्षित जगह समझकर यहां शादियां या टूर प्लान कर सकते हैं. लेकिन फ्लाइट्स महंगी होने और रूट बदलने से यूरोप-अमेरिका से आने वाले टूरिस्ट कम हो रहे हैं. कई लोग ट्रिप टाल रहे हैं. जयपुर, उदयपुर जैसे शहरों में लास्ट-मिनट कैंसलेशन बढ़ गए हैं.

कुल मिलाकर क्या हो रहा है?

यह युद्ध राजस्थान जैसे राज्य को दिखा रहा है कि हमारी लोकल अर्थव्यवस्था ग्लोबल घटनाओं से कितनी जुड़ी है. गांवों से लेकर होटल किचन, एक्सपोर्ट वेयरहाउस और टूरिस्ट स्पॉट तक सब प्रभावित हैं. अगर युद्ध जल्दी खत्म हो जाए और होर्मुज स्ट्रेट से जहाज फिर से चलने लगें, तो कई समस्याएं कम हो सकती हैं. लेकिन अगर यह लंबा चला तो एनर्जी महंगी होगी, व्यापार रुकेगा, मजदूरों की नौकरियां जाएंगी और महंगाई बढ़ेगी।राजस्थान के होटल वाले, कैटरर्स और व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द कोई राहत देगी, जैसे सप्लाई बढ़ाना या अल्टरनेटिव इंतजाम करना. अभी तो शादियों का सीजन खतरे में लग रहा है, और लोग चिंतित हैं.

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