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जबलपुर डैम हादसा: क्रूज पलटने से पहले का खौफनाक VIDEO, चीख-पुकार के बीच आया था सीलपैक्ड लाइफ जैकेट

बरगी बांध हादसे का नया वीडियो सामने आने के बाद सुरक्षा में भारी लापरवाही उजागर हुई है. ओवरलोडिंग, मौसम अलर्ट की अनदेखी और देर से रेस्क्यू ने इस त्रासदी को और भयावह बना दिया.

जबलपुर डैम हादसा: क्रूज पलटने से पहले का खौफनाक VIDEO, चीख-पुकार के बीच आया था सीलपैक्ड लाइफ जैकेट
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( Image Source:  X: @Dr_MonikaSingh_ )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय6 Mins Read

Published on: 2 May 2026 11:44 AM

मध्य प्रदेश के बरगी बांध पर इस हफ्ते की शुरुआत में जो क्रूज नाव पलट गई थी, उससे जुड़ा एक नया और बहुत ही दिल दहला देने वाला वीडियो अब सामने आया है. इस वीडियो में उस भयानक हादसे के ठीक पहले के आखिरी पल दिखाए गए हैं. वीडियो देखने वाले लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं क्योंकि इसमें साफ दिख रहा है कि कैसे बेसिक सिक्योरिटी सिस्टम पूरी तरह से फ़ैल हो गई थी. वीडियो में यात्री आराम से क्रूज के अंदर बैठे हुए हैं. सबकी चेहरे पर खुशी और एक्साइटेड है. अचानक तेजी से पानी क्रूज के अंदर घुसने लगता है. कुछ ही पलों में हंसी-मजाक की आवाजें डरावनी चीख-पुकार में बदल जाती हैं.

तूफानी पानी इतनी तेजी से अंदर भरता है कि पूरा जहाज बुरी तरह हिलने लगता है. यात्री घबरा जाते हैं. नाव के अंदर का पानी इतना बढ़ जाता है कि सब कुछ डूबने लगता है. क्रूज डूबने के बाद भी क्रूज के कर्मचारी बहुत मुश्किल से लाइफ जैकेट के पैकेट खोल रहे थे. यात्री, जिनमें ज्यादातर लोगों के पास लाइफ जैकेट ही नहीं थी, सील बंद गोदाम से जैकेट निकालने के लिए हड़बड़ी में कोशिश कर रहे थे. यह वीडियो अब उन सभी आरोपों को साबित कर रहा है कि इस हादसे में सुरक्षा के बुनियादी नियमों की बिल्कुल भी परवाह नहीं की गई और यात्रियों को तूफान के बीच बेसहारा छोड़ दिया गया.

कानून का उल्लंघन

भारत सरकार का अंतर्देशीय पोत अधिनियम 2021 साफ-साफ कहता है कि हर यात्री को नाव चलने से पहले लाइफ जैकेट दी जानी चाहिए और उसे सही तरीके से पहनना भी जरूरी है. लेकिन इस क्रूज पर इस जरूरी नियम की पूरी तरह से अनदेखी की गई. जांच में पता चला है कि नाव पर 40 से ज्यादा पर्यटक सवार थे, जबकि सिर्फ 29 यात्रियों के लिए ही टिकट जारी किए गए थे। यानी नाव पर भारी भीड़ थी, जो पूरी तरह से गैरकानूनी था. इसके अलावा, भारतीय मौसम विभाग ने पहले ही ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया था. अलर्ट में कहा गया था कि भारी बारिश, तेज तूफान और 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. फिर भी इस खतरनाक मौसम में नाव को पानी में जाने की अनुमति दे दी गई.

बचे लोगों की दर्द भरी कहानियां

इस हादसे से बचने वाले लोगों में 72 साल के बुजुर्ग रियाज हुसैन भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि वे करीब चार घंटे तक पानी में तैरते रहे. क्रूज जब खतरनाक तरीके से एक तरफ झुक गई तो यात्री आधे घंटे तक डर के मारे इधर-उधर भागते रहे, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की. एक दिल दहला देने वाली घटना मरीना मैसी और उनके 4 साल के बेटे त्रिशान की है. दोनों का शव बरामद हुआ तो वे एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे. उनके पति प्रदीप मैसी किसी तरह बच गए. उन्होंने बताया, “क्रूज वाले बार-बार कह रहे थे कि जहां बैठे हो वहीं बैठे रहो. उन्होंने न तो लाइफ जैकेट दी और न ही कोई मदद की. अचानक मुझे एक ट्यूब मिल गई, उसी के सहारे मैं किनारे तक पहुंच सका. किनारे पर खड़े लोग रस्सियां फेंक-फेंककर हमारी जान बचाते रहे.'

हादसे में जान गंवाने वाले

अब तक इस दुर्घटना में 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं. तीन बच्चों समेत कुल चार लोग अभी भी लापता हैं. लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शुक्रवार शाम को सर्च ऑपरेशन रोकना पड़ा. अब शनिवार सुबह 5 बजे से फिर से तलाशी शुरू की जाएगी.

बचाव कार्य में देरी

संकट की कॉल शाम 6:15 बजे आई थी, लेकिन पहली बचाव टीम 6:40 बजे तक भी नहीं निकल पाई क्योंकि उनका वाहन स्टार्ट ही नहीं हो रहा था. बाद में उपकरण दूसरे वाहन में डाले गए और दूसरी टीम शाम 7 बजे के आसपास रवाना हुई. इस देरी से कई और जानें जा सकती थी. शुरुआती समय में स्थानीय मछुआरों और किसानों ने बहुत बहादुरी दिखाई और 15 से ज्यादा लोगों को बचाया. बाद में NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमों ने जिम्मेदारी संभाली.

सरकार की कार्रवाई

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे राज्य में सभी क्रूज नावों, मोटरबोट और जल क्रीड़ाओं को तुरंत बंद करने का आदेश दे दिया है. साथ ही पूरे राज्य में सुरक्षा की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं. क्रूज पायलट महेश पटेल, सहायक छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर प्रभारी बृजेंद्र की नौकरी समाप्त कर दी गई है. होटल माइकल रिजॉर्ट एंड बोट क्लब के मैनेजर सुनील मरावी को सस्पेंड कर दिया गया है. क्षेत्रीय प्रबंधक संजय मल्होत्रा को मुख्यालय में अटैच कर दिया गया है. इस पूरे मामले की गहन जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है. इसमें गृह सुरक्षा महानिदेशक, मध्य प्रदेश सरकार के सचिव और जबलपुर मंडल के आयुक्त शामिल हैं. यह समिति यह पता लगाएगी कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी क्यों हुई, कहां-कहां कमियां थीं और किसकी गलती थी. सभी जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाएगा। यह हादला मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी पर्यटन आपदाओं में से एक बन गया है, जो याद दिलाता है कि लोगों की जान बचाने के लिए सुरक्षा नियमों का पालन कितना जरूरी है.

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