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हिंदी बेल्ट नहीं, बंगाली जड़ों से जन्मी है BJP... फिर भी बंगाल की सत्ता से इतनी दूर क्यों?

बंगाल की मिट्टी में बोया गया था जनसंघ का पहला बीज, लेकिन जिस विचार ने दिल्ली की सत्ता जीती, वही बंगाल में दशकों तक हाशिये पर क्यों रहा?

हिंदी बेल्ट नहीं, बंगाली जड़ों से जन्मी है BJP... फिर भी बंगाल की सत्ता से इतनी दूर क्यों?
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आज वाली बीजेपी को देखकर ज़्यादातर लोगों के दिमाग में क्या आता है? हिंदी बेल्ट, नॉर्थ इंडिया, राम मंदिर, गुजरात मॉडल, वगैरह वगैरह

फेयर इनॉफ, लेकिन यही पूरी स्टोरी नहीं है.

एक्चुअली बीजेपी की जो ओरिजिनल पॉलिटिकल वायरिंग है ना उसका एक इम्पॉर्टेंट सर्किट बंगाल, स्पेसिफिकली साउथ कोलकाता से निकला था.

मतलब जिस पार्टी को आज बंगाल में 'आउटसाइडर' बोला जाता है, उसकी आइडियोलॉजिकल और पॉलिटिकल ब्लूप्रिंट लिखने वाला बंदा खुद साउथ कोलकाता का बंगाली भद्रलोक था, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी.

अब यहीं से स्टोरी इंटरेस्टिंग होती है

साउथ कोलकाता, एक एलीट बंगाली हाउसहोल्ड… और फ्यूचर का पॉलिटिकल प्लॉट

अर्ली 1900s कलकत्ता

ब्रिटिश राज का इंटेलेक्चुअल HQ

पॉलिटिक्स भी यहीं, लिटरेचर भी यहीं, रेवोल्यूशन भी यहीं, एलीट अकैडेमिया भी यहीं

और इसी कलकत्ता में 1901 में पैदा हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी

कोई रेगुलर नेता बैकग्राउंड नहीं था, प्रॉपर एलीट बंगाली हाउसहोल्ड

उनके फादर थे सर आशुतोष मुखर्जी, लेजेंडरी एजुकेशनिस्ट, जज, अकैडमिक जायंट, कलकत्ता यूनिवर्सिटी के सुपर हेवीवेट फिगर

उस ज़माने में उनका सरनेम लिटरली इंटेलेक्चुअल पावर का सिंबल था

तो श्यामा प्रसाद का रूट मास पॉलिटिक्स वाला नहीं था

वो स्टूडेंट यूनियन पोस्टर चिपका के नहीं आए थे

उनका एंट्री पॉइंट था अकैडेमिया, लॉ, एडमिनिस्ट्रेशन, आइडियाज़

और ये डिफरेंस इम्पॉर्टेंट है

क्योंकि उनकी पॉलिटिक्स रोड से पहले थॉट प्रोसेस से बनी थी

33 की एज में कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बन गए, सोचो आज लोग 33 में लिंक्डइन बायो सेट कर रहे होते हैं

वो उस एज में वन ऑफ द यंगेस्ट वीसीज़ बन चुके थे

यहीं से समझ लो ये टिपिकल स्लोगन पॉलिटिशियन नहीं थे

ये सिस्टम समझने, इंस्टीट्यूशन्स रन करने और स्टेट को आइडियोलॉजी के थ्रू देखने वाले बंदे थे

कांग्रेस के साथ भी थे… और वहीं से क्रैक शुरू हुआ

अब ये पार्ट लोग कन्वीनियंटली स्किप कर देते हैं

श्यामा प्रसाद शुरू से कांग्रेस के परमानेंट एनिमी नहीं थे

इन फैक्ट, इंडिपेंडेंट इंडिया की फर्स्ट कैबिनेट में जवाहरलाल नेहरू के साथ मिनिस्टर थे

यस, सेम नेहरू कैबिनेट

इंडस्ट्री एंड सप्लाई मिनिस्टर

और ये डिटेल इम्पॉर्टेंट है बिकॉज़ इट टेल्स यू समथिंग क्रूशियल:

बीजेपी की आइडियोलॉजिकल रूट्स एंटी-कांग्रेस ज़रूर हैं, बट उसका फाउंडिंग कॉन्फ्लिक्ट कांग्रेस के बाहर से नहीं, अंदर से स्टार्ट हुआ था

फिर फ्रैक्चर आया

1950 में नेहरू-लियाकत पैक्ट हुआ, इंडिया-पाकिस्तान एग्रीमेंट, मेनली माइनॉरिटी प्रोटेक्शन के इश्यू पर

नेहरू का व्यू था डिप्लोमेसी और स्टेबिलिटी

श्यामा प्रसाद का व्यू था कि स्पेशली ईस्ट बंगाल (आज का बांग्लादेश) में हिंदुओं के सिक्योरिटी कन्सर्न्स को इंडिया सॉफ्ट हैंडल कर रहा है

उन्होंने ऑपोज़ किया

कैबिनेट छोड़ दी

और यही एक्चुअल आइडियोलॉजिकल स्प्लिट था

ये सिर्फ रिज़ाइनेशन नहीं थी

ये एक पॉलिटिकल लाइन खींचना था

एक साइड नेहरूवियन सेक्युलर स्टेट

दूसरी साइड कल्चरल नेशनलिज़्म प्लस स्ट्रॉन्गर नेशन-स्टेट लाइन

आगे चलकर इसी स्प्लिट ने कांग्रेस वर्सेस जनसंघ वर्सेस बीजेपी का फुल पॉलिटिकल टेम्पलेट बना दिया

1951 जनसंघ एंटर्स द चैट

फिर आता है एक्चुअल ओरिजिन पॉइंट, 1951, श्यामा प्रसाद मुखर्जी लॉन्च करते हैं भारतीय जनसंघ

ये वही पार्टी है जिसे आज सिंपल लैंग्वेज में बीजेपी का ओरिजिनल वर्ज़न बोल सकते हो

लाइनएज सिंपल है:

जनसंघ → जनता पार्टी → बीजेपी

सो टेक्निकली, बीजेपी का पॉलिटिकल बर्थ सर्टिफिकेट 1980 का हो सकता है,

बट उसका आइडियोलॉजिकल बर्थ सर्टिफिकेट 1951 में श्यामा प्रसाद के साथ साइन हो चुका था

और वही कोर आइरनी है:

बीजेपी का आइडियोलॉजिकल फादर एक बंगाली था

साउथ कोलकाता का

एलीट भद्रलोक इकोसिस्टम से निकला हुआ

यानि पार्टी का 'नॉर्थ इंडियन इमेज' बाद में बना

उसका फर्स्ट ड्राफ्ट बंगाल में लिखा गया था

पहला इलेक्शन… और फर्स्ट रियल वैलिडेशन भी बंगाल से

अब आता है सबसे अंडररेटेड पार्ट 1951-52 का फर्स्ट जनरल इलेक्शन

इंडिया का फर्स्ट लोकसभा इलेक्शन

और जनसंघ का भी फर्स्ट इलेक्टोरल टेस्ट

नेशनल लेवल पर जनसंघ ने कॉन्टेस्ट किया, बट रिज़ल्ट ब्लॉकबस्टर नहीं था

पार्टी ने सिर्फ 3 लोकसभा सीटें जीतीं

बस 3

और उन ३ में सबसे सिम्बॉलिक विन कौन सी थी?

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की, कलकत्ता साउथ ईस्ट से, जनसंघ की फर्स्ट सीरियस पार्लियामेंटरी लेजिटिमेसी दिल्ली से नहीं, कलकत्ता से आई थी

नॉट मेटाफॉरिकली, लिटरली

साउथ-ईस्ट कलकत्ता से उनकी जीत सिर्फ एक कॉन्स्टिट्यूएंसी विन नहीं थी

इट वाज़ द फर्स्ट प्रूफ कि जनसंघ सिर्फ ड्रॉइंग-रूम आइडियोलॉजी नहीं है, वोट भी ले सकती है

और ये विन रैंडम रूरल पॉकेट से नहीं आई थी

ये आई साउथ कोलकाता के एजुकेटेड, पॉलिटिकली हाइपर-अवेयर अर्बन बंगाल से

दैट मैटर्स, अ लॉट

क्योंकि इसका मतलब था:

बंगाल ने पहले फेज़ में जनसंघ को सुना भी, समझा भी, और वोट भी दिया

फिर बंगाल और बीजेपी का कनेक्शन टूटा कैसे?

और अब आता है बिगेस्ट आइरनी

जिस पॉलिटिकल स्ट्रीम को बंगाल ने अर्ली लेजिटिमेसी दी, वही स्ट्रीम बंगाल में डिकेड्स तक मार्जिनल हो गई

कैसे?

सिंपल आंसर: बंगाल का पॉलिटिकल मूड शिफ्ट हो गया

पोस्ट-पार्टिशन रिफ्यूजी पॉलिटिक्स, क्लास पॉलिटिक्स, लेफ्ट राइज़, भद्रलोक इंटेलेक्चुअल कल्चर, लेबर मूवमेंट्स, बंगाल का आइडियोलॉजिकल सेंटर अलग डायरेक्शन में निकल गया

जनसंघ का ग्रोथ नॉर्थ और वेस्ट इंडिया में एक्सेलरेट हुआ

बंगाल में उसका ऑर्गनाइज़ेशनल ग्राफ वीक रह गया

तो जो चीज़ बंगाल में कॉन्सेप्चुअलाइज़ हुई थी, वो हिंदी बेल्ट में स्केल हो गई

दैट्स द रियल स्टोरी

बीजेपी बंगाल में बॉर्न नहीं हुई इन द टेक्निकल सेंस

बट बीजेपी का आइडियोलॉजिकल एम्ब्रियो बंगाल में फॉर्म हुआ था

फिर उसका पॉलिटिकल अडल्टहुड नॉर्थ इंडिया में हुआ

बेसिकली आइडिया बंगाल का, एक्सपैंशन नॉर्थ का, पावर दिल्ली की

तो 'बीजेपी बंगाल में आउटसाइडर है', ट्रू या फॉल्स?

ऑनेस्ट आंसर?

डिपेंड्स किस लेंस से देख रहे हो

इलेक्टोरल लेंस से?

हाँ, बीजेपी बंगाल में लॉन्ग टाइम तक आउटसाइडर फोर्स थी

पावर स्ट्रक्चर का नैचुरल पार्ट नहीं थी

हिस्टॉरिकल लेंस से?

स्टोरी उतनी सिंपल नहीं है

क्योंकि बंगाल बीजेपी के लिए एलियन लैंड भी नहीं है

और नैचुरल होम टर्फ भी नहीं है

इट्स मोर लाइक…

एक ऐसी जगह, जहां आइडियोलॉजिकल सीड प्लांट हुआ,

बट ट्री कहीं और ग्रो हुआ

और अब डिकेड्स बाद, वही ट्री वापस उसी ज़मीन पर अपनी रूट्स क्लेम करने आया है

बस बंगाल का रिप्लाई ये है:

'सीड तुम्हारा हो सकता है, पर ज़मीन अब भी मेरी है'

और ऑनेस्टली?

इंडियन पॉलिटिक्स की मोस्ट फासिनेटिंग आइरनीज़ में से एक यही है

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