आज भी मुआवजे को तरस रहा है मध्य प्रदेश का यह गांव; कैसे KBC की विनर तहसीलदार ने गायब किया था इन गरीबों का करोड़ों रुपये
श्योपुर बाढ़ पीड़ितों के लिए जारी 2.40 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया. KBC विजेता तहसीलदार समेत 30 आरोपी गिरफ्तार, लेकिन पीड़ितों को अब भी न्याय का इंतजार.
अगस्त 2021 में मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में भारी बारिश के कारण आई भीषण बाढ़ ने कई गांवों को बुरी तरह तबाह कर दिया. इस बाढ़ में सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वालों में से एक थे ललितपुरा गांव के जयराम. उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर बहुत मेहनत से पाला-पोसा था अपना पशुधन. लेकिन बाढ़ ने सब कुछ बहा लिया. जयराम को इस बाढ़ में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ उनके 40 खरगोश, 15 मुर्गियां, 13 बकरियां, 4 गायें, 2 भैंसें और 2 बछड़े मर गए. साथ ही उनके तीन घर भी पूरी तरह से ढह गए और बह गए.
उस समय जयराम और उनके परिवार को उम्मीद थी कि सरकार बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देगी और उनके नुकसान की कुछ भरपाई हो जाएगी. लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि उनके जैसे गरीब परिवारों के लिए आने वाला मुआवजा कभी उनके हाथ तक नहीं पहुंचने वाला था. अब तक उन्हें पूरा मुआवजा नहीं मिला है. लेकिन हाल ही में इस घोटाले का खुलासा होने के बाद मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है. इस मामले में मुख्य आरोपी बडोदा तहसील की तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को गिरफ्तार कर लिया गया है.
अमिता सिंह तोमर कौन हैं?
अमिता सिंह तोमर 2019 में टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में हिस्सा लेकर 50 लाख रुपये जीत चुकी हैं. उस समय वे काफी चर्चा में आई थीं. लेकिन अब उनके ऊपर बाढ़ पीड़ितों के मुआवजे के पैसे गबन करने का गंभीर आरोप है.
क्या हुआ था घोटाले में?
श्योपुर जिले की बडोदा तहसील में बाढ़ से प्रभावित 960 किसानों और परिवारों को मुआवजा देने के लिए सरकार ने कुल 2 करोड़ 40 लाख 68 हजार 720 रुपये मंजूर किए थे. लेकिन जांच में सामने आया कि इनमें से ज्यादातर पैसा असल पीड़ितों तक नहीं पहुंचा. केवल 133 किसानों को ही बहुत कम रकम करीब 30 लाख रुपये से भी कम मिली. बाकी का बड़ा हिस्सा 127 ऐसे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया, जिनका बाढ़ पीड़ितों से कोई लेना-देना नहीं था. ये खाते दूर-दराज के इलाकों जैसे शिवपुरी और मानपुर के लोगों के थे। कुछ खाते उन पटवारियों के रिश्तेदारों के नाम पर भी थे, जिन्होंने खुद मुआवजे की लिस्ट तैयार की थी. पुलिस के अनुसार, छह किसानों का मुआवजा एक ही बैंक खाते में जमा किया जाता था. फिर उस पैसे को छोटी-छोटी रकम में (जैसे 50,000, 60,000, 90,000 या 1 लाख रुपये) निकाल लिया जाता था, ताकि किसी को शक न हो. ये सारे लेन-देन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर के डिजिटल सिग्नेचर (डिजिटल पहचान पत्र) से किए गए थे.
कितने लोग गिरफ्तार हुए?
इस घोटाले में अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस ने कुल 110 लोगों की पहचान की है. इनमें 18 पटवारी शामिल हैं. तहसीलदार अमिता सिंह तोमर समेत कई अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस चल रहा है. पटवारियों ने पूछताछ में बताया कि तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को इस घोटाले में 75 से 80 लाख रुपये मिलने थे. बाकी पैसा अन्य आरोपियों में बांट दिया गया था. ज्यादातर आरोपी पटवारियों के अपने रिश्तेदार थे, जिन्होंने अपने बैंक खातों का इस्तेमाल पैसे गबन करने के लिए किया.
पीड़ितों की दयनीय स्थिति
जयराम की पत्नी उर्मला ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'हमें सिर्फ 5,000 रुपये मिले. पूरा परिवार काम करने लगा. तीन बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ा. रिश्तेदारों से कर्ज लेकर हमने किसी तरह दो कमरे का छोटा सा घर बनाया. इसी तरह कई अन्य परिवारों ने भी शिकायत की कि उन्हें सिर्फ 5,000 रुपये दिए गए, जबकि उनका असली मुआवजा कहीं और चला गया. हेमंत कुशवाहा को 49,500 रुपये मिलने थे, सिर्फ 5,000 मिले. दिनेश को 48,000 रुपये मिलने थे, लेकिन पैसा कंप्यूटर बूथ वाले के खाते में चला गया. हरिमोहन, रामकिशन केवट, छोटुलाल, रमेश प्रजापति सभी ने बताया कि उनका मुआवजा गायब हो गया और वे अभी भी कष्ट झेल रहे हैं. कई परिवार अभी भी अधूरे या टूटे हुए घरों में रह रहे हैं. उनके बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं. कुछ को मुआवजा पाने के लिए रिश्वत भी देनी पड़ी.
कंप्यूटर ऑपरेटर भी गिरफ्तार
पुलिस ने तीन निजी कंप्यूटर ऑपरेटरों राम अवतार, धीरज सुमन और योगेश गौतम को भी गिरफ्तार किया है. ये लोग तहसील कार्यालय में काम करते थे. पुलिस का आरोप है कि इनके खातों में भी कुछ पैसा ट्रांसफर किया गया था. इनमें से एक के पिता ने कहा, 'मेरा बेटा सिर्फ 3,000 रुपये महीना कमाता था. इतना बड़ा घोटाला करने की हिम्मत उसे अकेले नहीं हो सकती. इसमें ऊपर वाले अधिकारियों का हाथ जरूर होगा.'
क्या कहते हैं अधिकारी?
तबादले से पहले राहत कार्य देख रहे अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट रूपेश उपाध्याय ने कहा, 'अगर मैं तबादला होने से पहले वहां होता, तो यह घोटाला नहीं हो पाता. तहसीलदार का यह काम था कि वह हर बैंक खाते की सही जांच करे.' उन्होंने यह भी बताया कि सरकार अब पटवारियों से ब्याज सहित करीब 1 करोड़ रुपये की वसूली करने की कोशिश कर रही है. लेकिन पीड़ितों को यह पैसा वापस मिल पाएगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है.




