तो इस वजह से हुआ जबलपुर के बरगी डैम पर बड़ा हादसा, क्रूज ड्राइवर ने बताई शुरू से आखिर तक की कहानी
बरगी डैम पर हुए हादसे को लेकर क्रूज पायलट महेश पटेल ने पहली बार सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने घटना की पूरी कहानी बताते हुए पीड़ित परिवारों से हाथ जोड़कर माफी भी मांगी है.
Bargi Dam accident
Bargi Dam Accident: मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. इस हादसे में अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 4 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से हटा दिया गया.
इस बीच हादसे के केंद्र में रहे क्रूज पायलट महेश पटेल ने पहली बार सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने घटना की पूरी कहानी बताते हुए पीड़ित परिवारों से हाथ जोड़कर माफी भी मांगी है.
कैसे बेकाबू हुए थे हालात?
महेश पटेल के मुताबिक, "जब क्रूज रवाना हुआ तब मौसम सामान्य था, लेकिन कुछ ही देर में हालात तेजी से बदल गए. अचानक तेज तूफान आ गया, जिससे लहरें उग्र हो गईं और स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी. हालात बिगड़ते देख उन्होंने तुरंत क्रूज को वापस मोड़ने का फैसला लिया, लेकिन कुछ ही मिनटों में विशाल लहरें क्रूज से टकराने लगीं और उसमें पानी भरने लगा. इससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई."
क्या सभी ने पहनी थी लाइफ जैकेट?
पायलट ने बताया कि उन्होंने समय रहते रिसेप्शन को सूचना दी और दूसरी नाव मंगाने की कोशिश की. हालांकि, शुरुआत में कई यात्री स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं पाए और झूमते हुए यात्रा का आनंद लेते रहे. उन्होंने कहा कि 'कई लोगों ने लाइफ जैकेट पहनने से भी इनकार कर दिया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई.'
किनारे से कितनी दूर डूबी नाव?
महेश पटेल ने बताया कि "जब क्रूज किनारे से करीब 100 मीटर दूर था, तभी उन्हें एहसास हुआ कि अब सुरक्षित पहुंचना संभव नहीं है. पानी तेजी से भर रहा था और क्रूज पर नियंत्रण खत्म हो गया. हालात इतने खराब हो चुके थे कि किसी भी तरह से उसे सुरक्षित स्थान तक ले जाना संभव नहीं था."
क्या खराब मौसम की मिली चेतावनी?
पायलट का कहना है कि खराब मौसम को लेकर उन्हें कोई आधिकारिक चेतावनी या निर्देश नहीं मिला था. उन्होंने बताया कि "उनके पास 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है और उनके पास वैध लाइसेंस व प्रशिक्षण भी है, जिसमें गोवा से मिला जीवनरक्षक प्रमाणपत्र शामिल है. नियमित तौर पर हर दो साल में प्रशिक्षण दिया जाता है और अपने करियर में उन्होंने पहले कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया."
महेश पटेल का दावा है कि उन्होंने क्रूज से उतरने से पहले यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि ज्यादा से ज्यादा यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहन ली हो. उन्होंने कहा कि अचानक आए तूफान के कारण उनके पास बचाव के लिए बहुत कम समय था. उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य रूप से जहां तीन सदस्यीय टीम होती है, वहां उस दिन केवल दो कर्मचारी मौजूद थे. वह क्रूज से सबसे आखिर में बाहर निकले.
क्या रहा हादसे का कारण?
पायलट ने भावुक होते हुए पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और कहा कि वह इस घटना से गहरे सदमे में हैं. उन्होंने कहा कि "उन्हें ठीक से खाना-पीना और सोना भी मुश्किल हो गया है." उन्होंने हादसे को प्राकृतिक आपदा बताते हुए कहा कि उन्होंने यात्रियों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया. साथ ही उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी आजीविका इसी नौकरी पर निर्भर थी.




