16 दिन-10 मंदिर, मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार के किस-किस मंदिर में पहुंचे सम्राट चौधरी, क्या पूरी हुई है मनोकामना?
15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने बिहार के सीएम के रूप में शपथ ली थी. उन्हें सीएम बने 16 दिन हो गए हैं. वहीं इन 16 दिनों में सम्राट चौधरी 10 मंदिरों में पूजा-अर्चना करने पहुंचे हैं.
Samrat Choudhary
सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल 2026 को बिहार के 24वें सीएम के रूप में शपथ ली थी. बिहार में पहली बार कोई भारतीय जनता पार्टी का सीएम देखने को मिला है. इससे पहले जेडीयू के नीतीश कुमार बिहार के सीएम थे. बिहार की जनता को सम्राट युग से अब काफी उम्मीदें हैं. उनको सीएम बने 16 दिन हो गए हैं. वहीं इन 16 दिनों में सम्राट चौधरी 10 मंदिरों में पूजा-अर्चना करने पहुंचे हैं.
15 अप्रैल से ही सम्राट के मंदिर जाने का सिलसिला शुरू हुआ जो अब तक तल रहा है. जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि सम्राट चौधरी की बिहार का सीएम बनने की मनोकामना पूरी हो गई है जिसके चलते वे अब अलग-अलग मंदिरों में जाकर पूजा कर रहे हैं.
किस-किस मंदिर में पहुंचे सम्राट?
15 अप्रैल - पटना के पंचरूपी हनुमान मंदिर में पूजा की
18 अप्रैल - सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर में पूजा की
19 अप्रैल - देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा की
19 अप्रैल - दुमका के बाबा बासुकीनाथ मंदिर में पूजा की
25 अप्रैल - सीतामढ़ी के मां जानकी मंदिर में पूजा की
28 अप्रैल - पटना के प्राचीन बड़ी पटनदेवी मंदिर में पूजा की
28 अप्रैल - पटना के छोटी पटन देवी मंदिर में पूजा की
01 मई - अपने आवास पर भगवान सत्यनारायण की पूजा की
01 मई - गया के विष्णुपद मंदिर में पूजा की
01 मई - बोधगया के महाबोधि मंदिर में पूजा की
01 मई - नालंदा के श्री श्री 108 श्री शरण निवास बाबा महतो साहब मंदिर में पूजा की
कब होगा कैबिनेट का विस्तार?
बिहार की नई सरकार के गठन के दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद मंत्रिमंडल विस्तार न होना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस देरी के बीच सत्ता के शीर्ष नेताओं की गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही कैबिनेट को अंतिम रूप दिया जा सकता है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का अचानक 7 सर्कुलर रोड पहुंचना सियासी हलकों में खासा चर्चा में रहा. यहां उनकी मुलाकात पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हुई, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक अहम बातचीत हुई.
सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने कैबिनेट विस्तार को लेकर विस्तार से चर्चा की. बातचीत में संभावित मंत्रियों के नाम, राजनीतिक संतुलन और जातीय समीकरणों को साधने पर विशेष फोकस रहा. माना जा रहा है कि सरकार इस बार हर वर्ग और क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि राजनीतिक संतुलन बनाए रखा जा सके.




