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सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली बेल, छलका उमर खालिद का दर्द! बोला- मैंने हार मान ली अब जेल ही....

दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद छात्र नेता उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है. उन्होंने कहा कि सह-आरोपियों को जमानत मिलने पर वह खुश और राहत महसूस कर रहे हैं, हालांकि खुद को राहत न मिलने पर उन्होंने हालात को स्वीकार कर लिया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली दंगों के आरोपियों की याचिका पर सुनवाई की.

सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली बेल, छलका उमर खालिद का दर्द! बोला- मैंने हार मान ली अब जेल ही....
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( Image Source:  X/ @kaushikrj6 )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Updated on: 5 Jan 2026 4:12 PM IST

दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद छात्र नेता उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है. उन्होंने कहा कि सह-आरोपियों को जमानत मिलने पर वह खुश और राहत महसूस कर रहे हैं, हालांकि खुद को राहत न मिलने पर उन्होंने हालात को स्वीकार कर लिया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली दंगों के आरोपियों की याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट 5 आरोपियों को दो बेल दी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है.

उमर खालिद की पार्टनर बानोज्योत्सना लाहिड़ी ने इस बातचीत को सार्वजनिक करते हुए बताया कि खालिद अब जेल को ही अपनी जिंदगी मान चुके हैं. लाहिड़ी की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस मामले में भावनात्मक और मानवीय पहलू को फिर से चर्चा में ला दिया है.

क्या बोला उमर खालिद?

बानोज्योत्सना लाहिड़ी ने एक्स पर पोस्ट शेयर करके लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी उमर खालिद से बातचीत हुई. उन्होंने पोस्ट में लिखा “उमर ने कहा, मैं दूसरों के लिए बहुत खुश हूं, जिन्हें बेल मिल गई! बहुत राहत मिली.” लाहिड़ी ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि जब उन्होंने उमर खालिद से कहा कि वह मंगलवार को जेल में उनसे मिलने आएंगी, तो उनका जवाब था “अच्छा, अच्छा, आ जाना. अब यही जिंदगी है.” लाहिड़ी ने यह भी कहा कि जमानत न मिलने के फैसले के बाद उमर खालिद ने जैसे हालात से समझौता कर लिया है और अब उन्होंने हार मान ली है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि दोनों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम यानी UAPA के तहत मामला बनता है. हालांकि, इसी मामले में 5 अन्य एक्टिविस्ट गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई.

ट्रायल में देरी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल में देरी को जमानत के लिए ट्रम्प कार्ड नहीं माना जा सकता. अदालत के अनुसार, आरोपों की गंभीरता और UAPA के प्रावधानों को देखते हुए यह तर्क अपने आप में पर्याप्त नहीं है. बता दें, फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे.

पुलिस ने उमर खालिद सहित 7 आरोपियों पर इन दंगों की साजिश रचने और मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया है. हालांकि, सभी आरोपी लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं. अब तक इस मामले में ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है, जबकि उमर खालिद एक आरोपी के तौर पर करीब पांच साल जेल में बिता चुके हैं.

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