Begin typing your search...

आखिर किस केस में जेल काट रहे हैं उमर खालिद और शरजील इमाम? सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी है. 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में शीर्ष अदालत ने ये स्पष्ट कर दिया है कि आरोपियों को राहत नहीं मिलेगी और उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा. आरोपी फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेल में बंद हैं.

आखिर किस केस में जेल काट रहे हैं उमर खालिद और शरजील इमाम? सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की याचिका
X
( Image Source:  X/ @SumitHansd )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Updated on: 5 Jan 2026 11:17 AM IST

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत पर आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है. 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में शीर्ष अदालत यह स्पष्ट करेगी कि आरोपियों को राहत मिलेगी या उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा.

स्‍टेट मिरर अब WhatsApp पर भी, सब्‍सक्राइब करने के लिए क्लिक करें

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया आज उन जमानत याचिकाओं पर निर्णय सुनाएगी, जिन पर सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था. इस फैसले पर न सिर्फ आरोपियों और उनके परिजनों की नजर है, बल्कि पूरे देश की कानूनी और राजनीतिक दुनिया भी टिकी हुई है.

किन-किन आरोपियों की जमानत पर फैसला

सुप्रीम कोर्ट उमर खालिद और शरजील इमाम के अलावा गुलफिशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद की जमानत याचिकाओं पर भी आज अपना फैसला सुनाएगा. ये सभी आरोपी फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेल में बंद हैं.

पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?

पिछले साल 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विस्तृत सुनवाई की थी. उस दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पक्ष रखा था, जबकि आरोपियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा ने दलीलें पेश की थीं. सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.

उमर खालिद और शरजील इमाम पर आरोप

उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का ‘मुख्य साजिशकर्ता’ होने का आरोप है. उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. जिसके चलते वे लंबे समय से जेल काट रहे हैं.

बचाव पक्ष की दलीलें

जमानत की मांग करते हुए आरोपियों के वकीलों ने मुख्य रूप से ट्रायल में हो रही देरी का मुद्दा उठाया. अदालत को बताया गया कि आरोपी 5 सालों से अधिक समय से जेल में हैं, जबकि अब तक मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हो पाई है. बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि इतने लंबे समय के बावजूद ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों ने हिंसा भड़काई या दंगों को अंजाम देने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई.

दिल्ली पुलिस का कड़ा विरोध

दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिकाओं का सख्त विरोध किया. पुलिस का कहना था कि यह मामला राज्य को अस्थिर करने की एक सोची-समझी साजिश से जुड़ा है. पुलिस के मुताबिक, यह कोई अचानक भड़की हिंसा नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित ‘पैन इंडिया’ साजिश थी, जिसका उद्देश्य सरकार बदलना और आर्थिक रूप से देश को कमजोर करना था. ट्रायल में हो रही देरी को लेकर दिल्ली पुलिस ने कहा कि इसके लिए खुद आरोपी जिम्मेदार हैं. पुलिस का दावा था कि यदि आरोपी सहयोग करें, तो मुकदमे को 2 सालों के भीतर पूरा किया जा सकता है.

साल 2020 में हुआ था दंगा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के दौरान फरवरी 2020 में हिंसा भड़क उठी थी. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे.

DELHI NEWS
अगला लेख