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Pakistan-Afghanistan के बीच जंग की आहट? क्या भारत पर पड़ेगा कोई असर? जंग हुई तो ये होंगे 5 बड़े खतरे

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता सीमा तनाव अब बड़े टकराव का संकेत दे रहा है. टारगेटेड हमलों, बदले की चेतावनी और बढ़ती बयानबाजी के बीच सवाल उठ रहा है कि अगर हालात जंग तक पहुंचे तो इसका असर सिर्फ दोनों देशों ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा.

Pakistan-Afghanistan के बीच जंग की आहट? क्या भारत पर पड़ेगा कोई असर? जंग हुई तो ये होंगे 5 बड़े खतरे
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( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA )

Pakistan Afghanistan Tension: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. रविवार को पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी सेना ने अफगानिस्तान की सीमा से लगे इलाकों में सक्रिय आतंकवादी ठिकानों पर टारगेटेड हमले किए हैं, पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल के दिनों में देश के अंदर बढ़ी आतंकी गतिविधियों के जवाब में की गई.

इन हमलों को लेकर विवाद भी सामने आया है. अफगान मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि तड़के हुए इन हमलों में एक ही परिवार के कई सदस्य मारे गए. हालांकि, हताहतों की तादाद को लेकर दोनों देशों की ओर से आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. उधर तालिबान ने कहा है कि वह इस हमले का हर हाल में बदला लेगा.

पाकिस्तान ने कैसे दिया ऑपरेशन को अंजाम?

पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ये अभियान खुफिया जानकारी के आधार पर और चुनिंदा तरीके से चलाए गए. मंत्रालय के मुताबिक, इन हमलों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े शिविरों को निशाना बनाया गया. इन घटनाओं के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो हालात किस दिशा में जा सकते हैं. आइये जानते हैं.

  • बिज़नेस पर क्या पड़ेगा असर?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा व्यापार के लिए बहुत अहम है. चमन और तोरखम जैसे प्रमुख बॉर्डर पहले ही कई बार बंद हो चुके हैं. अगर दोनों के बीच जंग होती है तो सभी बड़े रास्ते बंद हो सकते हैं. इससे खाने-पीने की चीज़ें, ईंधन और जरूरी सामान की कमी हो सकती है. खासकर अफगानिस्तान, जो आयात पर ज्यादा निर्भर है, वहां महंगाई तेजी से बढ़ सकती है. पाकिस्तान को भी व्यापार में नुकसान और सुरक्षा खर्च बढ़ने से आर्थिक झटका लग सकता है.

  • आतंकी संगठन क्या उठाएंगे फायदा?

दोनों देश एक-दूसरे पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाते रहे हैं, अगर युद्ध होता है तो टीटीपी और बीएलए जैसे उग्रवादी समूह हालात का फायदा उठाकर अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं. पहाड़ी और दूर-दराज इलाकों में इन्हें रोकना मुश्किल होगा. अस्थिरता बढ़ने से कट्टरपंथी संगठन नए लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश भी कर सकते हैं.

  • भारत के साथ बिजनेस और कनेक्टिविटी पर असर

भारत की अफगानिस्तान में विकास परियोजनाएं और मानवीय सहायता कार्यक्रम रहे हैं. यदि युद्ध होता है तो क्षेत्रीय व्यापार मार्ग, खासकर मध्य एशिया से जुड़ाव की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं. चाबहार पोर्ट के जरिए भारत की कनेक्टिविटी रणनीति पर भी इंडायरेक्ट प्रभाव पड़ सकता है.

  • क्या लंबा खिच सकता है वॉर?

पहाड़ी इलाका, कमजोर सप्लाई लाइन और उग्रवादी गतिविधियों के कारण किसी भी पक्ष को जल्दी जीत मिलना मुश्किल हो सकता है. युद्ध लंबा चल सकता है, जिससे हजारों सैनिकों और आम नागरिकों की जान जा सकती है. इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और सेना पर भारी बोझ पड़ेगा और अंदरूनी राजनीतिक अस्थिरता, विरोध प्रदर्शन और जनता का दबाव बढ़ सकता है. तालिबना गुरिल्ला युद्ध और लंबे समय के लिए लड़ने के लिए जाना जाता है.

  • शहर के अंदर के इलाकों पर हमला

मौजूदा झड़पों में हवाई हमले, ड्रोन और भारी हथियारों का इस्तेमाल देखा गया है. अगर युद्ध बढ़ता है तो दोनों देश एक-दूसरे के अंदरूनी इलाकों में भी हमले कर सकते हैं, जैसे सड़कों, पुलों और सप्लाई ठिकानों पर. इससे आम लोगों की जानें जाएंगी.

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