बिहारी सुन बौखलाया नशे में धुत हेड कांस्टेबल, 1 गोली से ले ली 2 युवकों की जान; जानें क्या है पूरा मामला
राजधानी दिल्ली के जाफरपुर कलां इलाके के रावता गांव में एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जब दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल ने अपनी सर्विस पिस्टल से गोली चला दी.
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राजधानी दिल्ली के जाफरपुर कलां इलाके के रावता गांव में एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जब दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल ने अपनी सर्विस पिस्टल से गोली चला दी. इस गोलीबारी में 21 वर्षीय फूड डिलीवरी एजेंट समेत दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई.
यह घटना न सिर्फ बेहद दर्दनाक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह एक छोटी सी कहासुनी जानलेवा बन सकती है. आरोप है कि पुलिसकर्मी नशे की हालत में था और उसने भाषा व क्षेत्रीय पहचान को लेकर विवाद खड़ा किया, जो देखते ही देखते खून-खराबे में बदल गया.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
शनिवार रात रावता गांव में रूपेश कुमार के 2 वर्षीय बेटे का जन्मदिन मनाया जा रहा था. इस मौके पर करीब 20 लोग मौजूद थे, जिनमें परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त शामिल थे. केक काटने और जश्न के बाद, रात करीब 2 बजे मेहमान अपने-अपने घर लौटने लगे. करीब 13 लोग, जिनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल थे, मुख्य सड़क पर सवारी का इंतजार कर रहे थे. इसी दौरान पांडव (21), कृष्ण (30) और दीपक (21) एक मोटरसाइकिल पर जाने की तैयारी में थे, जबकि अन्य साथी स्कूटर पर मौजूद थे.
इसी दौरान वहां रहने वाला नीरज बलहारा (35), जो दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में हेड कांस्टेबल है, मौके पर पहुंचा. बताया जा रहा है कि वह नशे की हालत में था. उसने वहां खड़े लोगों से सवाल-जवाब शुरू किए और उनके वहां होने पर आपत्ति जताई. दीपक ने बताया कि वे लोग अपनी क्षेत्रीय भाषा (मैथिली/अंगिका) में बातचीत कर रहे थे. इस पर नीरज भड़क गया और कथित तौर पर बिहार से होने को लेकर अपशब्द कहने लगा. देखते ही देखते बहस बढ़ गई.
कैसे 1 गोली से गई 2 की जान?
स्थिति तब बेकाबू हो गई जब नीरज ने अपनी सरकारी ‘ग्लोक’ पिस्टल निकाल ली. उसने पिस्टल को मोटरसाइकिल के हैंडल पर टिकाकर सीधे पांडव के सीने पर निशाना साधा और ट्रिगर दबा दिया. यह गोली इतनी घातक साबित हुई कि पांडव के सीने को चीरते हुए पीछे बैठे कृष्ण के पेट में जा धंसी. पांडव ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल कृष्ण जमीन पर गिर पड़ा.
घायल कृष्ण को तुरंत राव तुला राम मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल रेफर कर दिया गया. लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई. घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि वारदात के बाद आरोपी को कोई पछतावा नहीं था और वह मौके से भागने से पहले लोगों को धमकाता रहा.
कैसे हुई आरोपी कांस्टेबल की गिरफ्तारी?
घटना के बाद नीरज बलहारा ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया और फरार हो गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने तुरंत कई टीमें गठित कीं. आखिरकार रविवार देर शाम पुलिस ने उसे हरियाणा के रोहतक के पास से गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ की जा रही है.




