क्या है भागलपुर के विक्रमशिला सेतु गिरने की बड़ी वजह? पिछले 10 साल से अटका था पुल से जुड़ा यह कार्य
भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर पिलर का स्लैब गिरने से ट्रैफिक पूरी तरह बंद हो गया है. हजारों लोग प्रभावित हैं, वहीं पुल के मेंटेनेंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर एक बड़ा और दुखद हादसा हो गया है. यह पुल कोसी-सीमांचल क्षेत्र और पूर्वोत्तर राज्यों को भागलपुर से जोड़ने वाला बहुत अहम पुल है. रविवार की देर रात अचानक पुल के 133 नंबर पाए (पिलर) का एक बड़ा स्लैब (कंक्रीट का हिस्सा) टूटकर गंगा नदी में गिर गया. इस घटना के बाद पुल पर से आने-जाने का पूरा रास्ता बंद हो गया है. घटना की सूचना मिलते ही आसपास के इलाके में काफी हड़कंप मच गया. लोग डर गए और प्रशासन को तुरंत पुल पर ट्रैफिक रोकना पड़ा.
यह पुल भागलपुर शहर को गंगा नदी के उस पार वाले इलाकों से जोड़ने का मुख्य साधन है. इसलिए पुल के बंद होने से हजारों लोगों की रोजाना की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो गई है. छात्र, नौकरी करने वाले लोग, बाजार जाने वाले व्यापारी और आम यात्री सभी परेशान हैं. इस पुल का उद्घाटन 23 जुलाई 2001 को तत्कालीन बिहार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया था. इस पुल की आधारशिला 15 नवंबर 1990 को रखी गई थी, और इसके निर्माण में लगभग 11 साल का समय लगा (1990-2001). रिपोर्ट के मुताबिक 26 साल पहले 838 करोड़ रुपये की लागत आई थी और मूल पुल का जीर्णोद्धार 2017 में 16 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था.
मरम्मत की तैयारी चल रही थी, तभी हुआ हादसा
दरअसल, इस पुल की मरम्मत को लेकर विभाग पहले से ही काम कर रहा था. अधिकारी और इंजीनियर इस बात का आकलन कर रहे थे कि पुल की मरम्मत में कितना खर्च आएगा. भागलपुर से लगभग 12 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार करके मुख्यालय भेज दिया गया था. पथ निर्माण विभाग के बड़े अधिकारी इस प्रस्ताव पर वित्त विभाग से राय और मंजूरी मांग रहे थे, ताकि जल्द से जल्द मरम्मत का काम शुरू किया जा सके. विभाग की योजना यह थी कि मानसून शुरू होने से पहले ही पुल की पूरी मरम्मत कर ली जाए. इससे बरसात के मौसम में कोई बड़ी समस्या न आए. कुछ दिन पहले ही पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल खुद मुख्यालय की टीम के साथ पुल का निरीक्षण करने आए थे. उन्होंने मरम्मत के काम को बहुत जरूरी बताया था और जल्दी एस्टीमेट भेजने के निर्देश दिए थे. पीरपैंती के दौरे के दौरान भी उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से पुल की हालत के बारे में चर्चा की थी.
2016 के बाद ठीक से मेंटेनेंस नहीं हुआ
विभाग को भेजे गए एस्टीमेट में बताया गया है कि पुल की आखिरी बड़ी मरम्मत साल 2016 में हुई थी. उस समय पिलरों की बियरिंग बदली गई थी और कुछ जगहों पर दरारें भरने के लिए कार्बन प्लेट लगाई गई थी. मुंबई की एक कंपनी को चार साल तक पुल की नियमित देखभाल का जिम्मा भी सौंपा गया था. लेकिन साल 2020-21 के बाद उस कंपनी ने काम करना बंद कर दिया. इसके बाद से पुल का नियमित और मेंटेनेंस नहीं हो सका. पिछले चार सालों में सिर्फ सतही काम ही हुए जैसे- सड़क की सफाई करना, बालू और गिट्टी हटाना, और बिजली के बल्ब बदलना. पुल के अहम हिस्सों जैसे बियरिंग, एक्सपेंशन ज्वाइंट, कार्बन प्लेट और स्ट्रक्चरल मजबूती से जुड़े कामों पर ध्यान नहीं दिया गया. इसी वजह से पुल की हालत धीरे-धीरे खराब होती गई.
क्या कहा CMD डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने?
बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) के CMD डॉ. चंद्रशेखर सिंह कहते हैं, 'भागलपुर में एक हादसा हुआ है. विक्रमशिला-सेतु पुल का एक स्लैब गिर गया है... भागलपुर की ट्रैफिक पुलिस सबसे पहले वहां पहुंची, ट्रैफिक को पूरी तरह रोक दिया और पुल को खाली करवा लिया. कुछ देर बाद, स्लैब पूरी तरह से गिर गया और नदी में समा गया... किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है... पुल का रखरखाव NH डिवीज़न RCD द्वारा किया जा रहा है, और इसकी मुख्य ज़िम्मेदारी भागलपुर के प्रशासक को दी गई थी, जिन्हें निलंबित कर दिया गया है....' वे आगे कहते हैं, 'हमने वहां एक टीम भेजी है... हमने IIT पटना से भी अनुरोध किया है कि वे इसे जल्द से जल्द ठीक करने के तरीके सुझाएं हम वहाँ के लोगों के लिए वैकल्पिक सुविधाएं स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं... मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख से बात की है। हम सीमा सड़क संगठन (Border Road Organisation) और सेना से भी सलाह-मशविरा कर रहे हैं. हम वहां के लोगों के लिए वैकल्पिक सुविधाओं की व्यवस्था करने के लिए भी उनसे सलाह ले रहे हैं... हम तकनीकी टीम की सिफारिशों के अनुसार इस पर काम करेंगे.'
अब क्या होगा?
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर साकेत कुमार ने बताया कि पहले वाला एस्टिमेट्स हेडक्वार्टर्स में विचाराधीन था और जल्द काम शुरू करने की तैयारी थी. लेकिन अब 133 नंबर पाए का स्लैब गिर जाने के बाद पूरी स्थिति बदल गई है. अब अधिकारियों की योजना है कि पुल की मरम्मत के लिए नए सिरे से विस्तृत और पूरी तरह नया एस्टीमेट तैयार किया जाए. इस बार ज्यादा ध्यान दिया जाएगा ताकि आगे कभी इस तरह की घटना न दोहराए. पुल की पूरी संरचना की जांच कराई जाएगी और जरूरी मजबूती का काम किया जाएगा. यह पुल सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी और जीवन का जरुरी हिस्सा है. इसलिए जल्द से जल्द इसे सुरक्षित और मजबूत बनाने की जरूरत है. प्रशासन और विभाग से लोग उम्मीद कर रहे हैं कि वे इस मामले को प्राथमिकता देकर जल्दी कार्रवाई करेंगे.




