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कौन बनेगा पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री? सुवेंदु अधिकारी ने ऐसे 5 साल में पलट दी बाजी, 3 सीटों वाली BJP कैसे बनी सबसे पावरफुल

बंगाल में BJP की 3 से 77 सीटों तक की छलांग में सुवेंदु अधिकारी की भूमिका अहम रही. क्या वही बनेंगे CM? जानिए पूरा राजनीतिक समीकरण. अब सबसे बड़ा सवाल यही है, बीजेपी का मुख्यमंत्री कौन?

Suvendu Adhikari, Bengal CM, BJP
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Bengal next CM: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम रुझान स्पष्ट तौर पर सामने आ गया है. दो तिहाई बहुत से बीजेपी की पहली सरकार बनना तय है. वहीं ममता बनर्जी की टीएमसी की अब तक सबसे शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है. बीजीपी जीत के साथ ही अब सवाल यह उठने लगे हैं कि BJP का कौन सा नेता West Bengal का अगला मुख्यमंत्री बन सकता है. ऐसे नेताओं के सुवेंद्र अधिकारी, दिलिप घोष, स्वप्नदास भट्टाचार्य, सामिक भट्टाचार्य और सुकांत मजूमदार का नाम अपने आप सामने आ जाता है. अगर महिला नेता को सीएम बनाने की बात करें तो लॉकेट चटर्जी और अग्निमित्रा पॉल भी दावेदार हो सकती हैं.

सीएम पद के दावेदारों में से सुवेंद्र अधिकारी एक ऐसा नाम है, जिनकी सीएम बनने की संभावना सबसे ज्यादा है. ऐसा इसलिए जब 2020 में सुवेंद्र अधिकारी बीजेपी में शामिल हुए, तब बीजेपी 294 वाली सदन में तीन विधायकों वाली पार्टी थी. साल 2021 का चुनाव वहां के लोकप्रिय और जमीनी नेता दिलिप घोषण के नेतृत्व में लड़ा गया. उस समय भी सुवेंद्र अधिकारी ने परदे के पीछे से बीजेपी को जिताने की भरपूर कोशिश की. इसका नतीजा यह निकला कि बीजेपी 2021 चुनाव में 3 से 77 विधायकों वाली पार्टी बन गई.

चुनाव के बाद सुवेंद्र अधिकारी को पार्टी ने विधानसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनाया. तब से वह लगातार पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं. साथ ही केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनका तालमेल भी सबसे अच्छा माना जाता है. अब बीजेपी बंगाल में सरकार बनाने के कगार पर है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर सुवेंद्र अधिकारी कौन हैं, जिनका ​बीजेपी से सिर्फ छह साल का सरोकार है, लेकिन वो बंगाल सीएम पद के सबसे प्रबल दावेदार बन गए हैं.

कौन हैं सवेंदु अधिकारी?

सुवेंदु अधिकारी बंगाल बीजेपी का सबसे मजबूत चेहरा माने जाते हैं. पहले तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के करीबी रहे, लेकिन 2020 में बीजेपी में शामिल होकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. 2021 में नंदीग्राम से ममता को हराने के बाद उनका कद और बढ़ा. फिलहाल नेता प्रतिपक्ष हैं, संगठन और जमीनी नेटवर्क दोनों पर मजबूत पकड़ रखते हैं, इसीलिए CM रेस में फ्रंट-रनर माने जाते हैं. फिर, सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति का ऐसा नाम हैं, जिन्होंने राज्य की सत्ता की लड़ाई में बीजेपी को जमीन से उठाकर मुख्य चुनौती देने वाली ताकत बनाने में अहम भूमिका निभाई.

सुवेंदु का राजनीतिक करियर तृणमूल कांग्रेस (TMC) से शुरू हुआ, जहां वे ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाते थे. नंदीग्राम आंदोलन (2007) के दौरान उनकी पहचान एक जमीनी और आक्रामक नेता के रूप में बनी, जिसने उन्हें राज्य स्तर पर बड़ा कद दिलाया.

2016 तक बीजेपी पश्चिम बंगाल में हाशिए की पार्टी थी, विधानसभा में उसके पास सिर्फ 3 विधायक थे. लेकिन 2020 में सुवेंदु अधिकारी के टीएमसी छोड़कर बीजेपी में आने के बाद समीकरण तेजी से बदले. उन्होंने अपने प्रभाव वाले इलाकों (पूर्व और दक्षिण बंगाल) में पार्टी को मजबूत किया और TMC के कई नेताओं को बीजेपी में लाने में अहम भूमिका निभाई.

2021 विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से उन्होंने खुद ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. इस जीत ने उन्हें बीजेपी का सबसे बड़ा बंगाली चेहरा बना दिया. उनके नेतृत्व में बीजेपी ने 3 सीटों से छलांग लगाकर 77 सीटें जीतीं, जो पार्टी के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि थी. विधानसभा चुनाव 2026 परिणाम के रुझानों में बीजेपी 294 में से 196 पर आगे है. इसके पीछे अहम योगदान सुवेंद्र का माना जाता है. वर्तमान में वे नेता प्रतिपक्ष हैं और संगठन, रणनीति व जमीनी पकड़ के कारण उन्हें भविष्य का संभावित मुख्यमंत्री चेहरा भी माना जाता है.

विधानसभा चुनाव से पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई बार इस बात पर जोर दिया था कि राज्य का मुख्यमंत्री कोई 'बंगाली' ही होगा. बीजेपी की इस रणनीति को टीएमसी (TMC) के उस नैरेटिव की काट माना गया, जिसमें वो लगातार बीजेपी को 'बाहरी लोगों' (बोहिरागोतो) की पार्टी बताती रही है. शाह के बयानों के हिसाब से भी सुवेंद्र प्रमुख चेहरा खुद ब खुद बन गए हैं. ?

सीएम पद की रेस में सुवेंद्र के अलावा और कौन?

1. दिलीप घोष

दिलीप घोष बंगाल बीजेपी के पुराने और आक्रामक शैली के नेता हैं. RSS पृष्ठभूमि से आए घोष ने राज्य अध्यक्ष रहते हुए पार्टी को 2016–2021 के बीच तेजी से बढ़ाया. संगठन पर पकड़ और कैडर से सीधा संपर्क उनकी ताकत है. केंद्र नेतृत्व में भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. हालांकि हाल के वर्षों में उनका प्रभाव कुछ कम हुआ, फिर भी वे मजबूत दावेदार बने हुए हैं.

3. सामिक भट्टाचार्य

सामिक भट्टाचार्य बीजेपी के बौद्धिक और विचारधारा वाले चेहरों में गिने जाते हैं. वे लंबे समय से पार्टी के वैचारिक ढांचे से जुड़े हैं और संगठन में रणनीतिक भूमिका निभाते रहे हैं. RSS और कोर कैडर के बीच उनकी स्वीकार्यता है. हालांकि उनका जनाधार सीमित माना जाता है, लेकिन पार्टी के अंदर उनकी पकड़ और नीति स्तर पर योगदान उन्हें संभावित विकल्प बनाता है.

4. स्वपन दासगुप्ता

स्वपन दासगुप्ता एक जाने-माने पत्रकार और राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. वे बीजेपी के “थिंक टैंक” माने जाते हैं और नीति, वैचारिक रणनीति में उनकी मजबूत भूमिका रही है. शहरी और बुद्धिजीवी वर्ग में उनकी पकड़ है. हालांकि वे जननेता कम और विचारक ज्यादा माने जाते हैं, लेकिन केंद्र नेतृत्व के भरोसेमंद चेहरों में शामिल हैं.

5. सुकांत मजूमदार

सुकांत मजूमदार वर्तमान में बंगाल बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे का अहम चेहरा रहे हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. वे युवा नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं और पार्टी के विस्तार में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है. केंद्र नेतृत्व से सीधा कनेक्शन और संगठन पर पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है, खासकर अगर बीजेपी “नई पीढ़ी” का चेहरा चुनती है.

6. लॉकेट चटर्जी (Locket Chatterjee)

लॉकेट चटर्जी बीजेपी की प्रमुख महिला नेता और सांसद हैं. वे बंगाल में महिला वोट बैंक और सांस्कृतिक-राजनीतिक पहचान को मजबूत करने का चेहरा रही हैं. पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व दोनों से उनका जुड़ाव मजबूत है. हालांकि उन्हें CM फेस के तौर पर कम आंका जाता है, लेकिन महिला नेतृत्व के तौर पर उनका नाम चर्चा में रहता है.

7. निशिथ प्रमाणिक

निशिथ प्रमाणिक पश्चिम बंगाल के कूचबिहार से उभरने वाले युवा बीजेपी नेता हैं. वे पहले तृणमूल कांग्रेस में थे, लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हुए और तेजी से आगे बढ़े. वे लोकसभा सांसद बने और केंद्र सरकार में राज्य मंत्री (गृह) रहे. उत्तर बंगाल में संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ है और युवा तथा राजबंशी समुदाय में उनका प्रभाव उन्हें पार्टी का अहम चेहरा बनाता है.

8. अग्निमित्रा पॉल

अग्निमित्रा पॉल पश्चिम बंगाल बीजेपी की प्रमुख महिला नेता और विधायक हैं. वे फैशन डिजाइनर से राजनीति में आईं और महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. आसनसोल क्षेत्र में उनका प्रभाव माना जाता है. पार्टी में उनका सीधा जुड़ाव केंद्रीय नेतृत्व से है और वे महिला वोट बैंक के साथ शहरी वर्ग में बीजेपी की मजबूत आवाज के रूप में उभरी हैं.

दरअसल, बंगाल बीजेपी में कई चेहरे हैं, लेकिन मुकाबला मुख्य रूप से सुवेंदु अधिकारी, दिलीप घोष और सुकांत मजूमदार के बीच माना जा रहा है. अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व और चुनावी समीकरणों पर निर्भर करेगा. यानी “चेहरा” राजनीति से ज्यादा “रणनीति” तय करेगी.

विधानसभा चुनाव 2026
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