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बिहार चुनाव 2025: बुरी तरह हारने के बावजूद इस बात से बेहद खुश होंगे तेजस्‍वी यादव, बीजेपी और जेडीयू दोनों से निकले आगे

बिहार चुनाव 2025 में एनडीए ने शानदार जीत दर्ज की और 202 सीटें हासिल कीं, जबकि महागठबंधन 35 पर सिमट गया. तेजस्वी यादव की RJD ने मात्र 25 सीटें जीतीं, लेकिन 23% वोट शेयर के साथ वह भाजपा और जदयू से आगे रही. भाजपा को 20.07% और जदयू को 19.26% वोट मिले. RJD का यह 2010 के बाद दूसरा सबसे खराब सीट प्रदर्शन है. कांग्रेस, वाम दल और नई पार्टियाँ जैसे जन सुराज अपना खाता भी नहीं खोल पाईं.

बिहार चुनाव 2025: बुरी तरह हारने के बावजूद इस बात से बेहद खुश होंगे तेजस्‍वी यादव, बीजेपी और जेडीयू दोनों से निकले आगे
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( Image Source:  ANI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह4 Mins Read

Updated on: 15 Nov 2025 9:56 AM IST

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जहां एनडीए गठबंधन ने सत्ता पर अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखी है, वहीं विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लिए परिणाम दोहरी कहानी लेकर आए हैं. सीटों के लिहाज़ से यह पार्टी का 2010 के बाद सबसे बड़ा झटका है, लेकिन वोट शेयर के मोर्चे पर तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली RJD ने भाजपा और जदयू - दोनों को पीछे छोड़ते हुए सबसे ऊपर जगह बनाई है.

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, RJD को इस बार 23% वोट मिले, जो भाजपा से 2.92% और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू से 3.75% ज्यादा है. हालांकि यह पिछली बार के 23.11% की तुलना में मामूली कमी है, लेकिन फिर भी यह किसी भी पार्टी द्वारा हासिल किया गया सबसे बड़ा वोट शेयर है.

पिछले चुनाव में RJD ने 144 उम्मीदवार उतारे थे और 75 सीटें जीती थीं. इस बार उसने 141 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन केवल 25 सीटों पर जीत हासिल कर पाई - जो 2010 के बाद उसका दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन है, जब वह सिर्फ 22 सीटों पर सिमट गई थी.

तेजस्वी यादव ने राघोपुर में करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की

महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के चेहरे रहे तेजस्वी यादव ने अपने पारंपरिक गढ़ राघोपुर में जीत दर्ज की. यह जीत आसान नहीं थी - एनडीए के सतीश कुमार के साथ पूरा दिन कांटे की टक्कर चली और अंत में तेजस्वी ने बढ़त बना ली.

महागठबंधन की निराशाजनक तस्वीर

RJD के साथ-साथ उसके साथी दल भी करारी हार से नहीं बच पाए. कांग्रेस ने सिर्फ 6 सीटें जीतीं जो कि साल 2010 के बाद उसका दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन है. वहीं CPI(ML)L को 2 सीटें मिलीं, CPI(M) ने 1 सीट जीती, CPI खाता भी नहीं खोल पाई. कुल मिलाकर, महागठबंधन की कुल सीटें सिर्फ 35 पर सिमट गईं.

NDA का जबरदस्त प्रदर्शन- 202 सीटों पर कब्जा

दूसरी ओर, एनडीए ने बिहार चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और कुल 202 सीटें हासिल कीं.

  • भाजपा: 89 सीटें
  • जदयू: 85 सीटें
  • LJP (रामविलास): 19 सीटें
  • हम (जीतनराम मांझी): 5 सीटें
  • राष्ट्रीय लोक मोर्चा (उपेन्द्र कुशवाहा): 4 सीटें

भाजपा का वोट शेयर बढ़कर 20.07% हो गया, जो 2020 के 19.46% से ज्यादा है, जबकि इस बार उसने कम सीटों पर चुनाव लड़ा. जदयू का वोट शेयर भी 15.39% से बढ़कर 19.26% हो गया - यानी नीतीश कुमार की पार्टी को वोट प्रतिशत में बड़ा फायदा हुआ.

नई पार्टियों का खाता तक नहीं खुला

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और मुकेश सहनी की वीआईपी - दोनों ही इस चुनाव में कोई प्रभाव नहीं डाल पाईं. दोनों पार्टियों का खाता तक नहीं खुल सका, जिससे स्पष्ट है कि चुनाव का मुकाबला पूरी तरह NDA बनाम RJD रहा.

रिकॉर्डतोड़ मतदान

बिहार में इस बार मतदान दो चरणों - 6 और 11 नवंबर - में हुआ और 66% से अधिक वोटिंग दर्ज हुई, जो 1951 के बाद से राज्य का सबसे ऊंचा मतदान है.

पुरुष मतदान: 62.8%

महिला मतदान: 71.6% (पुरुषों से काफी ज्यादा)

सीटों की भाषा में RJD ने भले ही बड़ी हार झेली हो, लेकिन वोट शेयर बताता है कि पार्टी का आधार अभी भी मजबूत है. यह संकेत भी था कि चुनाव का मुकाबला करीबी था, और तेजस्वी यादव का जनाधार अब भी बिहार की राजनीति में सबसे प्रभावशाली में से एक है. दूसरी तरफ, एनडीए ने सीटों के लिहाज़ से अपराजेय बढ़त लेकर 2025 की सत्ता को सुरक्षित कर लिया.

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