चार्टर्ड प्लेन से घूमने वाले IAS रामचंद्र देवरे कौन- बिहार में क्यों हाथ धोकर Congress और RJD पड़ गए पीछे?
बिहार कैडर के 2011 बैच के IAS डॉ नीलेश देवरे इन दिनों चार्टर प्लेन विवाद को लेकर चर्चा में हैं. जानिए उनका करियर, पारिवारिक पृष्ठभूमि और मौजूदा जिम्मेदारियां.
बिहार की ब्यूरोक्रेसी इन दिनों एक नाम को लेकर खासा चर्चा में है. वो नाम है डॉक्टर से IAS बने नीलेश देवरे का. साल 2011 बैच के इस अधिकारी ने मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना और बिहार के कई अहम जिलों में जिलाधिकारी के रूप में अपनी छाप छोड़ी. फिलहाल, वे राज्य के पर्यटन विभाग के सचिव सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं.
अब उनका नाम एक नए कारण से सुर्खियों में है. दिल्ली से पटना की कथित चार्टर प्लेन यात्रा को लेकर उठा विवाद. विधानसभा में इस मुद्दे को विपक्ष ने जोरदार तरीके से उठाया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम इस विवाद से कैसे जुड़ा और इसके पीछे पूरा मामला क्या है?
कौन हैं IAS डॉ. नीलेश रामचंद्र देवरे, क्यों हैं चर्चा में?
बिहार कैडर के 2011 बैच के IAS अधिकारी डॉ. नीलेश रामचंद्र देवरे इन दिनों प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. वह बिहार सरकार के पर्यटन विभाग में सचिव के पद पर तैनात हैं. उनके पास नागरिक विमानन विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी भी है. हाल के दिनों में चार्टर प्लेन से जुड़ा विवाद और विधानसभा में उठे सवालों के कारण उनका नाम सुर्खियों में आया है.
फैमिली और एजुकेशनल बैकग्राउंड क्या है?
डॉ. नीलेश रामचंद्र देवरे मूल रूप से महाराष्ट्र के नासिक जिले के रहने वाले हैं. वे एक साधारण, शिक्षित मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं. उनके पिता कृषि विभाग में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त कर्मचारी रहे हैं. जबकि उनकी माता गृहिणी हैं. प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई की. उन्होंने नवी मुंबई के एक निजी मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री हासिल की. इसी कारण उनके नाम के आगे डॉ. लगाया जाता है. मेडिकल पृष्ठभूमि के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर 2011 बैच में बिहार कैडर के IAS अधिकारी बने.
किन-किन जिलों में जिलाधिकारी (DM) के रूप में दी सेवाएं?
प्रशासनिक सेवा में आने के बाद डॉ. देवरे ने बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों की कमान संभाली. वे मधुबनी, सारण (छपरा), बांका और पश्चिम चंपारण (बेतिया) जैसे जिलों में जिलाधिकारी (DM) रहे हैं. इन जिलों में उन्होंने प्रशासनिक सुधार, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून-व्यवस्था को लेकर काम किया. पश्चिम चंपारण में DM रहते हुए ही उन्हें केंद्र में प्रतिनियुक्ति का अवसर मिला.
केंद्र सरकार में क्या रही भूमिका?
सितंबर 2022 में डॉ. देवरे की नियुक्ति केंद्रीय नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निजी सचिव के रूप में हुई थी. उस समय वे पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी थे. केंद्र में यह जिम्मेदारी उनके करियर का अहम पड़ाव मानी गई, क्योंकि इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत कामकाज का अनुभव मिला.
किन-किन पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं?
जनवरी 2026 में उन्होंने बिहार के पर्यटन विभाग के सचिव के रूप में कार्यभार संभाला. साथ ही वे नागरिक विमानन विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. यह विभाग राज्य में अपेक्षाकृत नया है, जहां वे प्रभारी सचिव की भूमिका भी देख रहे हैं. इसके अलावा, उनके पास बिहार चिकित्सा सेवा एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) के प्रबंध निदेशक (MD) का अतिरिक्त प्रभार भी है. इससे पहले वे मंत्रिमंडल सचिवालय में विशेष सचिव के पद पर भी रह चुके हैं.
चार्टर प्लेन विवाद क्या है और कैसे शुरू हुआ?
हाल ही में डॉ. देवरे का नाम एक कथित चार्टर प्लेन यात्रा को लेकर विवादों में आया. मामला तब चर्चा में आया जब RJD विधायक राहुल कुमार ने इसे बिहार विधानसभा में उठाया. विधायक ने आरोप लगाया कि दिल्ली से पटना आने के लिए एक निजी चार्टर विमान का उपयोग किया गया. उन्होंने सवाल किया कि एक सरकारी अधिकारी ने चार्टर विमान से यात्रा के लिए कथित रूप से लाखों रुपये कहां से खर्च किए?
विपक्ष ने क्या आरोप लगाए और क्या मांग की?
विधानसभा में विपक्ष ने इसे पद के दुरुपयोग और संभावित भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की. आरोपों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से तूल पकड़ने लगा. हालांकि, इस मामले में आधिकारिक स्तर पर जांच या निष्कर्ष को लेकर जो भी स्थिति होगी, वह जांच प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी.
क्या यह विवाद उनके प्रशासनिक करियर पर असर डालेगा?
डॉ. नीलेश देवरे का अब तक का प्रशासनिक करियर विभिन्न महत्वपूर्ण पदों और जिम्मेदारियों से भरा रहा है. चार्टर प्लेन विवाद ने निश्चित रूप से उन्हें राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है. आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है.
अशोक चौधरी ने क्यों खेला दलित कार्ड?
बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने इस मामले को जातिगत सरोकार से जोड़ दिया है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को हवाई जहाज में यात्रा करने का अधिकार नहीं है? जो लोग इस मामले को मुद्दा बना रहे हैं, उनके राजनीतिक और सामाजिक बैकग्राउंड की भी जांच होनी चाहिए. जब देवरे स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ थे, तब उन्होंने सप्लाई से जुड़े 15 लोगों पर कार्रवाई की थी. ये लोग आरजेडी से जुड़े थे. उसी कार्रवाई की वजह से अब विवाद खड़ा किया जा रहा है.
विपक्ष ने क्या आरोप लगाए?
विधानसभा में विपक्ष ने सवाल उठाया कि एक सरकारी अधिकारी के पास चार्टर प्लेन से यात्रा करने के लिए कथित रूप से लाखों रुपये कहां से आए. इसे पद के दुरुपयोग और संभावित भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई. इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप ले लिया और राज्य की राजनीति में बहस छिड़ गई.
क्या इस विवाद का उनके करियर पर असर पड़ेगा?
डॉ. नीलेश देवरे का अब तक का प्रशासनिक करियर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से भरा रहा है. हालांकि, चार्टर प्लेन विवाद ने उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है. आगे की स्थिति जांच और सरकारी रुख पर निर्भर करेगी.





