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उद्योगों को जीवनदान! 800 करोड़ का इंडस्ट्रियल बूस्ट! एमनेस्टी एग्जिट पॉलिसी से बंद फैक्ट्रियों में फिर जलेगी भट्ठी

बिहार सरकार की एमनेस्टी और एग्जिट पॉलिसी-2025 से 100 बंद औद्योगिक इकाईयों से जुड़े विवाद खत्म होने का रास्ता साफ हो गया है. इससे 800 करोड़ रुपये के नए निवेश और हजारों नौकरियों का रास्ता खुला है.

Bihar Industrial Investment Amnesty Exit Policy 2025
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( Image Source:  Sora AI )

बिहार अब सिर्फ मजदूरों का राज्य नहीं, बल्कि निवेश और उद्योग का नया ठिकाना बनने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री Nitish Kumar के नेतृत्व में उद्योग विभाग ने ‘एमनेस्टी पॉलिसी’ और ‘एग्जिट पॉलिसी-2025’ लागू कर एक साथ दो समस्याओं का हल निकाला है. अब नीतीश कुमार की सरकार बंद पड़ी फैक्ट्रियों को राहत देगी और नई इंडस्ट्री के लिए जमीन खाली मुहैया कराएगी.

नीतीश सरकार की समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक करीब 100 औद्योगिक मामलों के समाधान से 600 से 800 करोड़ रुपये तक के नए निवेश का रास्ता खुल गया है. इससे न केवल औद्योगिक माहौल सुधरेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार मिलने की उम्मीद भी मजबूत हुई है.

क्या है एमनेस्टी पॉलिसी?

एमनेस्टी पॉलिसी उन उद्यमियों के लिए है जिनकी इकाइयां बकाया राशि, अनुपालन की कमी या प्रशासनिक कारणों से बंद पड़ी थीं. सरकार उन्हें समयबद्ध राहत देने के लिए तैयार हो गई है. एकमुश्त समाधान (One Time Settlement) के तहत पुराने बकायों का निपटारा संभव है. योग्य इकाइयों का दोबारा संचालन शुरू होने की संभावना है. इससे उद्योगों को पुनर्जीवित करने का रास्ता आसान हुआ है.

एग्जिट पॉलिसी-2025 क्या है?

हर उद्योग दोबारा खड़ा नहीं हो सकता. ऐसे में सरकार ने एग्जिट पॉलिसी लागू की है, जो उद्यमी उद्योग से बाहर निकलना चाहते हैं, उन्हें सम्मानजनक निकासी का विकल्प देने का फैसला लिया गया है. कानूनी विवादों में फंसी जमीन को साफ कर पुनः आवंटन योग्य बनाने की स्कीम है. निवेशकों के लिए पारदर्शी और बिजनेस-फ्रेंडली माहौल तैयार करने की दिशा में सरकार कदम उठाएगी. यह नीति औद्योगिक परिसंपत्तियों को निष्क्रिय से सक्रिय श्रेणी में लाने का काम कर रही है.

100 बंद फैक्ट्रियों का समाधान कैसे हुआ?

बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार यानी (BIADA) की समीक्षा रिपोर्ट में सामने आया कि लगभग 100 औद्योगिक मामलों का सफल निष्पादन किया जा चुका है. करीब 100 एकड़ औद्योगिक भूमि मुक्त हुई. वर्षों से लंबित विवाद सुलझे. नए निवेशकों के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी. उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसे बड़ी उपलब्धि माना गया.

कब तक मिलेगा योजना का लाभ?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि थर्ड पार्टी को आवंटित मामलों को छोड़कर सभी पात्र इकाइयां 31 मार्च 2026 तक एकमुश्त समाधान योजना का लाभ ले सकती हैं. यह समयसीमा उद्यमियों के लिए सुनहरा मौका मानी जा रही है.

बिहार की अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा बूस्ट?

इस योजना से 600 से 800 करोड़ रुपये तक नए निवेश की संभावना है. हजारों युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा. औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी. राज्य की छवि ‘बिजनेस फ्रेंडली’ के रूप में मजबूत होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा, तो बिहार में औद्योगिक विकास का नया दौर शुरू हो सकता है.

बिहारनीतीश कुमार
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