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Bihar के इस गांव तक नहीं पहुंच पा रहा नीतीश का "विकास", 18 सालों से ग्रामीण पक्की सड़क की ताक रहे राह

बिहार के गोपालपुर के डिमहा गांव में लोग कच्ची सड़क से काफी परेशान हैं. बीमार पड़ने पर मरीज़ को पैदल ही कई किलोमीटर पैदल अस्पताल ले जाना पड़ता है.

Bihar के इस गांव तक नहीं पहुंच पा रहा नीतीश का विकास, 18 सालों से ग्रामीण पक्की सड़क की ताक रहे राह
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( Image Source:  X-@bihar_son )
समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी

Published on: 9 Feb 2026 9:51 AM

Bihar: बिहार में नीतीश सरकार का "विकास" इस गांव तक पहुंचता नहीं दिख रहा है. नवगछिया के गोपालपुर प्रखंड में स्थित डीमहा पंचायत में सड़क और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हालात इतने खराब हैं कि अगर कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे पैदल या फिर खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है.

गांव वालों का कहना है कि गांव में 2008 से रोड नहीं बनी है और अगर कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे पैदल ही ले जाना पड़ता है, क्योंकि कोई भी गाड़ी वाला गांव के अंदर आने से मना करता है. हालात रात में और भी गंभीर हो जाते हैं.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, डीमहा पंचायत में एक महिला पर पर चढ़ने के दौरान गिरने से घायल हो गई. मीण चिकित्सक के के जरिए शुरुआती इलाज के बाद उसे सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई, लेकिन गांव तक पक्की सड़क और एंबुलेंस की सुविधा न होने की वजह से ग्रामीणों को मजबूरन मरीज को खाट पर लादकर लगभग 20 किलोमीटर दूर गोपालपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पैदल ले जाना पड़ा.

क्या है गांव वालों का आरोप?

घायल महिला की पहचान दर्शन पंडित की पत्नी अनीता देवी के तौर पर हुई है. उनके भतीजे ने बताया कि पंचायत में पिछले 17 सालों से सड़क नहीं बनी है. इस वजह से बीमार लोगों को खाट पर ले जाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि गांव में न तो अस्पताल की सुविधा है, न स्कूल, और न ही आने-जाने के लिए पक्की सड़क. कई बार जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन गांव की स्थिति जस की तस बनी हुई है.

कब से नहीं बनी है सड़क?

ग्रामीण मुकेश ने बताया कि साल 2008 के बाद से यहां कोई सड़क नहीं बनी है, जिसके कारण कोई भी वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता है. खासकर रात के समय यदि कोई बीमार पड़ जाए और समय पर इलाज न मिले, तो जान जाने तक की नौबत आ सकती है. एंबुलेंस चालक भी सड़क न होने का हवाला देकर गांव आने से मना कर देते हैं.

गांव में लगभग 900 की आबादी है. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने उन्हें मुख्यधारा से बिल्कुल अलग-थलग छोड़ दिया है. लोगों का कहना है कि उन्होंने सुशासन के नाम पर वोट दिया, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके गांव की समस्याओं की तरफ ध्यान नहीं दिया.

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