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बिहार में अनिरुद्धाचार्य महाराज की कथा में बेकाबू भीड़, लाठीचार्ज से मचा हड़कंप; दो महिलाएं बेहोश-परिवार से बिछड़े बच्चे

बिहार के रक्सौल में अनिरुद्धाचार्य महाराज की भागवत कथा के दौरान अत्यधिक भीड़ के कारण हालात बेकाबू हो गए। गेट टूटने, लाठीचार्ज और घायल श्रद्धालुओं ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए.

बिहार में अनिरुद्धाचार्य महाराज की कथा में बेकाबू भीड़, लाठीचार्ज से मचा हड़कंप; दो महिलाएं बेहोश-परिवार से बिछड़े बच्चे
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( Image Source:  ANI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Updated on: 8 Feb 2026 9:09 PM IST

बिहार के रक्सौल में एक बहुत बड़ी घटना हुई, जो काफी चर्चा में रही. यहां रक्सौल एयरपोर्ट के मैदान में प्रसिद्ध कथावाचक श्री अनिरुद्धाचार्य महाराज की श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन चल रहा था. यह कथा ज्ञान महायज्ञ के नाम से जानी गई और इसमें लाखों की संख्या में भक्त और श्रद्धालु पहुंचे थे.

जब महाराज जी कथा सुनाने के लिए पंडाल में प्रवेश कर रहे थे, तभी मुख्य गेट पर भक्तों की भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई. बहुत सारे लोग महाराज के साथ-साथ उसी गेट से अंदर जाने की कोशिश करने लगे. इतनी ज्यादा भीड़ हो गई कि उसे संभालना मुश्किल हो गया. भक्तों के दबाव से पंडाल के लोहे के गेट को भी उखाड़ दिया गया. स्थिति बेकाबू हो गई और चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई.

लाठीचार्ज के बाद भगदड़

भीड़ को काबू में करने के लिए वहां तैनात पुलिसकर्मियों को लाठी का सहारा लेना पड़ा. लाठीचार्ज होने से भगदड़ जैसा माहौल बन गया. इस दौरान दो-तीन महिलाएं जमीन पर गिर गईं और उन्हें चोटें आईं. कुछ लोग बेहोश भी हो गए. भगदड़ में दो छोटे बच्चे अपनी मां से बिछड़ गए. मां बच्चे को ढूंढते हुए जोर-जोर से चिल्लाती रही, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि सब कुछ देखना मुश्किल हो रहा था.यह देखकर दिल दहल जाता है कि आस्था के नाम पर ऐसी स्थिति बन गई. पंडाल के अंदर भीड़ इतनी बढ़ गई कि कई लोग पास में खड़े ट्रकों पर चढ़कर कथा सुनने लगे. साफ दिख रहा था कि इतनी बड़ी भीड़ के हिसाब से आयोजकों और प्रशासन की तैयारी काफी कमजोर साबित हुई.

क्या दिया संदेश?

भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश-निकास की व्यवस्था को और बेहतर करना चाहिए था. इस सबके बीच अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कथा के दौरान बहुत ही सुंदर और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश दिए. उन्होंने कहा कि हमें गलत बातों और गलत कामों से हमेशा दूर रहना चाहिए. गलत रास्ते पर चलने से इंसान का पतन तय होता है. सही रास्ता चुनना ही जीवन के कल्याण का सबसे बड़ा मार्ग है. महाराज जी ने बताया कि भगवान को पाना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है. असली मुश्किल तो खुद को सरल, सहज और सच्चा बनाना है. उन्होंने माता शबरी का बहुत सुंदर उदाहरण दिया. शबरी का दिल बहुत साफ और भाव बहुत सरल था, इसलिए भगवान राम खुद उनके पास पहुंचे और उन्हें आशीर्वाद दिया.

दूसरों की मदद करो

महाराज ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सचमुच भगवान में आस्था रखता है और ईश्वर को दिल से मानता है, तो बस अपना जीवन सरल बना ले. ऐसे में भगवान खुद मिल जाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि जब इंसान सरल और सहज बन जाता है, दूसरों की मदद करता है, तो भगवान भी उसका सहारा बन जाते हैं. जीवन में सादगी, सच्चाई और दूसरों के प्रति प्रेम रखना ही सबसे बड़ा भक्ति का मार्ग है. कुल मिलाकर यह आयोजन भक्ति से भरा था, लेकिन भीड़ प्रबंधन की कमी से कुछ दुखद घटनाएं हुईं. उम्मीद है कि आगे ऐसे कार्यक्रमों में और बेहतर इंतजाम किए जाएंगे ताकि भक्तों को सिर्फ आनंद और ज्ञान मिले, कोई परेशानी न हो.

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