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Assam: शंकरदेव की जन्मस्थली में सख्ती! क्या है अविर्भाव क्षेत्र जहां जाने के लिए श्रद्धालुओं को फॉलो करना होगा खास ड्रेस कोड?

असम सरकार महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव अविर्भाव क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है. इसके तहत 12 साल से ऊपर के श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक वेशभूषा पहनना अनिवार्य किया जा सकता है. डौल महोत्सव के बीच यह फैसला धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण चर्चा में है.

Assam: शंकरदेव की जन्मस्थली में सख्ती! क्या है अविर्भाव क्षेत्र जहां जाने के लिए श्रद्धालुओं को फॉलो करना होगा खास ड्रेस कोड?
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( Image Source:  X- @himantabiswa and Instragram- @the_vyangaatmak_lora )

Assam News: असम सरकार पवित्र महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव अविर्भाव क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए एक बड़ा फैसला लेने जा रही है. सरकार यहां आने वाले श्रद्धालुओं के अलग-अलग तरह के पहनावे पर पाबंदी लगाने पर विचार कर रही है और एक ड्रेस कोड करने नका प्लान कर रही है.

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने डौल महोत्सव के पांच दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन पूजा- अर्चना करने के बाद कहा,"हमने देखा है कि अविर्भाव क्षेत्र में आने वाले लोग अलग-अलग तरह के कपड़े पहनकर आ रहे हैं. लोग इसकी पवित्रता बनाए रखना चाहते हैं. इसलिए हमने तय किया है कि 12 साल से अधिक उम्र के श्रद्धालुओं को बटद्रवा आने के लिए पारंपरिक वेशभूषा पहननी होगी."

क्या बोले हिमंता बिस्वा सरमा?

उन्होंने प्रेस से बातचीत में बताया कि इस प्रस्ताव पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है और इसे जल्द लागू किया जाएगा.मुख्यमंत्री ने कहा,"सरकारी प्रक्रिया में आमतौर पर दो से तीन दिन लगते हैं. प्रक्रिया पूरी होते ही इसे अनिवार्य कर दिया जाएगा.

मंगलवार को थान में “फाकू दिया” की पारंपरिक रस्म भी अदा की गई. इस रस्म के दौरान गोसाईं (भगवान कृष्ण) के सिर पर फाकू लगाया जाता है, जो इस महोत्सव का एक प्रमुख अनुष्ठान है. बटद्रवा थान, जो वैष्णव संत महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की जन्मस्थली है, का पुनर्विकास कार्य पूरा होने के बाद 29 दिसंबर 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसका आधिकारिक उद्घाटन किया था.

क्या है श्रीमंत शंकरदेव अविर्भाव क्षेत्र?

  • महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव का अविर्भाव क्षेत्र यानी जन्मस्थान असम के नगांव जिले के बटद्रवा थान में स्थित है. अब इस पवित्र स्थल को पुनर्विकसित कर 'महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव अविर्भाव क्षेत्र' के नाम से जाना जाता है.
  • यह स्थान 15वीं-16वीं सदी के महान वैष्णव संत, कवि और समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव की जन्मस्थली है.
  • असमिया वैष्णव परंपरा, संस्कृति और नव-वैष्णववाद का यह प्रमुख केंद्र माना जाता है, यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं.
  • हाल ही में दिसंबर 2025 में इस क्षेत्र का 227 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया गया है.
  • इस प्रोजेक्ट के तहत पूरे परिसर को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जबकि इसकी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखा गया है.
  • अविर्भाव क्षेत्र में एक विशाल नामघर (प्रार्थना स्थल) बनाया गया है, जहां श्रद्धालु सामूहिक प्रार्थना करते हैं.
  • इसके साथ ही एक शोध केंद्र भी स्थापित किया गया है, जहां श्रीमंत शंकरदेव के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर अध्ययन किया जाता है. परिसर में एक आकर्षक म्यूजिकल फाउंटेन भी बनाया गया है, जो उनकी विरासत को दर्शाता है.
  • इस पवित्र स्थल का मुख्य आकर्षण ‘गुरु आसन’ है. यह वैष्णव अनुयायियों के लिए सबसे पवित्र स्थान माना जाता है और यहां श्रद्धालु विशेष श्रद्धा के साथ दर्शन करने आते हैं.
असम न्‍यूज
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