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असम चुनाव के लिए BJP का ‘80 सीटों का मास्टरप्लान’, भूपेन बोरा की एंट्री से बदलेगा राजनीतिक खेल!

असम चुनाव 2026 में BJP ने 80 सीटों का लक्ष्य रखा है. भूपेन बोरा की सक्रियता से सियासी समीकरण बदलने के संकेत, जानें पूरा प्लान.

असम चुनाव के लिए BJP का ‘80 सीटों का मास्टरप्लान’, भूपेन बोरा की एंट्री से बदलेगा राजनीतिक खेल!
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( Image Source:  ANI?Facebook )

असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संकेत दिए हैं कि पार्टी करीब 80 सीटों पर उम्मीदवारों का चयन लगभग पूरा कर चुकी है और अब सिर्फ केंद्रीय नेतृत्व की औपचारिक मंजूरी का इंतजार है. यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति में दल-बदल और गठजोड़ की चर्चाएं तेज हो गई हैं.

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम नाम है भूपेन बोरा का. मुख्यमंत्री सरमा ने साफ किया कि भूपेन बोरा को बीजेपी का टिकट दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि बोरा बिहपुरिया से पूर्व विधायक रह चुके हैं और उनका नाम बिहपुरिया तथा रंगानदी - दोनों सीटों के लिए विचाराधीन है. इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी बोरा को सिर्फ एक चेहरा नहीं, बल्कि रणनीतिक मोहरे के रूप में देख रही है.

क्‍या भूपेन बोरा की एंट्री से नाराज हैं बीजेपी कार्यकर्ता?

बीजेपी में बोरा की एंट्री को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी की खबरों को भी मुख्यमंत्री ने खारिज कर दिया. उनका कहना है कि पार्टी उन्हें पूरा सम्मान और पहचान देगी. इससे पता चलता है कि बीजेपी नेतृत्व राज्य स्तर पर संभावित असंतोष को पहले ही संभालने की कोशिश कर रहा है, ताकि चुनावी तैयारी पर असर न पड़े.

और विधायक आ गए तो हम उन्हें टिकट कैसे देंगे?

राजनीतिक दृष्टि से यह कदम सिर्फ टिकट वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी खेमे को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है. सरमा ने दावा किया कि कांग्रेस और असम जातीय परिषद (AJP) के बीच प्रस्तावित गठबंधन लगभग तय हो चुका है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के ‘बागी’ विधायक - कमलाख्या डे पुरकायस्थ, बसंत दास और शशि कांता दास - जल्द ही बीजेपी में शामिल होंगे. हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि बीजेपी में अब टिकट देने की ज्यादा गुंजाइश नहीं है. उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “अगर और विधायक आ गए तो हम उन्हें टिकट कैसे देंगे?” इसके बावजूद उन्होंने यह संकेत दिया कि आने वाले समय में कांग्रेस के कई हिंदू नेता बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.

विपक्ष को कमजोर करने में मिलेगी कामयाबी?

इस बीच असम गण परिषद (AGP) और AIUDF से जुड़ी सियासी हलचल भी चर्चा में है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सोनाई से विधायक, जो अभी AIUDF में हैं, जल्द ही AGP में शामिल होंगे और इस पर आपसी सहमति बन चुकी है. वहीं कांग्रेस विधायक रेकिबुद्दीन अहमद के बीजेपी में जाने की अटकलों को उन्होंने सिरे से नकार दिया. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बीजेपी की यह रणनीति दोहरे उद्देश्य को साधने की कोशिश है - पहला, अपने उम्मीदवार पहले तय करके संगठन को चुनावी मोड में लाना; और दूसरा, विपक्षी दलों में भ्रम और टूट को बढ़ावा देना. भूपेन बोरा जैसे नेताओं को शामिल कर बीजेपी न सिर्फ सीट गणित मजबूत करना चाहती है, बल्कि यह संदेश भी देना चाहती है कि विपक्ष के अनुभवी चेहरे भी अब उसके साथ खड़े हो रहे हैं.

कुल मिलाकर, असम चुनाव 2026 से पहले बीजेपी का यह ‘80 सीटों का मास्टरप्लान’ सत्ता बनाए रखने की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. भूपेन बोरा की टिकट पक्की होने की घोषणा से यह साफ है कि पार्टी व्यक्तिगत नेताओं के साथ-साथ पूरे राजनीतिक समीकरण को नए सिरे से गढ़ने में जुट चुकी है.

असम न्‍यूज
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