महाशिवरात्रि की रात चारों प्रहर की जाती है शिव पूजा, जानिए पूजन और जलाभिषेक का समय
महाशिवरात्रि की पावन रात भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास मानी जाती है, जब भक्त चारों प्रहर में पूजा और जलाभिषेक कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
इस वर्ष, रविवार, 15 फरवरी को शिव आराधना और पूजा का महापर्व महाशिवरात्रि है.महाशिवरात्रि पर रात्रि के पहर में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्त होती है.भगवान शिव इस चराचर जगत में समाहित है.शिव आदि भी हैं अंत भी है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान भोलेनाथ सृष्टि का सृजन और प्रलय सांयकाल की प्रदोषकाल में ही करते हैं.
ऐसे में इनकी पूजा-आराधना प्रदोषकाल में श्रेष्ठ माना जाता है.धार्मिक मान्यतओं के अनुसार,फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात को ही भगवान शिव शिवलिंग के रूप प्रकट हुए था.
चार पहर की पूजा का महत्व
महाशिवरात्रि पर रात्रि की पूजा सबसे खास और महत्वपूर्ण होती है.जिसमें चार पहर की पूजा का खास महत्व होता है.चार प्रहर की यह पूजा का समय संध्या से शुरू करके ब्रह्ममुहूर्त तक की जाती है.खासतौर पर हर वर्ष महाशिवरात्रि पर चार पहर की पूजा करने का ही विधान है.ऐसी मान्यता है कि चार पहर की पूजा से व्यक्ति को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है.इसलिए महाशिवरात्रि महापर्व पर रात्रि के चारों पहर में शिवजी के पूजन से विशेष फल प्राप्त होता है.इस तरह से महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा में भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और मंत्रोचार करने की परंपरा होती है.महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर दूध, दही, घी, गंगाजल,शहद और बेलपत्र आदि अर्पित किए जाते हैं.रात्रि को शिवमंत्रों का जाप और भगवान शिव की कथाएं सुनी और पढ़ी जाती है.
महाशिवरात्रि 2026 पर पूजन का मुहूर्त
- प्रथम प्रहर- 15 फरवरी, शाम 06 बजकर 11 मिनट से रात 09 बजकर 23 मिनट तक
- द्वितीय प्रहर- 15 फरवरी रात 09 बजकर 23 मिनट से लेकर अर्धरात्रि 12 बजकर 36 मिनट तक
- तृतीय प्रहर- 15 फरवरी देर रात 12 बजकर 36 मिनट से शुभ 03 बजकर 47 मिनट तक
- चतुर्थ प्रहर- 16 फरवरी को सुबह 03 बजकर 47 मिनट से लेकर 06 बजकर 59 मिनट तक
महाशिवरात्रि 2026 दुर्लभ योग
महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा-आराधना करना काफी शुभ और लाभकारी साबित होता है.इस वर्ष महाशिवरात्रि पर कई शुभ योगों का निर्णाम होगा.पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि पर ग्रहों की स्थिति के अनुसार इस दिन दिन बुधादित्य, शुक्रादित्य, नवपंचम और लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होगा.इसके अलावा इस दिन शिव, सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, साध्या, शुक्ल और वरियान योग भी बन रहा है.
जलाभिषेक मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर शिवपूजन और जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है.ऐसे में इस दिन शुभ मुहूर्त में जलाभिषेक करने से हर तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है.
- जलाभिषेक का पहला मुहूर्त- सुबह 8.24 से 09. 48 तक
- जलाभिषेक का दूसरा मुहूर्त- सुबह 09.48 से 11.11 तक
- जलाभिषेक का तीसरा मुहूर्त- सुबह 11.11 से 12.35 तक
- जलाभिषेक का चौथा मुहूर्त- शाम 6,11 से 07. 47 तक





