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कड़वा बुनाई और मुग़ल गाडर्न से इंस्पायर्ड Nita Ambani की हैंडलूम साड़ी, जानें 3 महीने में बनकर तैयार होने वाली कतान सिल्क की खासियत

इंटरनेशनल डॉक्टर्स कॉन्फ्रेंस में नीता अंबानी ने पहनी 90 दिन में तैयार हुई खास बनारसी साड़ी, जिसके हर धागे में छिपी है भारतीय हथकरघा विरासत की कहानी.

Nita Ambani Saree Look
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Nita Ambani Saree Look
( Image Source:  X: @ril_foundation )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Updated on: 14 Jun 2026 11:51 AM IST

रिलायंस फाउंडेशन की फाउंडर और चीफ नीता अंबानी (Nita Ambani) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब वे मंच पर आती हैं, तो सिर्फ उनकी बातें ही नहीं, बल्कि उनका अंदाज़ भी पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन जाता है. हाल ही में आयोजित एक इंटरनेशनल डॉक्टर्स कॉन्फ्रेंस में नीता अंबानी ने जब कदम रखा, तो हर किसी की निगाहें उन पर टिक गईं. वजह सिर्फ उनका प्रभावशाली व्यक्तित्व नहीं था, बल्कि उनकी वो जादुई बनारसी साड़ी थी, जो भारत की सदियों पुरानी हथकरघा (Handloom) विरासत की कहानी बयां कर रही थी. इस ग्लोबल मंच से उन्होंने दुनिया भर में बसे भारतीय डॉक्टरों से वतन लौटने और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को सच करने का एक इमोशनल और मजबूत आह्वान किया.

अक्सर देखा जाता है कि हाई-प्रोफाइल इंटरनेशनल इवेंट्स में लोग वेस्टर्न आउटफिट्स को तवज्जो देते हैं, लेकिन नीता अंबानी हमेशा भारतीय जड़ों से जुड़े रहने के लिए जानी जाती हैं. इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने रिलायंस के 'स्वदेश' ब्रांड की एक शानदार बनारसी साड़ी को चुना. नीता अंबानी ने इस मंच का उपयोग न केवल फैशन स्टेटमेंट के लिए किया, बल्कि भारतीय मेडिकल प्रोफेशनल्स को देश की हैल्थकेयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए इंस्पायर्ड भी किया. उनकी इस अपील को उनकी साड़ी की खूबसूरती ने एक नया और गहरा अर्थ दे दिया.

कैसे बनी यह मास्टरपीस साड़ी?

यह कोई आम साड़ी नहीं थी, बल्कि इसे भारतीय कारीगरी का 'नायाब तोहफा' कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इस साड़ी के निर्माण और इसकी खासियत के पीछे एक बेहद दिलचस्प बैकग्राउंड है. इस शानदार साड़ी को बनाने के लिए बेहतरीन क्वॉलिटी के कतान सिल्क (Katan Silk) का इस्तेमाल किया गया था. साड़ी में टील (Teal) और एक्वा (Aqua) यानी हल्के नीले और हरे रंग के शेड्स का ऐसा रेयर और सॉफ्ट कॉम्बिनेशन था, जो आंखों को सुकून देने के साथ-साथ एक बेहद रॉयल और एलिगेंट लुक दे रहा था. साड़ी का असली आकर्षण इस पर उकेरे गए सुनहरे ज़री के खूबसूरत फूल थे. इन्हें बनारस की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन 'कड़वा' (Kadwa) तकनीक से बुना गया था. इस तकनीक की खासियत यह होती है कि इसमें करघे (Loom) पर हर डिज़ाइन और मोटिफ को अलग से, बेहद बारीकी के साथ हाथ से बुना जाता है. इसमें धागों को पीछे से काटा नहीं जाता, जिससे कपड़ा बेहद मजबूत और फिनिशिंग में लाजवाब बनता है. इस एक अकेली साड़ी को तैयार करने में तीन महीने (90 दिन) से भी अधिक का समय लगा. इसे बनारस के दो सबसे अनुभवी और कुशल मास्टर कारीगरों मोहम्मद यासीन और इकबाल अहमद ने अपने हाथों से साकार किया है. इन कारीगरों की दशकों की विशेषज्ञता और साधना इस साड़ी के हर एक धागे और ज़री की चमक में साफ देखी जा सकती थी.

मुगल गार्डन से प्रेरित डिज़ाइन

अगर आप इस साड़ी के पैटर्न को ध्यान से देखें, तो इसमें आपको भारत का समृद्ध इतिहास और वास्तुकला की झलक मिलेगी. साड़ी पर सुनहरे धागों से बनी जो जालीदार फूलों की आकृति थी, वह ऐतिहासिक मुगल गार्डन्स की ज्यामितीय समरूपता (Symmetry) से इंस्पायर्ड थी. इसके साथ ही, नीता अंबानी ने कंधे पर एक हल्के फिरोज़ी रंग का दुपट्टा भी कैरी किया था. साड़ी की हैवी और जटिल बुनाई के साथ इस हल्के दुपट्टे का तालमेल ऐसा था, जिसने पूरी साड़ी में 'शाही शान-ओ-शौकत' और 'सादगी' का एक परफेक्ट बैलेंस बना दिया.

परफेक्ट स्टाइलिंग

एक प्रोफेशनल फैशनिस्टा की तरह नीता अंबानी अच्छी तरह जानती हैं कि साड़ी या किस भी ऑउटफिट के साथ स्टाइलिंग को कितना बैलेंस्ड रखना चाहिए. उन्होंने अपने पूरे लुक को बेहद सलीके और सौम्यता से री-डिफाइन किया. साड़ी के साथ उन्होंने मैचिंग ब्लाउज पहना था, जिस पर बारीक मनकों (Beads) का काम और टेक्सचर्ड कढ़ाई की गई थी. यह ट्रेडिशनल लुक में एक मॉडर्न ट्विस्ट जोड़ रहा था. उन्होंने अपने बालों का एक नीट लो-बन बनाया था, जिसे ताजे सफेद मोगरे के गजरों से सजाया गया था. यह एवरग्रीन इंडियन स्टाइल साड़ी की खूबसूरती को दोगुना कर रहा था. कानों में स्टेटमेंट डायमंड इयररिंग्स, चेहरे पर सटल-हल्का मेकअप, हल्की सी डिफाइन की हुई आंखें और माथे पर सजी एक छोटी सी नीली बिंदी. नीता अंबानी का यह ओवरऑल लुक लाउड होने के बजाय बेहद क्लासी था.

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