Begin typing your search...

दुकान में अचानक गिरा शख्स, फिर CPR देकर लौटाई सांसें, जानें कब और कैसे दें CPR

दुकान में बातचीत के दौरान अचानक एक व्यक्ति बेहोश होकर गिर पड़ा, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई. तभी मौजूद एक शख्स ने तुरंत CPR शुरू किया और कुछ ही मिनटों में उसकी सांसें लौट आईं, लेकिन क्या आप जानते हैं सीपीआर क्या है.

दुकान में अचानक गिरा शख्स, फिर CPR देकर लौटाई सांसें, जानें कब और कैसे दें CPR
X
( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 11 Feb 2026 5:11 PM IST

राजस्थान में ज्वेलरी दुकान में रोजमर्रा की तरह कामकाज चल रहा था कि अचानक एक व्यक्ति जमीन पर गिर पड़ा. आसपास मौजूद लोग घबरा गए, लेकिन मौके पर मौजूद एक शख्स ने तुरंत हिम्मत दिखाते हुए सीपीआर देना शुरू किया. कुछ ही मिनटों की कोशिश के बाद शख्स ने फिर से सांस लेना शुरू कर दिया.

इस घटना ने साबित कर दिया कि सही समय पर उठाया गया एक कदम जिंदगी और मौत के बीच फर्क पैदा कर सकता है, लेकिन अक्सर लोग समझ नहीं पाते कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए. ऐसे में सीपीआर काम आता है. चलिए जानते हैं आखिर यह क्या है और कब सीपीआर देना चाहिए.

क्या होता है CPR?

सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एक इमरजेंसी प्रोसेस है. जब किसी की धड़कन या सांस रुक जाती है, तब सीने पर तेज और नियमित दबाव देकर खून और ऑक्सीजन का बहाव बनाए रखने की कोशिश की जाती है. दिमाग को बिना ऑक्सीजन ज्यादा देर नहीं मिलती, इसलिए शुरुआती मिनट बेहद अहम होते हैं.

कब देना चाहिए CPR?

अगर कोई व्यक्ति आवाज देने या हिलाने पर भी प्रतिक्रिया नहीं दे रहा और सामान्य तरीके से सांस नहीं ले रहा, सिर्फ हांफ रहा है या बिल्कुल सांस नहीं है, तो देरी नहीं करनी चाहिए. ऐसे में तुरंत छाती के बीच में हाथ रखकर दबाव देना शुरू कर दें. ट्रेन्ड न हों तो नब्ज टटोलने में समय बर्बाद न करें. “हैंड्स-ओनली” सीपीआर भी बहुत असरदार मानी जाती है.

कैसे दें?

  • सीपीआर देने के लिए सबसे पहले मरीज को पीठ के बल सख्त जमीन पर लिटाएं.
  • एक हाथ की एड़ी छाती के बीच रखें, दूसरा हाथ उसके ऊपर.
  • बाजू सीधे रखें और तेजी से, लगातार दबाएं. रफ्तार करीब 100 से 120 दबाव प्रति मिनट होनी चाहिए.
  • गहराई लगभग 5–6 सेंटीमीटर तक हो.
  • बीच में रुकना नहीं है. सिवाय इसके कि व्यक्ति हरकत करने लगे, सामान्य सांस लेने लगे या मेडिकल टीम पहुंच जाए.

कितनी देर तक जारी रखें?

सीपीआर तब तक देना चाहिए, जब तक की शख्स की सांस वापस न आ जाए. या फिर जब तक एंबुलेंस या डॉक्टर न आ जाएं. अगर थकान महसूस हो तो पास खड़े किसी और व्यक्ति से जिम्मेदारी बदल सकते हैं, लेकिन सीने पर दबाव रुकना नहीं चाहिए.

किन हालात में जरूरत पड़ सकती है?

अचानक कार्डियक अरेस्ट, पानी में डूबने के बाद सांस बंद होना, ड्रग ओवरडोज, करंट लगना, गंभीर दुर्घटना या दम घुटने के बाद बेहोशी, इन सभी स्थितियों में सीपीआर जान बचाने वाली साबित हो सकती है.

कब रोक देना चाहिए CPR?

अगर व्यक्ति खुद से सांस लेने लगे, हिलने-डुलने लगे या बात करे, तो सीपीआर रोक दें. साथ ही अगर जगह आपके लिए असुरक्षित है, जैसे आग, धुआं या बिजली का खतरा, तो पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें. एक बात साफ है कि सीपीआर कोई जादू नहीं, लेकिन सही समय पर शुरू हो जाए तो चमत्कार जैसा असर जरूर दिखा सकती है. कुछ मिनट की समझ और हिम्मत किसी की पूरी जिंदगी लौटा सकती है.

हेल्‍थ
अगला लेख