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Gen Z से लेकर Boomers तक, अलग-अलग पीढ़ियों को कैसे लीड करें? जानें वर्कप्लेस में बदलती सोच को समझना क्यों है जरूरी

ऑफिस में अलग-अलग उम्र के लोग साथ काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी सोच और काम करने का तरीका अलग है. Gen Z को लचीलापन चाहिए, Millennials को मकसद, Gen X को भरोसा और Boomers को सम्मान. सही लीडर वही है जो इन सबको समझकर काम करवाए.

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Gen Z से Boomers तक, हर पीढ़ी की सोच समझना ही सफल लीडरशिप की कुंजी

( Image Source:  Sora_ AI )

How to Lead Different Generations at Workplace: आज के वर्कप्लेस में एक साथ चार पीढ़ियां काम कर रही हैं- Gen Z, Millennials, Gen X और Boomers... हर पीढ़ी की सोच, काम करने का तरीका और उम्मीदें अलग हैं. ऐसे में लीडर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि वे सभी को साथ लेकर कैसे चलें. इन पीढ़ियों को अक्सर गलत समझा जाता है, जबकि हकीकत कुछ और होती है.

बता दें कि जिन लोगों का जन्म 1997 से लेकर 2012 के बीच हुआ है, उन्हें Gen Z कहा जाता है, जबकि 1981 से 1996 के बीच पैदा हुए लोगों को Millennials, 1965 से 1980 के बीच पैदा हुए लोगों को Gen X और 1946 से लेकर 1964 के बीच पैदा हुए लोगों को Boomers माना जाता है.

Gen Z क्या हमेशा फोन में डूबा रहता है?

Gen Z (1997–2012) को अक्सर फोन में डूबा या कमिटमेंट से बचने वाला माना जाता है, लेकिन असल में यह पीढ़ी तेज सीखने वाली, सीमाओं को समझने वाली और बदलाव के लिए तैयार होती है. इन्हें लीड करने के लिए 'क्यों' समझाना, जल्दी-जल्दी फीडबैक देना और काम करने में लचीलापन देना जरूरी है.

Millennials कैसे होते हैं?

Millennials (1981–1996) को जरूरत से ज्यादा तारीफ चाहने वाला या संवेदनशील समझा जाता है, जबकि वे असल में टीमवर्क में मजबूत, दबाव में टिके रहने वाले और उद्देश्य-केंद्रित होते हैं. इन्हें तब बेहतर प्रदर्शन मिलता है जब काम को किसी बड़े मकसद से जोड़ा जाए और करियर ग्रोथ की स्पष्ट राह दिखाई जाए.

Gen X के बारे में आम धारणा क्या है?

Gen X (1965–1980) को बदलाव से डरने वाला या अलग-थलग रहने वाला माना जाता है, लेकिन ये आत्मनिर्भर, रिजल्ट-ओरिएंटेड और भरोसा मिलने पर बेहद वफादार होते हैं. इन्हें माइक्रोमैनेजमेंट पसंद नहीं होता—स्पष्ट लक्ष्य और स्वतंत्रता देने से ये बेहतर काम करते हैं.

Boomers को क्या समझा जाता है?

Boomers (1946–1964) को टेक्नोलॉजी से दूर और पुराने विचारों वाला समझा जाता है, जबकि वे अनुभव से भरे, रिश्ते बनाने में माहिर और लंबे समय की सोच रखने वाले होते हैं. इन्हें सम्मान देना, अनुभव का इस्तेमाल करना और नई चीजों को उनके नजरिए से समझाना जरूरी होता है.

कुल मिलाकर, एक्सपर्ट्स का मानना है कि 'वन-साइज़-फिट्स-ऑल' लीडरशिप अब काम नहीं करती. हर पीढ़ी की ताकत पहचानकर लीड करने से ही टीम और संगठन दोनों सफल हो सकते हैं.

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