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Situationship और Lovebombing के बाद अब Gen Z का 6-7 डेटिंग फॉर्मूला हुआ वायरल, मतलब जान Millennials फिर हुए पागल

डेटिंग की दुनिया में जहां कभी “परफेक्ट पार्टनर” की तलाश चलती थी, वहीं Gen Z ने इस सोच को हल्का-सा मोड़ दिया है. अब 10/10 की तलाश में थकने के बजाय, 6 या 7/10 पर खुश रहने का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है.

Situationship और Lovebombing के बाद अब Gen Z का 6-7 डेटिंग फॉर्मूला हुआ वायरल, मतलब जान Millennials फिर हुए पागल
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( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 7 Feb 2026 12:43 PM IST

डेटिंग की डिक्शनरी में शब्द सचमुच कम पड़ गए हैं. सिचुएशनशिप, बेंचिंग, घोस्टिंग के बाद अब Gen Z एक नया टर्म लेकर आया है- 6-7 डेटिंग. सुनने में ऐसा लगता है जैसे कोई मैथ्स का सवाल हो, लेकिन असल में यह दिल के हिसाब-किताब से जुड़ा फॉर्मूला है. यहां पार्टनर को परफेक्ट 10/10 ढूंढने की दौड़ नहीं, बल्कि 6 या 7 पर सुकून ढूंढने की सोच वायरल हो रही है.

Gen Z के लिए अब प्यार में परफेक्शन नहीं, कम्फर्ट और स्टेबिलिटी ज्यादा मायने रखती है और यही 6-7 डेटिंग फॉर्मूला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

क्या है 6-7 डेटिंग ट्रेंड?

6-7 डेटिंग का मतलब किसी को नंबर देकर जज करना नहीं, बल्कि यह समझना है कि कोई इंसान “परफेक्ट” न होकर भी आपके लिए सही हो सकता है. यानी वह व्यक्ति जिसके साथ आपको सेफ्टी, शांति, भरोसा और स्थिरता महसूस हो. Gen Z मानता है कि 10/10 दिखने वाला, फिल्मी रोमांस जैसा पार्टनर अक्सर रियल लाइफ में थकाने वाला साबित हो सकता है. इसलिए वे ऐसे साथी को चुनना पसंद करते हैं जो “गुड इनफ” हो यानी 6 या 7.

परफेक्ट फैंटेसी से बाहर आने की सोच

बचपन में देखी गई डिज़्नी मूवीज़ और रोमांस नॉवेल्स ने दिमाग में एक आइडल इमेज बना दी-चार्मिंग प्रिंस या प्रिंसेस. लेकिन हकीकत में पार्टनर स्कूल, ऑफिस, दोस्तों के जरिए या कैफे में मिलता है, न कि जंगल में गाना गाते हुए. Gen Z इस फैंटेसी को तोड़ रहा है. वे समझ रहे हैं कि रिलेशनशिप दिखावे से नहीं, आराम और समझ से चलती है.

6-7 क्यों है “स्वीट स्पॉट”?

यह ट्रेंड कमिटमेंट और कैजुअल डेटिंग के बीच का रास्ता दिखाता है. थोड़ा-सा सिचुएशनशिप जैसा, लेकिन भरोसे वाला. ऐसा पार्टनर जो इमोशनली मैच्योर हो, काइंड हो, ड्रामा न करे, और जिसके साथ रहना आसान लगे. यानी ऐसा रिश्ता जो नींद उड़ाए नहीं, बल्कि सुकून दे.

क्या यह “सेटल” करना है?

कुछ लोगों को यह ट्रेंड रेड फ्लैग लगता है. उन्हें लगता है कि किसी को 6-7 कहना कंट्रोलिंग या समझौता करना है. लेकिन Gen Z इसे समझौता नहीं, बल्कि रियलिस्टिक चॉइस मानता है. उनका मानना है कि कोई भी इंसान 10/10 नहीं होता. जानने पर हर 10, 8 या 7 में बदल जाता है.

ग्रीन, बेज और येलो फ्लैग का कॉम्बिनेशन

6-7 डेटिंग का मतलब है रेड फ्लैग हटाकर देखना कि सामने वाले में ग्रीन, बेज और हल्के येलो फ्लैग कितने हैं. अगर वह इंसान भरोसेमंद है, इमोशनली उपलब्ध है और आपके साथ हँस सकता है, तो वह डेट करने लायक है.

6-7 डेटिंग ट्रेंड हमें सिखाता है कि प्यार कोई फिल्मी स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की समझ, भरोसा और सुकून है. शायद यही सोच आने वाले समय में डेटिंग की परिभाषा बदल दे.

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