पाक छोड़िए, इस मिसाइल की रेंज में होगा चीन का हर शहर; जानें Agni-3 की खूबियां
अग्नि-3 मिसाइल की सफल टेस्ट हो गया है. इसकी खूबियां ऐसी हैं कि पाक छोड़िए ये चीन के अंदर जाकर भी तबाही मचा सकेगी. इसके साथ ही ये न्यूक्लियर वेपन भी आसानी से ले जा सकती है.
Agni-3 Missile: भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन करते हुए अग्नि-3 बैलिस्टिक मिसाइल का कामयाब टेस्ट कर लिया है. जैसे ही मिसाइल ने आसमान की ओर उड़ान भरी, बंगाल की खाड़ी में उसकी गूंज सुनाई दी. यह परीक्षण भारत की सशक्त रक्षा क्षमताओं का स्पष्ट संदेश देता है. जानकारों का मानना है कि इसके मुकाबले का चीन और पाकिस्तान के पास कोई मैच नहीं है.
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा और मिसाइल ने अपने तय लक्ष्य को सटीकता के साथ भेदा. इस लॉन्च से यह साफ हो गया कि भारत की मिसाइल तकनीक न केवल भरोसेमंद है, बल्कि किसी भी चुनौती का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है.
क्या है अग्नि-3 मिसाइल?
अग्नि-3 एक मिडिल रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 3,000 से 3,500 किलोमीटर तक है. यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का एक अहम स्तंभ मानी जाती है. इस मिसाइल का सफल परीक्षण ऐसे समय में हुआ है, जब इलाकाई सिक्योरिटी हालात तेजी से बदल रहे हैं और भारत अपनी सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है.
क्या है अग्नि-3 मिसाइल की खासियत?
- मारक क्षमता: अग्नि-3 को दुश्मन के इलाके के अंदर गहराई तक टारगेट भेदने के लिए डिजाइन किया गया है इसकी रेंज 3,000 से 3,500 किलोमीटर है और यह करीब 1,500 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकती है.
- कितनी मचाएगा तबाही- यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. इसमें 200 से 300 किलोटन तक की क्षमता वाले परमाणु वारहेड लगाए जा सकते हैं, जो इसे एक शक्तिशाली रणनीतिक प्रतिरोधक बनाते हैं.
- सटीकता: अग्नि-3 को अपनी कैटेगरी की सबसे सटीक बैलिaस्टिक मिसाइलों में गिना जाता है. इसकी सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) लगभग 40 मीटर मानी जाती है.
- तकनीकी खूबियां: यह 17 मीटर लंबी, दो फेज वाली ठोस ईंधन से चलने वाली मिसाइल है, जिसका कुल वजन लगभग 50 टन है.
कितनी ताकतवर है अग्नी-3 मिसाइल?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अग्नि-3 की सबसे बड़ी खूबियां इसकी उच्च सटीकता और आधुनिक नेविगेशन सिस्टम है. यह मिसाइल मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है, जिससे दुश्मन के लिए इसका पता लगाना और इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि इस कैटेगरी में चीन और पाकिस्तान के पास फिलहाल कोई ऐसी मिसाइल नहीं है, जो अग्नि-3 का सीधा मुकाबला कर सके. यह क्षमता भारत को रणनीतिक रूप से स्पष्ट बढ़त देती है.
DRDO और SFC की निगरानी में हुआ परीक्षण
यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) के वैज्ञानिकों और अधिकारियों की कड़ी निगरानी में किया गया. लॉन्च से लेकर टारगेट पर वार तक हर फेज पर बारीकी से नजर रखी गई और सभी सिस्टम उम्मीद के मुताबिक पूरी तरह सफल रहे.
कैसे मिलेगा इस कामयाबी से भारत को फायदा?
इस कामयाब के साथ भारत की रणनीतिक स्थिति और ज्यादा सशक्त हो गई है. यह परीक्षण न केवल संभावित विरोधियों के लिए एक सख्त चेतावनी है, बल्कि देश के लिए गर्व का भी पल है. अग्नि-3 की गर्जना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है.





