China-Pak vs India : 'रॉकेट फोर्स' 24 घंटे में तय कर देती है युद्ध का रुख, सेना प्रमुख ने की मांग; क्या है अहमियत?
Rocket Force India: मॉडर्न वार में पहले 24 घंटे सबसे निर्णायक माने जाते हैं. इसी दौर में ‘रॉकेट फोर्स’ सबसे बड़ा गेमचेंजर बनकर उभरी है. सेना प्रमुख द्वारा रॉकेट फोर्स की मांग के बाद यह सवाल तेज हो गया है कि चीन और पाकिस्तान के मुकाबले भारत कितना तैयार है? क्या रॉकेट फोर्स युद्ध का रुख पलट सकती है? इसकी अहमियत क्या है और भारत को इसकी जरूरत क्यों महसूस हो रही है?
Rocket Force India : दो देशों के बीच युद्ध अब महीनों में नहीं, घंटों और मिनटों में तय होने लगा है. पहले 24 घंटे में युद्ध की दिशा तय जाता है कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा? चीन और पाकिस्तान ने इस सच्चाई को समझते हुए अपनी रॉकेट फोर्स को युद्ध की रीढ़ बना लिया है. अब भारत में भी यह सवाल जोर पकड़ रहा है. सेना प्रमुख ने खुलकर रॉकेट फोर्स की जरूरत की बात कही है. तो आखिर क्या है रॉकेट फोर्स? क्यों इसे 24 घंटे का गेम चेंजर कहा जाता है? और चीन-पाक के सामने भारत कितना मजबूत है?
भारत की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव आने वाला है. आर्मी चीफ के बयान के बाद रॉकेट फोर्स को लेकर चर्चा तेज हो गई है. चीन और पाकिस्तान पहले ही अपनी मिसाइल और रॉकेट फोर्स बना चुके हैं. क्या भारत भी एक डेडिकेटेड Rocket Missile Force बनाएगा? सेना दिवस से पूर्व वार्षिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने बताया सेना प्रमुख ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने अपनी तैयारियों में कई अहम बदलाव किए हैं. हाल ही में सेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) के गठन को मंजूरी दी गई है. यह प्रक्रिया लंबे समय से लंबित थी, लेकिन अब इसकी राह साफ हो गई है.
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भविष्य की रक्षा तैयारियों पर बात करते हुए कहा कि भारत को अब रॉकेट-मिसाइल फोर्स की जरूरत है. मौजूदा हालात में रॉकेट और मिसाइल फोर्स भारत की जरूरत बन चुकी है. युद्ध ऑपरेशन सिंदूर की तरह चार दिन में भी खत्म हो सकता है और रूस-यूक्रेन युद्ध की तरह चार साल तक भी चल सकता है. सरकार भी इस पर सहमत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को ऐसी फोर्स चाहिए, जिसमें रॉकेट और मिसाइल दोनों की क्षमताएं मौजूद हों. चीन और पाकिस्तान पहले ही इस तरह की फोर्स खड़ी कर चुके हैं.
भारत पिनाका रॉकेट सिस्टम को लगातार मजबूत कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता 120 किलोमीटर तक है. इसके अलावा, प्रलय सहित अन्य रॉकेट और मिसाइल प्रणालियों पर भी काम चल रहा है.
रॉकेट फोर्स क्या है?
रॉकेट फोर्स एक ऐसी विशेष सैन्य कमान होती है, जो लंबी दूरी के रॉकेट, बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार को एकीकृत कमांड के तहत संचालित होती है. इसका मकसद है दुश्मन पर तेज, सटीक और बड़े पैमाने पर हमला, बिना लंबी जमीनी लड़ाई के होता है.
भारत को रॉकेट फोर्स की जरूरत क्यों?
भारत आज दो मोर्चों पर खतरे का सामना कर रहा है. उत्तर में चीन और पश्चिम में पाकिस्तान. दोनों देशों ने अपनी मिसाइल और रॉकेट क्षमता को बेहद तेजी से बढ़ाया है. ऐसे में भारत को भी फौजों के बिखरे हुए रॉकेट सिस्टम को एक कमान में लाने की जरूरत महसूस हो रही है.
सेना प्रमुख ने क्यों की इसकी मांग
सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने संकेत दिया कि भविष्य की लड़ाइयां कम समय में, ज्यादा मारक क्षमता वाली होंगी. मिसाइल और रॉकेट युद्ध का केंद्र होंगे. अलग-अलग सेनाओं (थल, वायु, नौसेना) में बंटे सिस्टम से जवाब धीमा पड़ता है, इसलिए एक डेडिकेटेड रॉकेट फोर्स की जरूरत है, जो सीधे रणनीतिक आदेशों पर काम करे.
चीन-पाकिस्तान से पीछे कैसे?
चीन के पास PLA Rocket Force नाम की अलग और शक्तिशाली कमान है. यह सीधे चीनी राष्ट्रपति और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के अधीन है. परमाणु और पारंपरिक मिसाइल एक ही छत के नीचे नियंत्रित हैं. चीन ने मिसाइल वॉर को मुख्य युद्ध रणनीति बना लिया है. चीन के पास हजारों शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग रेंज मिसाइल हैं. हाइपरसोनिक क्षमता वाले पूर्ण विकसित रॉकेट फोर्स भी है. जहां तक पाकिस्तान की Strategic Forces Command मिसाइल ऑपरेशन संभालती है. सीमित संसाधनों के बावजूद, शॉर्ट और मीडियम रेंज मिसाइलों पर फोकस है. पाकिस्तान की रणनीति भारत-केंद्रित है.
भारत की कमजोरी
भारत के पास मिसाइल तो हैं, लेकिन वे अलग-अलग कमांड में बंटी हैं. थलसेना, वायुसेना और स्ट्रैटेजिक फोर्स अलग-अलग ऑपरेट करती हैं, इससे तेज निर्णय और सामूहिक हमला मुश्किल हो जाता है. रॉकेट फोर्स में किस देश के पास कितनी ताकत है?
भारत के पास पृथ्वी, अग्नि, ब्रह्मोस जैसे मजबूत सिस्टम मिसाइल सिस्टम है, लेकिन एकीकृत रॉकेट फोर्स का अभाव है. दो देशों के बीच युद्ध में रॉकेट फोर्स क्यों अहम? इसका जवाब यह है कि रॉकेट फोर्स दुश्मन के एयरबेस को पहले मिनट में तबाह कर सकती है. कमांड सेंटर, रडार और सप्लाई लाइन खत्म कर सकती है. युद्ध का रुख पहले 24 घंटे में तय कर देती है. परमाणु और गैर-परमाणु दोनों विकल्प देती है. यानी जो पहले और सटीक मारे, वही बढ़त में रहता है.
क्या भारत रॉकेट फोर्स बनाएगा?
भारतीय सेना थिएटर कमांड रॉकेट फोर्स की चर्चा कर चुकी है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का संयुक्त ढांचा बनाने की पहले की वकालत कर चुके हैं. अब सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने सरकार से खुली मांग कर दी है. ये सब इशारा करते हैं कि भारत जल्द या देर से रॉकेट फोर्स की ओर बढ़ेगा. चीन-पाक से खतरों को देखते हुए ऐसा करना जरूरी है.





