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क्यों दिन-रात सभी खोज रहे Fatima Jatoi का '6 मिनट 39 सेकंड' वायरल वीडियो, ओरिजिनल या AI जनरेटेड? जानें सच

फातिमा जटोई से जुड़ा वायरल '6 मिनट 39 सेकंड' का वीडियो वेरिफाइड नहीं है और टिकटॉक क्रिएटर का दावा है कि यह AI से बनाया गया है. ओरिजिनल पूरे वीडियो या असली लीक का कोई सबूत नहीं है. जबकि हजारों यूजर्स इस खास क्लिप को ढूंढ रहे हैं. साइबर एक्सपर्ट्स ने इस ट्रेंड को एक खतरनाक इंगेजमेंट ट्रैप बताया है, जिसे मैलवेयर फैलाने और यूजर डेटा इकट्ठा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

क्यों दिन-रात सभी खोज रहे Fatima Jatoi का 6 मिनट 39 सेकंड वायरल वीडियो,  ओरिजिनल या AI जनरेटेड? जानें सच
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक, इंस्टाग्राम एक्स (X) व अन्य प्लेटफॉर्म पर फातिमा जटोई से जुड़ा वायरल '6 मिनट 39 सेकंड' का वीडियो सर्च ट्रेंड कर रहा है. गूगल ट्रेंड्स पर तो यह इतना फैल गया है सभी फातिमा को ही ढूंढने लगे हैं. लोग ढूंढ रहे हैं कि आखिर फातिमा जटोई ने ऐसा क्या कर दिया कि लोग उसी के पीछे पड़ गए हैं. अब तो लोग ताजा वायरल वीडियो के अलावा उसके अंतरंग पुराने वीडियो भी सर्च कर रहे हैं. वहीं कुछ लोग यह जानना चाह रहे हैं कि यह ओरिजिनल वीडियो है या एआई जनरेटेड. कथित तौर पर फातिमा जटोई नाम की एक टिकटॉक क्रिएटर है. जबकि हजारों यूजर्स इस खास क्लिप को ढूंढ रहे हैं, साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट और फैक्ट-चेकर्स ने इस ट्रेंड को एक खतरनाक 'इंगेजमेंट ट्रैप' करार दिया है.

हाल ही में हुए "मैरी स्टार" और "उमैर" 7 मिनट 11 सेकंड के वीडियो होक्स की तरह, यह लेटेस्ट कैंपेन भी "लीक हुए स्कैंडल" के लालच का इस्तेमाल करके अनजान यूजर्स को खतरनाक लिंक पर क्लिक करने के लिए लुभा चुका है. अगर आपने ऐसी पोस्ट देखी हैं जिनमें 'पूरा 6 मिनट 39 सेकंड का वीडियो' होने का दावा किया गया है, तो क्लिक करने से पहले आपको यह जानना जरूरी है.

फातिमा जटोई का वायरल वीडियो जनवरी की शुरुआत में सामने आया है. उस समय सभी की नजरों पर चढ़ गया टिकटॉक और X पर गुमनाम अकाउंट्स ने अस्पष्ट स्क्रीनशॉट और दावे पोस्ट किए कि 'फातिमा जटोई' का एक प्राइवेट वीडियो लीक हो गया से सभी को शेयर कर दिया.

इस पोस्ट 6 मिनट और 39 सेकंड का है और यूज़र्स को "पूरा वर्जन" देखने के लिए अकाउंट के बायो या पिन किए गए लिंक पर भेजा जाता है. इस बात का समर्थन करने वाले साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट और फैक्ट-चेकर्स की सलाह है कि यह वीडियो शायद डीपफेक टेक्नोलॉजी या AI जेनरेशन का नतीजा है, जिसे मस्ती लेने और किसी की इज्जत खराब करने और खतरनाक वेबसाइटों पर ट्रैफिक बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है.

सोशल मीडिया की दुनिया में कभी-कभी एक नाम, एक लाइन और एक तय समय-सब मिलकर ऐसा तूफान खड़ा कर देते हैं कि लोग दिन-रात वही खोजने लगते हैं. इन दिनों वही तूफान उठा है “Fatima Jatoi का 6 मिनट 39 सेकंड वायरल वीडियो” को लेकर. हर प्लेटफॉर्म (Google, YouTube, X, Telegram) सब जगह एक ही सवाल गूंज रहा है. आख़िर इस वीडियो में ऐसा क्या है? और उससे भी बड़ा सवाल-यह वीडियो सच में है या फिर AI का जाल?

क्यों हर कोई यही वीडियो खोज रहा है?

इस वायरल दावे की सबसे बड़ी ताकत है इसकी रहस्यमयी टाइमिंग 6 मिनट 39 सेकंड. सोशल मीडिया साइकोलॉजी कहती है कि जब किसी कंटेंट को exact duration के साथ पेश किया जाता है, तो लोगों की जिज्ञासा कई गुना बढ़ जाती है. दिमाग सोचता है- “इतनी सटीक लंबाई है, मतलब कुछ तो होगा!” यही वजह है कि लोग बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक कर रहे हैं, ग्रुप्स में पूछ रहे हैं और सर्च इंजन पर रात-दिन खंगाल रहे हैं.

अफवाह कैसे बनी आग?

कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि यह कोई लीक वीडियो है, कहीं इसे प्राइवेट फुटेज बताया गया, तो कहीं “पहले देखो, बाद में पछताओ” जैसे जुमलों से सजाया गया. यही चाट-मसालेदार भाषा सोशल मीडिया का असली हथियार है.

असल खेल यहां से शुरू होता है, जैसे ही आप वीडियो खोजते हैं, आपको मिलते हैं फर्जी लिंक, संदिग्ध वेबसाइट्स और Telegram चैनल्स, जिनका मकसद वीडियो दिखाना नहीं, बल्कि आपका डेटा और क्लिक चुराना होता है.

सच्चाई क्या है?

अब सीधे सच पर आते हैं अब तक Fatima Jatoi का कोई भी “6 मिनट 39 सेकंड” का ओरिजिनल वीडियो प्रमाणित रूप से मौजूद नहीं है. किसी भरोसेमंद मीडिया हाउस या आधिकारिक प्लेटफॉर्म ने ऐसे किसी वीडियो की पुष्टि नहीं की है. खुद Fatima Jatoi से जुड़े लोगों और रिपोर्ट्स में इसे फर्जी और भ्रामक दावा बताया गया है.

तो फिर यह वीडियो है क्या?

डिजिटल एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह पूरा ट्रेंड AI-जनरेटेड अफवाह + क्लिकबेट स्ट्रैटेजी का हिस्सा है. आज के दौर में डीपफेक और AI टूल्स इतने एडवांस हो चुके हैं कि किसी का नाम जोड़कर नकली वीडियो की कहानी गढ़ना बेहद आसान हो गया है. भले वीडियो मौजूद हो या नहीं.

लोग फिर भी क्यों फंस जाते हैं?

क्योंकि “वायरल” शब्द दिमाग को कमजोर कर देता है. “लीक” शब्द रोमांच पैदा करता है. और “देखने से पहले हट जाएगा” जैसी लाइन डर पैदा करती है. यही तीनों मिलकर यूज़र को ट्रैप में डाल देते हैं.

यह मामला सिर्फ Fatima Jatoi का नहीं है, बल्कि डिजिटल दौर की सच्चाई है. हर वायरल दावा सच नहीं होता और हर लिंक वीडियो तक नहीं ले जाता—कई बार वह आपको सीधे स्कैम, मालवेयर या बदनामी तक पहुंचा देता है.

आखिरी बात

अगर कोई वीडियो सच में होता, तो वह अब तक किसी न किसी विश्वसनीय स्रोत पर सामने आ चुका होता.

इसलिए अगली बार जब कोई कह, “6 मिनट 39 सेकंड का वीडियो देख लिया?” तो समझ जाइए- यह वीडियो नहीं, बल्कि सोचने की परीक्षा है.

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