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गई तो मार देंगे! इजराइल वॉर के बीच Elnaaz Norouzi का बयान, बताया ईरान भारत देश जैसा आजाद था

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इसी बीच एक्ट्रेस एल्नाज़ नोरौज़ी ने कहा कि वह ईरान लौटेंगी तो उनकी जान को खतरा है.

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( Image Source:  Instagram: iamelnaaz )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Published on: 4 March 2026 9:49 PM

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले में मौत हो गई. यह घटना मध्य पूर्व में तनाव को बहुत बढ़ा दिया है. खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं. इस पूरे संकट के बीच ईरानी मूल की एक्ट्रेस एल्नाज़ नोरौज़ी ने अपनी राय खुलकर रखी है. एल्नाज़ अभी भारत में अक्षय कुमार के साथ लोकप्रिय गेम शो 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' की को-होस्टिंग कर रही हैं. वह लंबे समय से ईरान की मौजूदा सरकार की कड़ी आलोचना करती आई हैं. उन्होंने कई बार सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों में आवाज़ उठाई है.

एल्नाज़ का जन्म 1990 के दशक की शुरुआत में ईरान के तेहरान में हुआ था. जब वह सिर्फ 8 साल की थीं, तब उनके परिवार के साथ वह जर्मनी चली गईं. उनके माता-पिता तो कई साल पहले ही वहां से चले गए, लेकिन उनके कई रिश्तेदार आज भी ईरान में रहते हैं. एल्नाज़ ने आखिरी बार 2018 में ईरान का दौरा किया था. उसके बाद से वह वापस नहीं गईं.

क्यों ईरान में कदम नहीं रखी सकती एक्ट्रेस

उन्होंने एक इंटरव्यू में साफ कहा, 'मैं ईरान में कदम नहीं रख सकती. अगर मैं गई तो मुझे लगता है कि वे मुझे मार डालेंगे.' यह डर इसलिए है क्योंकि उन्होंने सरकार की खुली आलोचना की है, खासकर 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान. महसा अमिनी एक युवा कुर्द महिला थीं, जिनकी हिजाब नियम तोड़ने के आरोप में नैतिकता पुलिस की हिरासत में मौत हो गई थी. इस घटना ने पूरे ईरान में महिलाओं के अधिकारों और सरकार के खिलाफ बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन करवा दिए. एल्नाज़ ने उस समय भी सरकार के खिलाफ खुलकर बोला था, जिससे उनके परिवार में डर फैल गया था.

एल्नाज़ का मैसेज

सरकार और लोग अलग हैं एल्नाज़ बार-बार यह बात दोहराती हैं कि ईरान की सरकार (इस्लामी गणराज्य) और ईरान के आम लोग दो अलग चीजें हैं. उनका कहना है कि ज्यादातर ईरानी लोग इस सरकार और उसकी विचारधारा से सहमत नहीं हैं. ईरानी लोग बहुत पढ़े-लिखे और जागरूक हैं. वे एक अलग, बेहतर राजनीतिक व्यवस्था चाहते हैं. उन्होंने बताया कि पुराने समय में ईरान जिसे पहले फारस कहा जाता था बहुत विविधतापूर्ण और खुला देश था. वहां अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के लोग रहते थे. लोगों को कपड़े पहनने, बोलने और जीने में ज्यादा आजादी थी. ऐतिहासिक रूप से ईरान के इज़राइल और अमेरिका के साथ अच्छे संबंध थे. जैसे शाह मोहम्मद रजा पहलवी के समय में ईरान और अमेरिका-इज़राइल के रिश्ते मजबूत थे. एल्नाज़ का कहना है कि कई बुजुर्ग ईरानी अब उस क्रांति (1979 की इस्लामी क्रांति) पर अफसोस करते हैं, जिसने इस सख्त शासन को लाया. वे कहती हैं, 'ईरान कभी मूल रूप से इस्लामी देश नहीं था, जैसे भारत विविधतापूर्ण है, वैसे ही ईरान भी था.' आज के युवा, खासकर जेनरेशन Z, लोकतंत्र और सुधारों की मांग कर रहे हैं.

परिवार की चिंता और मुश्किलें

इस युद्ध के बीच एल्नाज़ की सबसे बड़ी फिक्र अपने परिवार को लेकर है. उन्होंने कहा, 'अभी युद्ध जैसी स्थिति है, इंटरनेट बंद है और मैं कल से अपने परिवार से बात नहीं कर पाई हूं.' वे बस यही दुआ कर रही हैं कि उनके रिश्तेदार घर के अंदर सुरक्षित रहें. एल्नाज़ ने यह भी बताया कि ईरान छोड़ना इतना आसान नहीं है. बाहर जाना महंगा और जटिल है. शरण मांगने के लिए सख्त नियम हैं. जो लोग बाहर चले जाते हैं, उन्हें विदेश में नई चुनौतियां झेलनी पड़ती हैं और जो ईरान में रह जाते हैं, वे महंगाई, बेरोजगारी और जीवन की बढ़ती मुश्किलों से जूझते हैं.

एल्नाज़ का करियर

एल्नाज़ ने 2017 में एक पाकिस्तानी फिल्म से एक्टिंग शुरू किया. फिर उन्हें 'सेक्रेड गेम्स' में भूमिका से बहुत पहचान मिली. बाद में उन्होंने 'अभय', 'मेड इन हेवन', 'मस्ती 4' जैसी परियोजनाओं में काम किया. अब वे अक्षय कुमार के साथ 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' में नजर आ रही हैं. एल्नाज़ के लिए यह युद्ध सिर्फ कोई बड़ी खबर नहीं है. यह उनकी जिंदगी, उनके परिवार और उनके देश की हकीकत से जुड़ा हुआ है. वे चाहती हैं कि दुनिया ईरान के लोगों को समझे और उन्हें आजादी मिले. उनका मानना है कि अगर आम नागरिकों की मौत होती है, तो जिम्मेदारी उस शासन की होगी जिसने सालों से लोगों की आवाज दबाई है.

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