UPSC से विजिलेंस FIR तक: कौन हैं IPS विकास चौधरी जिनपर लगे हैं संगीन इल्जाम?
दिल्ली पुलिस के विजिलेंस विभाग ने AGMUT कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी शंकर चौधरी के खिलाफ एफआईआर हुई है. ये एक्शन पहरण, अवैध हिरासत और उगाही के आरोपों में लिया गया है.
Who is IPS Shankar Chaudhary: दिल्ली पुलिस के विजिलेंस विभाग ने AGMUT कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी शंकर चौधरी के खिलाफ एफआईर दर्ज की है. उनके खिलाफ ये एक्शन जॉइंट कमिश्नर संजय जैन के जरिए शिकायत कराने के बाद लिया लिया गया है, जिन्होंने 2023 की घटनाओं की जांच के बाद शिकायत दर्ज की थी.
आईपीएस शंकर चौधरी पर अपहरण, अवैध हिरासत और उगाही जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. कई अधिकारियों का कहना है कि ऐसे किसी हाई लेवल अधिकारी के खिलाफ एफआईआर होना कोई आम बात नहीं है. क्योंकि इस तरह की जांच अकसर निचले स्तर के पुलिसकर्मयों तक ही सीमित रह जाती है.
कौन हैं आईपीएस शंकर चौधरी ?
- शंकर चौधरी 2011 बैच के IPS अधिकारी हैं और AGMUT कैडर से संबंध रखते हैं. वे दिल्ली में DCP द्वारका के पद पर रह चुके हैं, जहां उन्होंने ऑपरेशन वर्चस्व सहित कई अभियानों का नेतृत्व किया. इस दौरान उन्होंने लूट, नशा तस्करी और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की.
- जून 2022 में दक्षिण दिल्ली के एक पब में हुए विवाद के बाद, जिसमें एक महिला घायल हुई थी, उन्हें DCP द्वारका पद से हटा दिया गया था. उस समय इसे गलतफहमी बताया गया था, लेकिन बाद में उन्हें पुलिस टेक्नोलॉजी एंड इम्प्लीमेंटेशन यूनिट में ट्रांसफर कर दिया गया.
- जुलाई 2023 में शंकर चौधरी मिजोरम पुलिस में शामिल हुए और वहां SP नारकोटिक्स के रूप में तैनात रहे. शंकर चौधरी का चयन सिविल सेवा परीक्षा 2010 के माध्यम से हुआ था. उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से फाउंडेशन प्रशिक्षण और सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी से पुलिस ट्रेनिंग हासिल की है. उनकी तैनातियां दिल्ली और मिजोरम दोनों इलाकों में रही हैं.
- AGMUT कैडर में वे दिल्ली और मिजोरम के लिए आउटसाइडर अधिकारी के तौर पर लिस्टेड हैं सुरक्षा कारणों से उनकी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है. उनके पास इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के साथ प्रशासनिक और पुलिस प्रशिक्षण का एक्सपीरियंस है.
किस मामले में हुई शंकर चौधरी पर कार्रवाई?
मामला 26 नवंबर 2023 की एक कथित अनधिकृत रेड से जुड़ा है. आरोप है कि शंकर चौधरी ने दिल्ली में यह कार्रवाई स्थानीय पुलिस को सूचना दिए बिना और किसी वैध वारंट के बिना की. इस दौरान एक नाइजीरियाई नागरिक हैरिसन को उसके आवास से हिरासत में लिया गया.
क्या कहती है एफआईआर?
- FIR के अनुसार, हैरिसन को तीन दिनों तक मिजोरम हाउस, नई दिल्ली में अवैध रूप से रखा गया, जिसकी कोई आधिकारिक एंट्री नहीं की गई. 29 नवंबर 2023 को हैरिसन की पत्नी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि मिजोरम पुलिस के कुछ कर्मी 35 लाख रुपये की फिरौती की मांग कर रहे थे. शिकायत दर्ज होने के बाद हैरिसन को रिहा कर दिया गया.
- दिल्ली पुलिस विजिलेंस विभाग की जांच में सामने आया कि शंकर चौधरी ने कथित तौर पर पीड़ित के घर से एक लॉकर और दो बैग निकलवाए. इन वस्तुओं का उल्लेख किसी भी आधिकारिक रिकवरी मेमो या सरकारी दस्तावेज में नहीं किया गया.
- जांच में यह भी पाया गया कि हैरिसन की हिरासत को पूरी तरह से आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रखा गया था, जिससे यह संदेह गहराता है कि कार्रवाई का उद्देश्य वैध पुलिस ऑपरेशन के बजाय पैसे की उगाही हो सकता है.
- जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरी अनधिकृत कार्रवाई में दिल्ली पुलिस के तीन कांस्टेबलों की भूमिका संदिग्ध रही. FIR में कहा गया है कि यह ऑपरेशन कानूनी प्रक्रियाओं से बचने के उद्देश्य से योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया.
- फरवरी 2026 में दर्ज FIR में उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 166, 341, 342 और 409 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
- यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ IPS अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है और कथित तौर पर दिल्ली तथा मिजोरम के अधिकार क्षेत्र से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ है. वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी.





