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रोटी-बेटी का रिश्ता और वोट का सवाल! Uttarakhand में ऐसे मिलेगा नेपाली नागरिकों को अधिकार

उत्तराखंड का नेपाल से रोटी-बेटी का रिश्ता है. एसआईआर के मद्देनजर लोगों के बीच सवाल है कि आखिर कैसे नेपाल के नागरिकों को वोटिंग का अधिकार मिलेगा.

रोटी-बेटी का रिश्ता और वोट का सवाल! Uttarakhand में ऐसे मिलेगा नेपाली नागरिकों को अधिकार
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( Image Source:  X- @ECISVEEP )
समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी

Published on: 7 Feb 2026 4:58 PM

Uttarakhand SIR: उत्तराखंड में रहने वाले नेपाल के लोगों को एसआईआर में शामिल होने का मौका मिलेगा, लेकिन उनके पास भारत की नागरिकता होना जरूरी है. इसके लिए उन्हें चुनाव आयोग के सामने अपना सिटिज़नशिप और डेट ऑफ बर्थ सर्टिफिकेट देना होगा. ज्ञात हो कि हाल ही में उत्तर प्रदेश में एसआईआर हुई है, इससे पहले बिहार में ये प्रक्रिया हुई थी.

ऐसा कहा जाता है कि उत्तराखंड और नेपाल का रोटी-बेटी का रिश्ता है. यह इसलिए है क्योंकि ऐसी कई ऐसी बेटियां हैं जो नेपाल से शादी करके उत्तराखंड में आई हैं और यहां की बेटियां नेपाल गई हैं. दशकों से यहां नेपाल के लोग रह रहे हैं और उनके बच्चे यहीं पैदा हुए हैं. ऐसे में काई लोगों के मन में शंका थी कि एसआईआर के बाद क्या उन्हें यहां वोटिंग का अधिकार मिलेगा?

अधिकारियों ने क्या कहा?

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे इस मामले को लेकर जानकारी दी है. उनका कहना है कि जो लोग भारत में बाहर से आए हैं और उन्हें देश का मतदाता बनना है उसके लिए उनके पास नागरिकता होना जरूरी है. ऐसे में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने पर नेपाल के नागरिकों को अपना सिटिज़नशिप सर्टिफिकेट दिखाना होगा.

नेपाल के नागरिक इस बात का भी रखें ध्यान

जिन लोगों के पास नागरिकता का सर्टिफिकेट नहीं है उनके वोट नहीं बनेंगे. इसके साथ ही जो नेपाल मूल के नागरिक 2003 की वोटिंग लिस्ट में नहीं थे और उन्होंने भारत में वोट नहीं डाला था उन्हें एसआईआर के दौरान अपना बर्थ सर्टिफिकेट और सिटिज़नशिप सर्टिफिकेट देना होगा.

डॉ. जोगदंडे का कहना है कि उनकी बीएलओ मैपिंग तो नहीं हो पाई लेकिन एसआईआर के इन्म्यूरकेशन फॉर्म (Enumeration Form) के जरिए उन्हें सर्टिफिकेट मुहैया कराने होंगे. इसके आधार पर ही यह फैसला हो पाएगा कि वह वोट डालेंगे या नहीं.

क्या है नागरिकता लेने का नियम?

शादी के बाद नेपाली महिलाओं को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत आवेदन करना होता है. इसके लिए यह अनिवार्य है कि आवेदिका ने विवाह के बाद कम से कम सात सालों तक भारत में निरंतर निवास किया हो. नागरिकता प्रक्रिया में विवाह का विधिवत पंजीकरण, वैध मैरिज सर्टिफिकेट तथा सात साल के निरंतर निवास से जुड़े प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक होता है. यह पूरी प्रक्रिया जिलाधिकारी स्तर से शुरू होकर राज्य और केंद्र सरकार के गृह विभागों के माध्यम से पूरी की जाती है.

कौन कहलाएगा भारतीय नागरिक?

भारतीय नागरिकता कानून के मुताबिक, 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्म लेने वाला शख्स अपने आप भारतीय नागरिक माना जाता है. वहीं, 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्ति को तभी नागरिकता प्राप्त होती है, जब उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो. 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वाले मामलों में नागरिकता तभी मान्य होती है, जब माता-पिता में से एक भारतीय नागरिक हो और दूसरा व्यक्ति भारत में वैध रूप से निवास कर रहा हो. भारत-नेपाल संधि के तहत भारत में रह रहे नेपाली नागरिकों को वैध निवासी का दर्जा प्राप्त है, लेकिन मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है.

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