मिलिए जम्मू की बेटी Captain Hansja Sharma से, जिन्होंने 27 की उम्र में 'रुद्र' उड़ाकर रचा इतिहास
Captain Hansja Sharma बनीं भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी जिन्होंने रुद्र आर्म्ड हेलिकॉप्टर उड़ाया. जानिए संघर्ष, ट्रेनिंग और मां की कुर्बानी की कहानी.
Captain Hansja Sharma
आज भारत की बेटियां सिर्फ घरों या कॉरपोरेट दफ्तरों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि आसमान की सीमाएं भी लांघ रही हैं. कॉरपोरेट बोर्डरूम से लेकर युद्ध के मोर्चे तक, महिलाएं हर उस जगह अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं, जहां कभी उनकी कल्पना भी मुश्किल थी. हाल ही में ऑपरेशन 'सिंदूर' की ब्रीफिंग का नेतृत्व करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के बाद अब भारतीय सेना में एक और नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है.
15 जनवरी को हुए आर्मी डे समारोह में एक युवा महिला अधिकारी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. यह कहानी है कैप्टन हंसजा शर्मा की, जिन्होंने न सिर्फ एक रिकॉर्ड बनाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि अगर हौसले मजबूत हों, तो कोई भी बाधा उड़ान भरने से रोक नहीं सकती.
कौन हैं कैप्टन Hansja Sharma?
जम्मू के एक शांत मोहल्ले से निकलकर भारत के सबसे खतरनाक युद्धक हेलिकॉप्टर को उड़ाने तक का सफर तय करने वाली कैप्टन हंसजा शर्मा आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उन्होंने न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि फ्रंटलाइन पर सेवा का मतलब ही नए सिरे से परिभाषित कर दिया. महज 27 साल की उम्र में कैप्टन हंसजा शर्मा भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी बनीं, जिन्हें रुद्र (Rudra) आर्म्ड हेलिकॉप्टर उड़ाने की योग्यता हासिल हुई. 9 मार्च 1998 को जन्मीं हंसजा ने नासिक स्थित Combat Army Aviation Training School (CAATS) में ट्रेनिंग के दौरान टॉप किया और बेस्ट कॉम्बैट एविएटर के लिए मिलने वाली ‘सिल्वर चीता ट्रॉफी’ जीतकर इतिहास रच दिया. यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली महिला हैं.
पढ़ाई से कॉकपिट तक का सफर
हंसजा शर्मा ने जम्मू के ज़ेवियर्स कॉन्वेंट स्कूल और परेड कॉलेज से शुरुआती पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने जम्मू विश्वविद्यालय से जूलॉजी में ग्रेजुएशन किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका सपना था. भारतीय सेना में शामिल होना. सेना चयन प्रक्रिया के दौरान उन्हें एक बार Temporary Rejection (TR) का सामना करना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. नाक की सर्जरी करवाई, खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से और मजबूत बनाया और बिना किसी कोचिंग के दोबारा चयन प्रक्रिया में उतरीं. उनकी मां के मुताबिक, हंसजा के कमरे में एक लाइन हमेशा लिखी रहती थी. खुद के प्रति निर्दयी बनो, यही लाइन उनके जज़्बे और अनुशासन की पहचान बन गई.
Army Day पर मिली ये कमान
15 जनवरी 2026 को राजस्थान में हुए आर्मी डे परेड में कैप्टन हंसजा शर्मा ने 251 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया. इस दौरान रुद्र हेलिकॉप्टर से HELINA मिसाइल सिस्टम का प्रदर्शन किया गया, जिसने महिलाओं की कॉम्बैट एविएशन में बढ़ती भूमिका को साफ तौर पर उजागर किया. NCC कैडेट रह चुकीं हंसजा ने इससे पहले एयर फोर्स अकादमी में आयोजित 107वें एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट कोर्स में भी टॉप किया था.
मां की कुर्बानी से मिली यह उड़ान
हंसजा की इस कामयाबी के पीछे उनकी मां रश्मि शर्मा की कहानी भी कम प्रेरणादायक नहीं है. वरिष्ठ पत्रकार और सिंगल मदर रश्मि शर्मा ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए संपत्तियां तक बेच दीं. उन्होंने Republic TV से बातचीत में कहा कि 'अब हंसजा मुझसे कहती है कि मैं काम करना छोड़ दूं, लेकिन चूंकि मैं एक पत्रकार हूं, वह कहती है कि अगर मैं काम करती रहूंगी तो शायद कई जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकूंगी.'
कैसा है आर्मी में महिलाओं का भविष्य?
कैप्टन हंसजा शर्मा की उपलब्धियां भारतीय सेना में समावेशिता (Inclusivity) की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का मजबूत उदाहरण हैं. बदलते दौर में महिलाओं को नई जिम्मेदारियां मिल रही हैं और उनकी भूमिका सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि निर्णायक बनती जा रही है. हंसजा की कहानी यह संदेश देती है कि जिद, मेहनत और साहस के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती. वह न सिर्फ सेना में महिलाओं के लिए, बल्कि हर उस युवा के लिए मिसाल हैं जो अपने सपनों को पंख देना चाहता है.





