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50 से सीधे 18% टैरिफ का किसे सबसे ज्‍यादा फायदा? ऑटो पार्ट्स, टेक्‍स्‍टाइल समेत इन सेक्‍टर्स की होगी चांदी

India-US Trade Deal Explained: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है. इस India-US Trade Deal से भारतीय निर्यातकों को कीमत में बड़ी राहत मिलेगी.

India US trade relations
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India US trade relations

सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी

Updated on: 3 Feb 2026 12:19 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18% करने की घोषणा को भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक व्यापार सुस्ती, चीन-प्लस-वन रणनीति और सप्लाई चेन शिफ्ट के दौर से गुजर रहा है. इस नए India-US Trade Deal से भारतीय निर्यातकों यानी इंपोर्टर्स को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर उन सेक्टरों को जो कम मार्जिन पर काम करते हैं.

सीएनएन-न्‍यूज 18 से बात करते हुए अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने इसे भारत-अमेरिका रिश्‍तों का नया युग बताया और कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों मजबूत नेतृत्व दे रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ कटौती से द्विपक्षीय व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी.

टैरिफ घटने का सीधा असर क्या होगा?

टैरिफ में कटौती का सबसे सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा. अगर किसी भारतीय निर्यात उत्पाद की FOB (Free on Board) कीमत 100 डॉलर है, तो 25% टैरिफ पर उसकी लैंडेड कॉस्ट 125 डॉलर होगी. वहीं 18% टैरिफ पर वही माल 118 डॉलर पर पहुंचेगा. यानी हर 100 डॉलर के सामान पर 7 डॉलर की सीधी बचत. यह अंतर उन सेक्टरों के लिए बेहद अहम है जहां मुनाफा पहले ही सीमित होता है. कंपनियां या तो इस बचत को अपने मार्जिन बढ़ाने में इस्तेमाल करेंगी या फिर अमेरिकी ग्राहकों को सस्ता माल देकर बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश करेंगी.

टेक्सटाइल और अपैरल सेक्‍टर को कितना फायदा?

भारत का टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट सेक्टर अमेरिका में बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों से सीधी टक्‍कर लेता है. ये सभी देश कम लागत में उत्पादन करते हैं. टैरिफ घटने से भारतीय कपड़ों की कीमतें ज्यादा प्रतिस्पर्धी यानी कॉम्पिटिटिव होंगी. इससे होम टेक्सटाइल, कॉटन गारमेंट्स और मेड-अप्स को फायदा होगा और मिड-सेगमेंट रिटेल ब्रांड्स के लिए भारत आकर्षक विकल्प बनेगा. विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे बड़े एक्सपोर्ट हाउसों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी और रोजगार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.

इंजीनियरिंग गुड्स: ऑटो पार्ट्स से मशीनरी तक

इंजीनियरिंग गुड्स अमेरिका को भारत के सबसे बड़े निर्यात में शामिल हैं. इसमें शामिल हैं ऑटो कंपोनेंट्स, इंडस्ट्रियल मशीनरी, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और कैपिटल गुड्स. इन उत्पादों में आमतौर पर मुनाफा सिंगल डिजिट में होता है. ऐसे में टैरिफ घटने से भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी और ईस्ट एशियन सप्लायर्स (जापान, कोरिया, ताइवान) से मुकाबला आसान होगा. वहीं लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट में भारतीय कंपनियों की सौदेबाजी की ताकत बढ़ेगी. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि निर्यात वॉल्यूम तुरंत नहीं बढ़ेगा, लेकिन अगले कुछ तिमाहियों में इसका असर दिख सकता है.

किस सेक्टर में किसे-कितना फायदा?

स्पेशलिटी केमिकल्स और इंटरमीडिएट केमिकल्स के क्षेत्र में भारत पहले ही चीन-प्लस-वन रणनीति का फायदा उठा रहा है. इस सेक्टर की खासियत लंबे कॉन्ट्रैक्ट, कड़े रेगुलेटरी नियम और कीमतों में तुरंत बदलाव नहीं है. लेकिन टैरिफ घटने से नेट रियलाइजेशन बेहतर होगा, अमेरिकी सप्लाई चेन में भारत की स्थिति मजबूत होगी और फार्मा इंटरमीडिएट और एग्रो-केमिकल एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा.

जेम्स एंड ज्वेलरी: हाई वैल्यू, हाई कॉम्पिटिशन

कट-पॉलिश्ड डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी अमेरिका को भारत के प्रमुख निर्यात हैं. टैरिफ कटौती से लैंडेड कॉस्ट घटेगी, अमेरिकी होलसेलर्स और रिटेलर्स को राहत मिलेगी. इसके अलावा इन्वेंट्री मैनेजमेंट आसान होगा और मार्जिन पर दबाव कम होगा. इस सेक्टर में बेल्जियम और इजराइल जैसे देशों से मुकाबला होता है, जहां कीमत का अंतर बेहद निर्णायक होता है.

IT सेक्टर: अप्रत्यक्ष फायदा

हालांकि सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट सर्विस ट्रेड के तहत आता है और उस पर टैरिफ लागू नहीं होता, फिर भी अमेरिका-भारत संबंधों में सुधार से निवेश माहौल बेहतर होगा जिससे टेक कंपनियों में कॉन्फिडेंस बढ़ेगा. रिश्‍तों में सुधार से H-1B और टेक विजा जैसे मुद्दों पर बातचीत आसान होगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह डील IT सेक्टर के लिए “सेंटिमेंट बूस्टर” साबित होगी.

रूस से तेल आयात और ट्रंप का दबाव

जुलाई 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 25% टैरिफ और 25% अतिरिक्त पेनल्टी लगाई थी. इसकी वजह थी भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल का आयात. अब टैरिफ घटाकर 18% करना यह संकेत देता है कि अमेरिका भारत के साथ रिश्ते बिगाड़ना नहीं चाहता और चीन के मुकाबले भारत को रणनीतिक साझेदार बनाए रखना चाहता है. कोशिश यही है कि ट्रेड को जियोपॉलिटिक्स से अलग रखा जाए.

भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

इस डील से...

निर्यात बढ़ेगा

डॉलर इनफ्लो सुधरेगा

करंट अकाउंट पर दबाव कम होगा

रोजगार सृजन में मदद मिलेगी

MSME सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा

हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी भी दे रहे हैं कि अमेरिका घरेलू राजनीति के तहत भविष्य में नीति बदल सकता है. भारत को अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस को मजबूत करना होगा क्‍योंकि केवल टैरिफ राहत पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. India-US Trade Deal भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर है. टैरिफ कटौती से टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, केमिकल्स और जेम्स-ज्वेलरी जैसे सेक्टरों को सीधा फायदा मिलेगा. साथ ही IT और निवेश सेक्टर में सकारात्मक माहौल बनेगा.

यह डील ऐसे समय आई है जब भारत खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. अगर सरकार सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस बनाए रखती है, तो यह समझौता केवल राहत नहीं बल्कि भारत की निर्यात नीति के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.

डोनाल्ड ट्रंपअमेरिका
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