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S*# एजुकेटर Seema Anand को लेकर क्या चल रहा है सोशल में? लोग बोले- वाइफ स्वैपिंग नॉर्मल है इनके लिए

ब्रिटिश-भारतीय स्टोरीटेलर और सेक्स एजुकेटर सीमा आनंद अपने हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू के बाद सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा में हैं. शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में दिए गए उनके कुछ बेबाक बयानों ने ट्रोलिंग और समर्थन दोनों को जन्म दिया है. जहां एक वर्ग उनके आत्मविश्वास, फिटनेस और सेक्स पॉजिटिव सोच को प्रेरणादायक बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग नाबालिग से जुड़े अनुभव साझा करने और रिश्तों में चीटिंग को लेकर सवाल उठा रहा है. यह विवाद भारतीय समाज में नैतिकता, स्वतंत्रता और दोहरे मानदंडों की बहस को फिर सामने ले आया है.

S*# एजुकेटर Seema Anand को लेकर क्या चल रहा है सोशल में? लोग बोले- वाइफ स्वैपिंग नॉर्मल है इनके लिए
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( Image Source:  X: @Bagalwali_ )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Updated on: 15 Jan 2026 6:39 PM IST

सीमा आनंद (Seema Anand) इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में हैं, खासकर उनके हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू के बाद. वो एक 63 साल की ब्रिटिश-भारतीय स्टोरीटेलर, माइथोलॉजिस्ट, ऑथर और सेक्स एजुकेटर हैं, जो कामसूत्र, रिलेशनशिप्स, इंटीमेसी और महिलाओं की सेक्शुअलिटी पर बेबाकी से बात करती हैं. उन्हें अक्सर 'कामुक देवी' या 'सेक्स पॉजिटिव' आवाज के रूप में देखा जाता है. अब बड़ी बात है ये है कि उनके बारें में सोशल मीडिया पर बात होने बंद ही नहीं हो रही है. ज्यादातर ट्रोल्स उनकी खिंचाई करते पोस्ट शेयर कर रहे है.

शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में उन्होंने कुछ ऐसे बयान दिए जो वायरल हो गए. उन्होंने बताया कि पिछले साल जब वो 63 की थी एक 15 साल के लड़के ने उन्हें अप्रोच किया और कहा कि वो उन्हें बहुत अट्रैक्टिव लगती हैं. इस पर उन्होंने हैरानी जताई, लेकिन इसे युवाओं में बड़ी उम्र की महिलाओं के प्रति आकर्षण मतलब भी बताया. एक और क्लिप में उन्होंने कबूला कि रिश्तों में बोरियत आने पर उनका मन भी कभी-कभी भटका है, और उन्होंने पति को चीट किया है क्योंकि 'मैं भी इंसान हूं'.

क्यों हो रही है ट्रोल

नजर डालते ही उन पोस्ट पर जिसमें उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई जा रही है. @annushreex नाम की एक्स यूजर लिखती है, 'ब्रिटिश-भारतीय लेखिका और सेक्स एजुकेटर सीमा आनंद अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं. वे खुलकर कहती हैं कि सेक्स नैचुरल है, गंदा नहीं. पत्रकार शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में उन्होंने बताया कि 63 साल की उम्र में एक 15 साल के लड़के ने उन्हें अप्रोच किया, जो उसकी सोच को दिखाता है. पॉडकास्ट में जब उनसे पति को धोखा देने का सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'हां, मैं भी इंसान हूं.' सीमा के मुताबिक रिश्तों में बोरियत और अकेलापन आ सकता है, जिससे इंसान भटकता है. उनका मानना है कि सेक्स जीवन का जरूरी हिस्सा है और दुनिया का मुख्य उद्देश्य प्लेजर है. उनके ये बयान सोशल मीडिया पर बहस का कारण बन गए हैं.

@HarshWSingh09 नाम के यूजर ने लिखा, 'सीमा जी की ये सोच कोई प्रगतिशील सोच नहीं, बल्कि नैतिक दिवालियापन है. जहां ग्रुप सेक्स, वाइफ स्वैपिंग और बोरियत दूर करने के लिए पैसा देकर जिस्म खरीदना 'नॉर्मल' बता दिया जाए, और फिर उसे सही ठहराने के लिए इतिहास और दर्शन की आड़ ली जाए, वही सबसे बड़ा पाखंड है. इंसान और जानवर में फर्क इसलिए था क्योंकि इंसान में संयम, जिम्मेदारी और संस्कार होते थे.

@Induwinner ने लिखा, 'सीमा आनंद एक ऐसा नाम जो भारत में सेक्स, रिश्तों और महिलाओं की इच्छाओं पर बिना झिझक संवाद करता है. जहां अधिकतर लोग इन्हें 'शर्म' और चुप्पी के दायरे में रखते हैं, वहीं सीमा आनंद सीधे और साहसिक सवाल उठाती हैं आख़िर सेक्स जैसे विषय पर चुप्पी क्यों?…….continue in Thread1

@ACP_SURINDER_K ने लिखा, 'धन्यवाद, सीमा आनंद जी, उस समाज में साहस के साथ सच बोलने के लिए जहां आज भी शर्म और चुप्पी को तरजीह दी जाती है. आपने कामसूत्र जैसे प्राचीन ज्ञान को केवल आसनों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सहमति, आनंद और प्रेम के गहरे दर्शन के रूप में सामने रखा. आपका काम लोगों को शर्म से मुक्त करता है और यह याद दिलाता है कि सुख कोई पाप नहीं, बल्कि अधिकार है. जहां चुप रहना सदाचार माना जाता है, वहां आपकी निर्भीक आवाज़ परिवर्तन लाती है. बोलती रहिए दुनिया को आपकी जैसी ईमानदार और करुणामयी आवाज़ों की ज़रूरत है.'

@DrAmitlakhera ने बोला- सीमा आनंद केवल कामुकता ही नहीं, बल्कि महाविद्याओं, तंत्र और गीता जैसे गूढ़ विषयों पर भी तार्किक और गहन दृष्टि रखती हैं. उनकी किताब 'मोहक कलाएं' कामवासना को वासना नहीं, बल्कि चेतना और ऊर्जा के रूप में देखती है. 63 की उम्र में उनका आत्मविश्वास समस्या नहीं है समस्या हमारी नज़र है. खुले मन से बोलने वाली स्त्री को समाज आज भी 'वस्तु' बना देता है. शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट के बाद जो नैतिक हंगामा हुआ, वह उसी दोहरे चरित्र का उदाहरण है, जो खुद वल्गर कंटेंट देखता है, लेकिन ज्ञान को अश्लील कहता है समस्या स्त्री की आज़ादी नहीं, समस्या हमारी असहज और पाखंडी मानसिकता है.'

पोस्ट से साफ़ है कई लोग उनकी फिटनेस, कॉन्फिडेंस और बोल्डनेस की तारीफ कर रहे हैं. कह रहे हैं कि 63 की उम्र में इतनी आकर्षक और जिंदादिल दिखना इंस्पायरिंग है. कुछ पोस्ट्स में उन्हें 'उम्र सिर्फ नंबर है' का उदाहरण बना रहे हैं. कुछ यूजर्स कह रहे हैं कि नाबालिग से जुड़े अनुभव को हल्के में शेयर करना जिम्मेदारी की कमी दिखाता है. चीटिंग को सामान्य बताने पर बहस छिड़ी है कि क्या इससे रिश्तों में धोखे को प्रमोट किया जा रहा है? कुछ कह रहे हैं कि अगर यही बात कोई आदमी कहता तो ट्रोलिंग और कैंसल कल्चर ज्यादा होता.

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