Phishing Links, Weak Passwords या Malware! फेक इंटिमेट वीडियोज ने बढ़ाया अकाउंट हैकिंग का खतरा
आज के डिजिटल युग में डीपफेक टेक्नोलॉजी एक गंभीर साइबर खतरे के रूप में उभर रही है. एआई की मदद से बनाए जा रहे फेक इंटिमेट वीडियोज न सिर्फ लोगों की प्राइवेसी को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि अकाउंट हैकिंग, सेक्सटॉर्शन और फाइनेंशियल फ्रॉड का जरिया भी बन रहे हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ये कंटेंट तेजी से वायरल होता है, जिससे आम यूजर्स से लेकर सेलिब्रिटीज तक प्रभावित हो रहे हैं. एक्सपर्ट्स मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और सतर्क ऑनलाइन व्यवहार की सलाह दे रहे हैं.
आज की डिजिटल दुनिया में जहां सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, वहीं एक नया खतरा उभर रहा है फेक इंटिमेट वीडियोज, जिन्हें डीपफेक टेक्नोलॉजी से बनाया जा रहा है. ये वीडियोज न सिर्फ लोगों की प्राइवेसी को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि अकाउंट हैकिंग के जरिए फैलाए जा रहे हैं, जिससे पीड़ितों को ब्लैकमेलिंग, फाइनेंशियल लॉस और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई की एडवांसमेंट के साथ ये मामले बढ़ते जा रहे हैं, और आम यूजर्स से लेकर सेलिब्रिटीज तक कोई सुरक्षित नहीं. डीपफेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेस्ड तकनीक है, जिसमें किसी व्यक्ति की फोटोज या वीडियोज को मैनिपुलेट करके फेक कंटेंट बनाया जाता है. इसमें किसी के चेहरे को दूसरे बॉडी पर सुपरइंपोज किया जाता है, और आवाज को भी क्लोन किया जा सकता है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, टिकटॉक, इंस्टाग्राम और एक्स हैंडल पर ये वीडियोज वायरल हो जाते हैं. हैकर्स अक्सर यूजर्स के अकाउंट्स को हैक करके इन फेक वीडियोज को उनके फ्रेंड्स या फॉलोअर्स को भेजते हैं, जिससे स्कैम्स जैसे बिटकॉइन इनवेस्टमेंट फ्रॉड या सेक्सटॉर्शन (सेक्सुअल ब्लैकमेल) को बढ़ावा मिलता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में डीपफेक फ्रॉड के मामलों में 100% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. तजा मामलों की बात करें तो, मुंबई सुरेश MMS, फातिमा जटोई, प्रिया MMS वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर एक घोस्ट वीडियो की तरह सामने आते है और ज्यादा ट्रेंड होने के बाद गायब हो जाते है. लेकिन यूजर्स अलर्ट रहे है कि इस तरह की वीडियो आपके अकाउंट को बेहद नुकसान पहुंचा रहे है.
कैसे होता है अकाउंट हैकिंग का कनेक्शन?
हैकर्स पहले यूजर्स के सोशल मीडिया अकाउंट्स को टारगेट करते हैं फिशिंग लिंक्स, वीक पासवर्ड्स या मैलवेयर के जरिए. एक बार अकाउंट हैक हो जाए, तो वे पीड़ित की फोटोज को इस्तेमाल करके फेक इंटिमेट वीडियोज बनाते हैं और उन्हें शेयर करते हैं. इससे न सिर्फ पीड़ित की रेपुटेशन खराब होती है, बल्कि हैकर्स पैसे ऐंठने या और डेटा चुराने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. महिलाएं और लड़कियां इसकी सबसे ज्यादा शिकार हैं, क्योंकि 96% डीपफेक वीडियोज नॉन-कंसेंसुअल इंटिमेट कंटेंट होते हैं.
फिशिंग लिंक्स क्या होते हैं?
फिशिंग लिंक्स (Phishing Links) वो खतरनाक लिंक होते हैं जो हैकर्स या साइबर अपराधी आपको ईमेल, मैसेज (SMS/WhatsApp), सोशल मीडिया पोस्ट, या कोई भी ऑनलाइन जगह पर भेजते हैं। ये लिंक देखने में बिल्कुल असली लगते हैं, जैसे बैंक, गूगल, फेसबुक, अमेज़न, पेटीएम या किसी सरकारी वेबसाइट का लिंक, लेकिन असल में ये नकली (फेक) वेबसाइट पर ले जाते हैं. जब आप इन लिंक्स पर क्लिक करते हैं, तो आप एक ऐसी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं जो असली साइट जैसी दिखती है, लेकिन वो हैकर्स ने बनाई होती है। वहां आप अपना पासवर्ड, बैंक अकाउंट डिटेल्स, क्रेडिट/डेबिट कार्ड नंबर, OTP, आधार नंबर या कोई भी निजी जानकारी डाल देते हैं. हैकर्स ये जानकारी चुरा लेते हैं और फिर आपके अकाउंट को हैक कर लेते हैं, पैसे निकाल लेते हैं, या आपकी प्राइवेसी का गलत इस्तेमाल करते हैं.
कुछ ऐसे केस जो दुनिया को हिला चुके हैं:
टेलर स्विफ्ट डीपफेक स्कैंडल (2024): जनवरी 2024 में, पॉप स्टार टेलर स्विफ्ट के फेक इंटिमेट इमेजेस सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जो एक्स प्लेटफॉर्म पर लाखों बार देखे गए. ये इमेजेस एआई से जेनरेटेड थे और स्विफ्ट के सोशल मीडिया फोटोज से बनाए गए थे. हैकर्स ने इनका इस्तेमाल करके यूजर्स को स्कैम लिंक्स पर क्लिक करवाया, जिससे कई लोगों के अकाउंट्स हैक हो गए. स्विफ्ट की टीम ने इसे 'डीपफेक पॉर्न' करार दिया और प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट हटवाया, लेकिन तब तक लाखों यूजर्स प्रभावित हो चुके थे.
-हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी स्टूडेंट केस (2025): इस साल की शुरुआत में, हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी के एक मेल स्टूडेंट के लैपटॉप से 700 से ज्यादा फोटोज मिले, जिनमें से कई एआई-जेनरेटेड पॉर्नोग्राफिक इमेजेस थे. ये इमेजेस क्लासमेट्स की सोशल मीडिया फोटोज से बनाई गई थीं, बिना उनकी सहमति के। स्टूडेंट ने इनका इस्तेमाल सेक्सटॉर्शन के लिए किया, और जब उसका अकाउंट हैक हुआ, तो ये इमेजेस वायरल हो गईं। पीड़ित लड़कियों ने इंस्टाग्राम पर कैंपेन चलाकर जागरूकता फैलाई.
-रश्मिका मंदाना डीपफेक वीडियो (2023): भारतीय एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उनका चेहरा एक ब्रिटिश-इंडियन इन्फ्लुएंसर की बॉडी पर लगाया गया था.ये वीडियो इंटिमेट लग रहा था और लाखों बार देखा गया. रश्मिका ने इसे अपनी प्राइवेसी का उल्लंघन बताया, और दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की. ये केस भारत में डीपफेक के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने वाला बना, जहां हैकर्स सोशल मीडिया फोटोज का इस्तेमाल करते हैं.
-राणा अय्यूब डीपफेक केस (2024): भारतीय जर्नलिस्ट राणा अय्यूब को ट्रोलिंग का शिकार बनाया गया, जब उनके फेक सेक्सुअलाइज्ड इमेजेस सोशल मीडिया पर फैलाए गए. ये डीपफेक उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स से बनाए गए थे और राजनीतिक दुश्मनी के चलते शेयर किए गए. अय्यूब ने इसे साइबर हैरासमेंट बताया, और ये महिलाओं पर डीपफेक अटैक्स के बढ़ते मामलों का उदाहरण है.
-सेक्सटॉर्शन केसेज (2025): अमेरिका में कई मामलों में हैकर्स ने सोशल मीडिया से फोटोज चुराकर फेक एक्सप्लिसिट इमेजेस बनाए और पीड़ितों से पैसे या रियल कंटेंट की मांग की. एक रिपोर्ट में कहा गया कि अपराधी वीडियो चैट्स या डेटिंग साइट्स से मटेरियल लेते हैं. भारत में भी NCRB की 2021 रिपोर्ट में साइबर क्राइम्स के 52,974 केस रजिस्टर्ड हुए, जिनमें डीपफेक से जुड़े मामले बढ़ रहे हैं. असम, ओडिशा और मुंबई में युवा महिलाओं के प्राइवेट इमेजेस लीक और डीपफेक मामलों में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की, जहां हैकर्स वीक पासवर्ड्स का फायदा उठाते हैं.
एक्सपर्ट्स की सलाह
मजबूत पासवर्ड्स यूज करें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन रखें, और संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक न करें. अगर ऐसा कोई वीडियो दिखे, तो तुरंत रिपोर्ट करें. सरकारें जैसे यूके में ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट ला रही हैं, लेकिन यूजर्स को खुद सतर्क रहना होगा. भारत में IT एक्ट और साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) के जरिए शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.





