मिडिल ईस्ट में जंग, भारत पर असर, रिकॉर्ड लो पर पहुंचा रुपया; क्या आने वाला है महंगाई का नया झटका?
रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे आर्थिक चिंता बढ़ गई है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर दिख रहा है. सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में रुपया और कमजोर होगा और महंगाई बढ़ेगी?
Indian Rupees Against Dollar: बुधवार को रुपया 69 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.18 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है. कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है. विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है.
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ा है. डॉलर मजबूत हुआ है और कच्चे तेल की कीमत करीब 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. इन हालात ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. भारत जैसे देश, जो ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति जोखिम भरी मानी जा रही है.
क्या है रुपये की कंडीशन?
इस साल अब तक रुपया 2 फीसदी से ज्यादा कमजोर हो चुका है. 2025 में यह लगभग 5 फीसदी गिरा था. हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच हुए व्यापार समझौते से विदेशी निवेश में कुछ बढ़ोतरी हुई थी और रुपये को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन मिडिल ईस्ट में फिर से बढ़े संघर्ष ने उस राहत को खत्म कर दिया है.
इस हफ्ते की शुरुआत में भी रुपये में बड़ी गिरावट देखी गई थी. सोमवार को यह 41 पैसे टूटकर 91.49 पर बंद हुआ था. उस दिन अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले तेज होने की खबरों का असर बाजार पर पड़ा था.
किस वजह से रुपये पर पड़ा दबाव?
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली और विदेशी निवेशकों द्वारा पैसा निकालने से रुपये पर दबाव बढ़ा है. शेयर बाजार में भी गिरावट देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 गिरकर 24,400 के नीचे पहुंच गया. वैश्विक बाजारों में भी निवेशक जोखिम से दूर जाते दिखे. महंगाई बढ़ने की आशंका से दुनिया भर के शेयर और बॉन्ड बाजारों पर असर पड़ा है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एचडीएफसी सिक्योरिटीज में प्राइम रिसर्च के प्रमुख देवर्ष वकील ने कहा है कि मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट की आशंका से वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट आई है. कच्चा तेल करीब 5 फीसदी बढ़ा है, जबकि यूरोप में थोक प्राकृतिक गैस की कीमतें 40 फीसदी तक उछल गई हैं.
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय तक तनाव बना रहने से भारत पर दबाव बढ़ सकता है. इससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, महंगाई बढ़ सकती है और रुपये पर और दबाव आ सकता है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से देश का आयात बिल बढ़ेगा, चालू खाता घाटा और ज्यादा हो सकता है, रुपया कमजोर हो सकता है और विदेशी पूंजी बाहर जा सकती है.”




