तीन शर्तें, एक जंग- ओम बिरला के सामने विपक्ष का अल्टीमेटम, अब क्या करेंगे स्पीकर?
अपोज़ीशन ने सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं और कहा है कि अगर ओम बिरला इन शर्तों को मान लेते हैं तो तभी वह संसद में चर्चा के लिए तैयार हैं.
Lok Sabha: लोकसभा में सोमवार को भी गतिरोध बना रहा. सरकार ने विपक्ष की इस मांग को मानने से इनकार कर दिया कि केंद्रीय बजट पर चर्चा शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन को संबोधित करने की इजाज़त नहीं दी गई.
दिन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक हुई. बैठक के बाद विपक्ष ने साफ किया कि वह बजट पर चर्चा के लिए तभी तैयार होगा, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तीन शर्तें मान लें.
क्या हैं विपक्ष की ओम बिरला से तीन शर्तें
- विपक्ष की मांग है कि आठ निलंबित विपक्षी सांसदों का निलंबन वापस लिया जाएय.
- लोकसभा अध्यक्ष पिछले हफ्ते कांग्रेस की महिला सांसदों के कथित विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में न आने की सलाह देने संबंधी अपनी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दें.
- बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की कांग्रेस नेताओं पर की गई टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाया जाए.
क्या विपक्ष कर रहा है अविश्वास प्रस्ताव का प्लान?
बैठक के बाद सूत्रों ने बताया कि यदि इन मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर सकता है. कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने कहा कि फ्लोर लीडर्स की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन आगे बढ़ने से पहले सभी विपक्षी दलों की एक और बैठक होगी.
क्या एकजुट है विपक्ष?
हालांकि, दिन चढ़ने के साथ यह साफ हो गया कि विपक्ष इस मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट नहीं है. कांग्रेस के बाद INDIA गठबंधन की दो बड़ी पार्टियों समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने अलग-अलग रुख अपनाया. सपा सूत्रों ने कहा कि पार्टी प्रस्ताव के पक्ष में है, लेकिन पहल कांग्रेस को करनी चाहिए. वहीं, टीएमसी के एक सांसद ने कहा कि पार्टी ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और कोलकाता स्थित नेतृत्व से निर्देश का इंतजार किया जाएगा.
टीएमसी सांसद ने सवाल उठाते हुए कहा,"खुद कांग्रेस स्पष्ट नहीं है. अगर वे ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव लाना चाहते हैं, तो फिर केसी वेणुगोपाल स्पीकर से मिलने क्यों गए?" यह टिप्पणी कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बीच हुई बैठक को लेकर थी, जो गतिरोध खत्म करने के प्रयास के तहत हुई थी.
कांग्रेस ने क्या लगाया इल्जाम?
इससे पहले दिन में केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद एकतरफा हो गई है क्योंकि अध्यक्ष पक्षपात कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "संसद में जो कुछ भी हो रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. नेता प्रतिपक्ष की भूमिका शैडो प्रधानमंत्री जैसी होती है, लेकिन इस संसद में जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े होते हैं तो उनका माइक बंद कर दिया जाता है. विपक्ष के किसी भी सांसद को बोलने का मौका नहीं मिलता. संसद अब ऐसी जगह बन गई है, जहां विपक्ष की कोई आवाज नहीं है."
राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर क्या कहा?
इधर, राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला जारी रखा. संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब से जुड़े मुद्दे से 'डरे हुए' हैं. उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को लगता है कि कांग्रेस की कुछ महिला सांसदों से उन्हें खतरा है, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए.
दोबारा क्यों स्थगित हो गई चार्चा?
दो बार स्थगन के बाद जब लोकसभा दोपहर दो बजे फिर से बैठी, तो आसन पर बैठीं भाजपा सांसद संध्या राय ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर से बजट चर्चा शुरू करने को कहा. इस पर थरूर ने कहा कि चर्चा से पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कुछ बातें रखने की अनुमति दी जानी चाहिए.
संध्या राय ने कहा कि उन्हें बजट पर बोलने में कोई आपत्ति नहीं है और उन्होंने राहुल गांधी से बोलना शुरू करने को कहा. लेकिन राहुल गांधी ने जवाब दिया कि लोकसभा अध्यक्ष और कुछ विपक्षी सांसदों की बैठक में यह सहमति बनी थी कि उन्हें बजट चर्चा से पहले कुछ मुद्दे उठाने दिए जाएंगे, लेकिन अब उस सहमति से पीछे हटा जा रहा है. इसी दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि ऐसी कोई सहमति नहीं हुई थी. उन्होंने कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष स्पीकर से जुड़ा कोई मुद्दा उठाना चाहते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष का सदन में मौजूद होना जरूरी है.





