आपके सर में हैं जूं तो हो जाइये सावधान, अब ये ले रही जान- Odisha में 12 साल की बच्ची की मौत: कैसे बचें?
ओडिशा में एक बच्ची की सिर में जूं होने से मौत हो गई. वह कई महीनों से जूं की समस्या से परेशा थी और उसके घर वालों ने गंजा होने की भी सलाह दी थी. अब सवाल उठता है कि आखिर जूं से कैसे जान जा सकती है.
ओडिशा के पुरी जिले से सामने आई यह घटना सुनने में जितनी असामान्य लगती है, उतनी ही डराने वाली भी है. एक ऐसी समस्या, जिसे आमतौर पर मामूली समझकर टाल दिया जाता है, वही एक 12 साल की बच्ची की मौत की वजह बन गई.
यह मामला बलंगा थाना क्षेत्र के चंपागड़ा साही गांव का है. यहां रहने वाली छठी कक्षा की छात्रा लक्ष्मी प्रिया साहू की मौत सिर में जूं की गंभीर समस्या और उससे फैले संक्रमण के कारण हो गई. लक्ष्मी, लिंगराज साहू की बेटी थी और परिवार के मुताबिक वह कई महीनों से सिर में जूं से परेशान थी.
क्या बच्ची की एकदम हुई मौत?
शुरुआत में घरवालों ने इसे सामान्य परेशानी माना. लक्ष्मी की मां ने उसे कई बार सिर मुंडवाने की सलाह भी दी, ताकि जूं से छुटकारा मिल सके. लेकिन बच्ची ने इससे इनकार कर दिया. हालात इतने बिगड़ गए कि संक्रमण के कारण उसके सिर से तेज बदबू आने लगी. इसी शर्म और असहजता की वजह से उसने घर से बाहर निकलना भी लगभग बंद कर दिया था.
तीन दिन पहले लक्ष्मी की तबीयत अचानक और बिगड़ गई. उसे लगातार उल्टियां होने लगीं और उल्टी में खून भी आने लगा. घबराए परिजन उसे तुरंत पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल ले गए. डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन तब तक संक्रमण शरीर में काफी फैल चुका था. तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान ही लक्ष्मी की मौत हो गई.
कैसे होती है सिर में जूं होने से मौत?
जूं को आमतौर पर एक मामूली और परेशान करने वाली समस्या माना जाता है, लेकिन बेहद दुर्लभ मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकती है. विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूं से सीधे मौत नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक इलाज न मिलने और भारी लापरवाही की स्थिति में इससे जुड़ी जटिलताओं के कारण मौत के मामले सामने आए हैं. ऐसे सभी मामलों में गंभीर मेडिकल या सामाजिक लापरवाही एक बड़ा कारण रही है.
जूं से जुड़ी मौत के कारण?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ही रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा कारण गंभीर आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया रहा है. जब सिर में जूं की संख्या बेहद ज्यादा हो जाती है, यानी हजारों की तादाद में, तो रोजाना खून की थोड़ी-थोड़ी मात्रा निकलती रहती है. लंबे समय तक ऐसा होने पर शरीर में खून की भारी कमी हो सकती है, जो जान के लिए खतरा बन जाती है.
साइंस डायरेक्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में अमेरिका के जॉर्जिया में 12 साल की एक बच्ची की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई थी. जांच में सामने आया कि वह कई सालों से गंभीर जूं की समस्या से जूझ रही थी और उसी के कारण उसे गंभीर एनीमिया हो गया था. एनआईएच की रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2025 में यूरोपीय संघ में 56 साल के एक व्यक्ति की मौत भी सामने आई, जहां हजारों जुओं के कारण हुए सेकेंडरी एनीमिया को मौत की वजह बताया गया.
संक्रमण और सेप्सिस से भी होती है मौत
लंबे समय तक सिर खुजलाने से खोपड़ी पर घाव बन जाते हैं. अगर इन घावों में बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाए और समय पर इलाज न मिले, तो संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता है, जिसे सेप्सिस कहा जाता है. यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है.
हाइपोथर्मिया का खतरा
गंभीर एनीमिया की स्थिति में शरीर का तापमान कंट्रोल करने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है. कमजोर और असुरक्षित लोगों में यह स्थिति हाइपोथर्मिया का कारण बन सकती है, जो मौत तक ले जा सकती है.
किन लोगों में ज्यादा खतरा?
लापरवाही सबसे बड़ा कारण रही है. ज्यादातर मौतें बच्चों की उपेक्षा या खराब स्वच्छता में रहने वाले कमजोर वयस्कों के मामलों में दर्ज की गई हैं.पहले से आयरन की कमी या खराब खान-पान वाले लोग ज्यादा जोखिम में रहते हैं. ऐसे गंभीर नतीजे तभी सामने आते हैं, जब जूं की समस्या महीनों या वर्षों तक बिना इलाज के बनी रहती है और संक्रमण बहुत ज्यादा बढ़ जाता है.
कैसे फैलती हैं जूं?
जूं सबसे ज्यादा तब फैलती है जब दो लोगों के सिर आपस में लगते हैं. बच्चों में खेलते समय, स्कूल में बैठते हुए या परिवार के सदस्यों के बीच यह सबसे आम तरीका है. इसके साथ ही किसी संक्रमित व्यक्ति की कंघी, ब्रश, तौलिया, तकिया, दुपट्टा, चादर, तकिया, टोपी या हेलमेट का इस्तेमाल करने से जूं दूसरे व्यक्ति के सिर तक पहुंच सकती है.
क्या जूं कूदती या उड़ती है?
नहीं. जूं न तो उड़ती है और न ही कूदती है. यह सिर्फ रेंगकर एक सिर से दूसरे सिर तक जाती है.
क्या गंदगी से जूं होती है?
यह एक आम भ्रम है. जूं साफ बालों में भी हो सकती है। यह सफाई नहीं, बल्कि संपर्क पर निर्भर करती है.
क्या है जूं का इलाज?
विशेषज्ञों का कहना है कि जूं की समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए. समय पर इलाज, साफ-सफाई और सही देखभाल से ऐसे दुर्लभ लेकिन खतरनाक हालात पूरी तरह टाले जा सकते हैं. मार्किट में कई मेडिकल ऑयल हैं, जिनसे इनसे निपटा जा सकता है. रोज़ाना कंघी करना, इसके साथ ही पूरी तरह से बाल मुंडवा लेना भी हल है. समस्या ज्यादा गंभीर होने पर डॉक्टर की सलाह जरूरी है.





