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मिसाइल, टैंकर और मौत... होर्मुज 'रेड जोन' में US-Iran टकराव के बीच निशाना कैसे बन रहे भारतीय नाविक?

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर लगातार हमले हो रहे हैं. जानिए कैसे सात भारतीय नाविकों की मौत हुई और पूरी टाइमलाइन.

मिसाइल, टैंकर और मौत... होर्मुज रेड जोन में US-Iran टकराव के बीच निशाना कैसे बन रहे भारतीय नाविक?
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होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हर कमर्शियल जहाज पर सवार नाविकों के लिए अब हर सफर एक नई परीक्षा बन चुका है. कभी मिसाइल हमले का खतरा, कभी युद्धपोतों की घेराबंदी और कभी अचानक छिड़ी सैन्य कार्रवाई. इन सबके बीच हजारों नाविक अपनी ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं. इनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है, जो दुनिया की समुद्री व्यापार व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं.

28 फरवरी, 2026 को अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद यह रास्ता कई भारतीय परिवारों के लिए मातम की खबर लेकर आया. चार महीने से कुछ ज्यादा समय में कम से कम सात भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं.

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी, 2026 से शुरू हुआ सैन्य संघर्ष अब सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है. इसका सबसे बड़ा असर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर दिखाई दे रहा है. इस रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल जहाज लगातार मिसाइल हमलों, नौसैनिक अभियानों और सैन्य कार्रवाई की चपेट में आ रहे हैं.

होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है. खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है. यही वजह है कि अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के साथ यह इलाका सैन्य गतिविधियों का केंद्र बन गया. कमर्शियल जहाज, जिनका युद्ध से कोई सीधा संबंध नहीं होता, भी इस टकराव की चपेट में आने लगे. इन जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक तैनात रहते हैं, इसलिए हर बड़े हमले का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा.

संघर्ष के शुरुआती दिनों में क्या हुआ?

भारतीय नाविकों की मौत की पहली खबर संघर्ष शुरू होने के अगले ही दिन सामने आई. 1 मार्च को मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले ऑयल टैंकर 'MKD व्योम' पर हुए हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई. इस हमले की किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन अमेरिकी सेना ने इसके लिए ईरानी बलों को जिम्मेदार ठहराया.

इसी दिन एक और बड़ा हादसा हुआ. ओमान के मुसंडम प्रायद्वीप के पास पलाऊ के झंडे वाले टैंकर 'स्काईलाइट' पर हमला हुआ, जिसमें दो भारतीय नाविकों की जान चली गई. यह इलाका होर्मुज़ जलडमरूमध्य तक पहुंचने वाले प्रमुख समुद्री मार्गों में शामिल है. इन दोनों घटनाओं के बाद संघर्ष के पहले 48 घंटों के भीतर ही तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी थी.

इसके बाद मौतों का सिलसिला कैसे बढ़ता गया?

संघर्ष लंबा खिंचने के साथ समुद्री सुरक्षा लगातार बिगड़ती गई. 8 मई को होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास एक लकड़ी की नाव (धो) में आग लग गई. इस हादसे में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई. स्थानीय अधिकारियों ने इस घटना को क्षेत्र में बढ़े सैन्य तनाव और असुरक्षा से जोड़कर देखा.

इसके ठीक एक महीने बाद 9 जून को अब तक की सबसे घातक घटना सामने आई. ओमान के तट के पास ऑयल टैंकर 'सेटेबेलो' (Settebello) पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय क्रू मेंबर मारे गए. अमेरिकी सेना का दावा था कि जहाज ने ईरानी बंदरगाहों पर लागू नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन किया था. हालांकि इस कार्रवाई में भारतीय नाविकों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी.

सबसे हालिया घटना में क्या हुआ?

13 जुलाई को होर्मुज़ जलडमरूमध्य के दक्षिणी शिपिंग लेन से गुजर रहे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकर ईरानी क्रूज मिसाइल हमले की चपेट में आ गए. यूएई अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हुए. घायलों में छह भारतीय नाविक और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल थे. इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि युद्ध का सबसे बड़ा खतरा अब कमर्शियल शिपिंग पर मंडरा रहा है.

अब तक कितने भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है?

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी से 13 जुलाई के बीच हुई विभिन्न घटनाओं में कम से कम सात भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है. इनमें तीन मौतें संघर्ष के शुरुआती दो दिनों में, एक मई में, तीन जून में और एक जुलाई में हुई. इसके अलावा कई भारतीय नाविक घायल भी हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने भी हाल में कहा था कि संघर्ष शुरू होने के बाद इस समुद्री क्षेत्र में हुए हमलों में कम से कम 14 नाविक मारे गए हैं, जिनमें भारतीय नागरिकों की संख्या उल्लेखनीय है.

आगे क्यों बढ़ सकती है चिंता?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों के लिए खतरा बना रहेगा. भारतीय नाविक दुनिया की सबसे बड़ी समुद्री कार्यबल का अहम हिस्सा हैं और हजारों भारतीय इस रूट पर चलने वाले जहाजों में तैनात रहते हैं. ऐसे में समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन और नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आने वाले समय में वैश्विक समुदाय के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना रहेगा.

ईरान इजरायल युद्ध
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