कश्मीरी एक्टिविस्ट सुशील पंडित ने एक इंटरव्यू में 1947-48 के भारत-पाक युद्ध, कश्मीर मुद्दे और अनुच्छेद 370 को लेकर कई गंभीर दावे किए. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना पाकिस्तान समर्थित हमलावरों को पीछे धकेल रही थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर दी. सुशील पंडित का दावा है कि सेना कुछ और समय मांग रही थी ताकि पूरे जम्मू-कश्मीर को मुक्त कराया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र (UN) ले जाने का फैसला भी नेहरू ने ब्रिटिश प्रभाव में लिया. पंडित ने माउंटबेटन और उनकी पत्नी के प्रभाव का भी जिक्र किया और कहा कि इस संबंध में माउंटबेटन की बेटी की किताब में उल्लेख मिलता है. अनुच्छेद 370 पर उन्होंने दावा किया कि इसे शेख अब्दुल्ला की मांग पर लाया गया था और डॉ. भीमराव अंबेडकर इसके पक्ष में नहीं थे. उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की पहल पर इसे संविधान में 'अस्थायी प्रावधान' (Temporary Provision) के रूप में शामिल किया गया.