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ममता के करीबी कल्याण बनर्जी ने साफ कर दी TMC की पिक्चर, पार्टी के पतन के पीछे क्या सिर्फ अकेले अभिषेक बनर्जी?

कल्याण बनर्जी के विस्फोटक बयान से TMC में मचे घमासान पर नई बहस छिड़ गई है. क्या अभिषेक बनर्जी की वजह से पार्टी संकट और असंतोष बढ़ा है?

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बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है. पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले कल्याण बनर्जी ने जिस तरह पब्लिकली अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा है, उसने TMC की एकता और नेतृत्व पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. कल्याण बनर्जी ने न सिर्फ अभिषेक पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया, बल्कि पार्टी की चुनावी हार और मौजूदा संकट के लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या TMC के भीतर बढ़ते असंतोष, नेताओं की नाराजगी और संगठनात्मक संकट की जड़ वास्तव में अभिषेक बनर्जी हैं, या मामला इससे कहीं ज्यादा गहरा है.

क्यों मचा दिया टीएमसी में सियासी भूचाल?

दरअसल, पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही खींचतान अब बंद कमरों से निकलकर सार्वजनिक मंच पर आ चुकी है. इसकी सबसे बड़ी वजह बने पार्टी के वरिष्ठ सांसद, सीनियर वकील और ममता बनर्जी के लंबे समय से भरोसेमंद सहयोगी कल्याण बनर्जी. उन्होंने जिस तीखे अंदाज में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हमला बोला है, उसने यह संकेत दे दिया है कि TMC में असंतोष केवल फुसफुसाहट नहीं बल्कि खुला विद्रोह बन चुका है.

कल्याण बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा, "मैं अभिषेक बनर्जी का किसी भी मामले में पक्ष नहीं रखूंगा, क्योंकि मुझे उनका घमंडी रवैया पसंद नहीं है. मैंने इस पेशे में 45 साल बिताए हैं; ये सभी लोग मेरे साथ जूनियर के तौर पर काम कर चुके हैं. वह मेरा अपमान कैसे कर सकते हैं?

उन्होंने आगे कहा, "राजनीति में भी मैं उनसे सीनियर हूं. वह ऐसा नहीं कर सकते. उन्हें यह समझना होगा कि उन्हीं की वजह से हम हारे. उन्हें यह भी समझना होगा कि पार्टी उन्हीं की वजह से इस संकट का सामना कर रही है. मैं अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता. मैं दीदी से गुजारिश करूंगा: अगर आप अभिषेक बनर्जी पर निर्भर रहना चाहती हैं, तो उन्हीं के साथ रहें - मुझे छोड़ दें. लेकिन अगर आप अभिषेक बनर्जी से अलग हो जाती हैं, तो मैं आपके साथ हूं. उन्होंने हमारी पार्टी को बर्बाद कर दिया है."

हाईकोर्ट के केस से शुरू हुआ विवाद, रिश्तों में आई दरार

कल्याण बनर्जी का गुस्सा केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि उसके पीछे एक कानूनी विवाद भी था. TMC सांसद ने कलकत्ता हाई कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की ओर से एक मामला लड़ने से इनकार कर दिया.

उन्होंने विस्तार से बताया, "CID से जुड़ा यह मामला असल में पहले ही फाइल किया गया था. उन्होंने इसे पहले फाइल किया था. शुक्रवार को वेकेशन बेंच बैठी थी और मैंने पूरे दिन इंतजार किया, लेकिन मामले पर सुनवाई नहीं हुई." उसके बाद, मैंने कोर्ट के सामने इसका जिक्र किया और जज ने कहा कि मामले की सुनवाई बुधवार को होगी. जैसा कि आप जानते हैं, मंगलवार को कैमक स्ट्रीट स्थित उनके घर और दीदी के ऑफिस में तलाशी ली गई थी. मैं दिल्ली से आया था और वहां भी गया था. तलाशी के दौरान मैं मौजूद था. फिर कल सुबह, मैंने जस्टिस कौशिक चंदा के सामने मामले जिक्र किया और कहा कि यह जरूरी है. मैंने उनसे कहा कि तलाशी गैर-कानूनी थी. तलाशी पहले ही हो चुकी थी और कभी भी कुछ भी हो सकता था, इसलिए मामले पर सुनवाई ज़रूरी थी.

जज ने मुझसे कहा कि मामले की सुनवाई उसी दिन होगी. उसके बाद, दोपहर करीब 12.30 बजे एक वकील आया और मुझे बताया कि तलाशी के संबंध में एक अलग रिट याचिका दायर की गई है और एक सीनियर वकील इसे देखेंगे. मैंने पूछा, "अगर आपने यह मामला पहले ही दायर कर दिया था, तो आपने हमसे इस पर चर्चा क्यों नहीं की? यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है."

"हर कोई उनका कर्मचारी नहीं है" कल्याण का सबसे बड़ा हमला

कल्याण बनर्जी यहीं नहीं रुके. उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी के व्यवहार में अहंकार इस हद तक बढ़ गया है कि वे वरिष्ठ नेताओं और सहयोगियों का सम्मान नहीं करते. उन्होंने कहा, "उसके बाद, पूरे दिन किसी ने कुछ नहीं कहा. मैंने पूरी रात केस की तैयारी में बिताई. आज भी, आप देख सकते हैं कि मैं हर जगह जा रहा हूँ, जोखिम उठा रहा हूं और अपना काम कर रहा हूं. फिर भी उनकी अनादर करने की आदत नहीं बदली है.

अभिषेक बनर्जी को लगता है कि हर कोई उनसे नीचे है, जैसे कि हर कोई कैमक स्ट्रीट का सिर्फ एक कर्मचारी हो. मैं 45 साल से इस पेशे में हूं. एक सीनियर वकील के तौर पर मुझे कौन नहीं जानता? क्या कोई है? मैं कितने समय से प्रैक्टिस कर रहा हूं? इस कोर्ट को छोड़िए, सुप्रीम कोर्ट में भी लोग मुझे जानते हैं. लेकिन वे इतने अहंकारी हो गए हैं. किसी का सम्मान नहीं करते. इसीलिए मैं पीछे हट गया हूं. आज सुबह मैंने दीदी से भी कहा: 'मेरे और अभिषेक बनर्जी के बीच किसी एक को चुनिए."

इससे पहले भी उठते रहे हैं अभिषेक के खिलाफ सवाल

कल्याण बनर्जी पहले नेता नहीं हैं जिन्होंने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हों. पार्टी के भीतर लंबे समय से यह शिकायत सुनाई देती रही है कि संगठन और सरकार के फैसलों में कुछ चुनिंदा लोगों का प्रभाव बढ़ गया है. कई पुराने नेता मानते रहे हैं कि जमीनी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की राय को पहले जैसी अहमियत नहीं मिल रही. चुनावी रणनीति से लेकर उम्मीदवार चयन तक, कई फैसलों को लेकर असहमति समय-समय पर सामने आती रही है. हालांकि, अधिकांश नेता खुलकर बोलने से बचते रहे, लेकिन कल्याण बनर्जी ने उन आरोपों को सार्वजनिक रूप से आवाज दे दी है, जिन्हें अब तक बंद कमरों की चर्चा माना जाता था.

क्या TMC में विद्रोह की जड़ अभिषेक हैं?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या TMC की मौजूदा चुनौतियों के लिए केवल अभिषेक बनर्जी जिम्मेदार हैं? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी पार्टी की हार या संकट के पीछे कई कारण होते हैं. लेकिन जब पार्टी का एक वरिष्ठ सांसद यह कहे कि "उन्हीं की वजह से हम हारे" और "पार्टी उन्हीं की वजह से इस संकट का सामना कर रही है", तो यह सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी नहीं रह जाती बल्कि नेतृत्व पर सीधा अविश्वास बन जाती है.

बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले कल्याण बनर्जी ने इतनी स्पष्ट भाषा में अभिषेक पर हमला बोला है. इससे यह संदेश गया है कि TMC के भीतर असंतोष अब चरम पर है और विरोधी गुट के आरोपों को पूरी तरह खारिज करना आसान नहीं होगा.

वे लोग यूं ही अभिषेक बनर्जी का खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं. कल्याण बनर्जी के ताजा बयान ने यह धारणा और मजबूत कर दी है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व, निर्णय प्रक्रिया और संगठनात्मक दिशा को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद हैं. अब निगाहें ममता बनर्जी पर हैं, क्योंकि यह लड़ाई केवल दो नेताओं के बीच की नहीं, बल्कि TMC के भविष्य और उसके राजनीतिक अस्तित्व की दिशा तय करने वाली लड़ाई बनती जा रही है.

राशिफलममता बनर्जी
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