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ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत का बड़ा मास्टरस्ट्रोक! मोदी की UAE यात्रा में हुआ ऐसा तेल समझौता, संकट के समय भी नहीं रुकेगी सप्लाई

प्रधानमंत्री Narendra Modi की UAE यात्रा के दौरान भारत और UAE के बीच बड़ा ऊर्जा समझौता हुआ. सरकारी तेल कंपनी ADNOC भारत में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगी. आखिर इसके मायने क्या हैं?

ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत का बड़ा मास्टरस्ट्रोक! मोदी की UAE यात्रा में हुआ ऐसा तेल समझौता, संकट के समय भी नहीं रुकेगी सप्लाई
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PM MODI IN UAE

प्रधानमंत्री Narendra Modi की United Arab Emirates (UAE) यात्रा भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर बेहद अहम मानी जा रही है. शुक्रवार को हुई इस यात्रा के दौरान भारत और UAE के बीच कई बड़े समझौते हुए, जिनका फोकस रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण, कच्चे तेल की सप्लाई और ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना रहा.

प्रधानमंत्री के इस दौरे के दौरान एक अहम फैसला हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई की सरकारी तेल कंपनी भारत के तेल रिजर्व में कच्चा तेल स्टोर करने के लिए तैयार हो गई है. इसे एक मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है.

दोनों देशों के बीच क्या हुआ समझौता?

दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत UAE की सरकारी तेल कंपनी ADNOC भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व में करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर कर सकेगी. इस योजना में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित पेट्रोलियम रिजर्व सुविधा और ओडिशा के चांदीखोल में प्रस्तावित रणनीतिक भंडारण परियोजनाओं में भागीदारी शामिल है. इसे भारत के लिए काफी अहम कदम माना जा रहा है. भारत के पास पहले से ही लगभग 3.9 करोड़ बैरल तेल मौजूद है.

इस समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि UAE के फुजैरा में भी कच्चे तेल को स्टोर किए जाने की संभावना पर सहमति बनी है. इसे भारत की रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व प्रणाली का हिस्सा माना जाएगा.

क्या होगा इससे फायदा?

- भारत के पास इमरजेंसी के लिए अतिरिक्त तेल रहेगा

- इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी

- तेल संकट के समय सप्लाई बाधित होने का खतरा कम होगा

इसके अलावा और क्या हुआ फैसला?

इसके अलावा भारत और UAE ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) स्टोरेज सुविधाओं में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी चर्चा की. दोनों देशों ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जबकि LPG सप्लाई को लेकर भी अलग से एक समझौता किया गया. माना जा रहा है कि इन समझौतों से भारत की लॉन्गटर्म ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को मजबूती मिलेगी. साथ ही भारत अपने ईंधन स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेगा.

यह पूरा समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है. ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और कई देशों के सामने तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना हुआ है.

UAE ने तेज किया बड़ा तेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट?

भारत के साथ हुए ऊर्जा समझौतों के बीच UAE ने एक बड़े तेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट को भी तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला किया है. इस परियोजना का उद्देश्य फुजैरा के जरिए कच्चे तेल के निर्यात की क्षमता को दोगुना करना है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan ने शुक्रवार को हुई एक एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) को वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट में तेजी लाने के निर्देश दिए.

इस प्रोजेक्ट को क्षेत्रीय तनाव के बीच UAE की ऊर्जा रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके जरिए UAE, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा. गौरतलब है कि ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में तेल निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए UAE अपनी वैकल्पिक निर्यात क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है.

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