Petrol Export पर पहली बार Windfall Tax! क्या अब भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? आम लोगों पर कितना होगा असर
पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर बड़ा फैसला लिया है. सरकार का कहना है कि यह कदम देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और कंपनियों की अतिरिक्त कमाई को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है.
भारत सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर बड़ा फैसला लेते हुए स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में बदलाव कर दिया है. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक 16 मई 2026 से पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर नया टैक्स लागू होगा. सरकार ने पेट्रोल एक्सपोर्ट पर पहली बार 3 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगाया है, जबकि डीजल और ATF पर लगने वाली ड्यूटी में कटौती की गई है.
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं. माना जा रहा है कि सरकार घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और कंपनियों की अतिरिक्त कमाई को नियंत्रित करने के लिए यह फैसला लेकर आई है.
क्या है सरकार का नया फैसला और किस पर कितना टैक्स लगा?
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार अब पेट्रोल एक्सपोर्ट पर 3 रुपये प्रति लीटर की स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लागू होगी. वहीं डीजल एक्सपोर्ट पर टैक्स घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इसके अलावा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाली ड्यूटी को घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. सरकार ने साफ किया है कि रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) को इन उत्पादों पर शून्य रखा गया है.
क्या देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होने वाला है?
नहीं. सरकार ने घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया है. इसका मतलब है कि फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों पर इसका सीधा असर देखने को नहीं मिलेगा यानी आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत रहेगी और पेट्रोल पंप पर मौजूदा कीमतें जारी रह सकती हैं.
आखिर पेट्रोल एक्सपोर्ट पर पहली बार क्यों लगा Windfall Tax?
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसे हालात और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार को डर है कि भारतीय कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए बड़े पैमाने पर निर्यात बढ़ा सकती हैं. इससे देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पेट्रोल एक्सपोर्ट पर पहली बार विंडफॉल टैक्स लगाया है. इससे कंपनियों को अत्यधिक मुनाफा कमाने से रोकने और घरेलू सप्लाई बनाए रखने में मदद मिलेगी.
डीजल और ATF पर पहले कितना टैक्स था?
सरकार ने मार्च 2026 में डीजल एक्सपोर्ट पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 29.5 रुपये प्रति लीटर ड्यूटी लगाई थी. इसके बाद 11 अप्रैल की समीक्षा में इसे बढ़ाकर क्रमशः 55.5 रुपये और 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था. हालांकि 30 अप्रैल की समीक्षा में ड्यूटी घटाकर डीजल पर 23 रुपये और ATF पर 33 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थी. अब नई अधिसूचना के तहत इसमें और कटौती की गई है.
क्या ईरान-इजराइल संघर्ष की वजह से लिया गया फैसला?
काफी हद तक हां. 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया. इसके जवाब में ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई हुई. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. युद्ध जैसे हालात के कारण सरकार घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना चाहती है. इसी वजह से निर्यात पर नियंत्रण बढ़ाया गया है.
सरकार ने अधिसूचना में क्या कहा?
वित्त मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विंडफॉल टैक्स लगाया गया है. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्यात की वजह से घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो.
क्या आने वाले दिनों में और बदल सकते हैं टैक्स?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं या पश्चिम एशिया संकट गहराता है, तो सरकार आगे भी एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव कर सकती है. केंद्र सरकार लगातार वैश्विक हालात और घरेलू जरूरतों की समीक्षा कर रही है.




