धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे तो दिया लेकिन क्या अब भी जारी रहेगा छात्रों का आंदोलन? CJP ने साफ कर दी पिक्चर
NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य और देश की एकता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है... लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अब छात्रों का प्रदर्शन खत्म हो जाएगा या जारी रहेगा...
Dharmendra Pradhan Resign: NEET-UG 2026 परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं और उसके बाद देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने देश के छात्रों के भविष्य, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखते हुए लिया है ताकि मौजूदा स्थिति का कोई गलत फायदा न उठा सके.
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि वह पिछले चार दशकों से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार से जुड़े रहे हैं. उनके लिए मजबूत और समावेशी शिक्षा व्यवस्था हमेशा राष्ट्र निर्माण का सबसे अहम आधार रही है. उन्होंने लिखा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई की. मामले की जांच CBI को सौंपी गई, परीक्षा रद्द की गई और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया.
अगले साल से CBT मोड में होगी NEET-UG परीक्षा
प्रधान ने कहा कि इसके साथ ही सरकार ने यह भी तय किया कि अगले वर्ष से NEET-UG परीक्षा पूरी तरह Computer-Based Test (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना कम हो सके. उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम के दौरान उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों के हितों की रक्षा करना थी.
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे में और क्या-क्या लिखा?
- धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पहले दिन से ही उन्होंने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी इससे पीछे नहीं हटे. उनका उद्देश्य था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा विवाद की वजह से प्रभावित न हो और किसी के साथ अन्याय न होने पाए.
- प्रधान ने बताया कि राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और छात्रों के सहयोग से 21 जून को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित कराई गई. उन्होंने सभी सहयोगियों का इसके लिए आभार भी व्यक्त किया.
- अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुख पहुंचा है, लेकिन उनके लिए यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का प्रश्न है. उन्होंने कहा कि भारत का युवा देश की सबसे बड़ी ताकत है और इसे किसी भ्रम या विवाद में नहीं फंसना चाहिए.
- प्रधान ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में जो स्थिति बनी है, उसका इस्तेमाल कोई भी राष्ट्रविरोधी तत्व न कर सके, इसलिए उन्होंने इस्तीफा देना उचित समझा. उनके अनुसार देश की एकता और छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक या कानूनी विवाद से ऊपर है.
- प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें देश की सेवा का अवसर मिला, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे. उन्होंने कहा कि युवाओं के सपनों को पूरा करना उनके सार्वजनिक जीवन की नैतिक जिम्मेदारी रही है और आगे भी वह देश की सेवा करते रहेंगे.
कॉकरोच जनता पार्टी ने इस्तीफे को बताया आंदोलन की जीत
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय अपने आंदोलन को दिया. उन्होंने कहा कि अगर जनता डरना और झुकना छोड़ दे तो किसी भी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति से जवाबदेही तय कराई जा सकती है. उनके अनुसार यह इस्तीफा जनता के दबाव का परिणाम है.
क्या दो और मांगें मानेगी सरकार?
दीपके ने कहा कि " हमारी दो और मांगें हैं. हम ऐसे ही नहीं जाएंगे. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है, लेकिन जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा मिलना चाहिए. उन्हें यह मिलना चाहिए. उन सभी परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा... और दूसरी बात, 20 तारीख को जिन पुलिस वालों ने गुंडागर्दी की, उन पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए. याद रखिए, कॉकरोच से पंगा मत लीजिए..."
"मुझे हीरो मत बनाइए"
अभिजीत दीपके ने कहा, "मैं एक बहुत ज़रूरी बात कहना चाहता हूं. धर्मेंद्र प्रधान के आज इस्तीफ़ा देने की वजह से मुझे हीरो मत बनाइए. यह ग़लती मत कीजिए. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के कारण मुझे हीरो मत बनाइए. एक व्यक्ति को हीरो बनाने की वजह से ही देश बर्बाद हुआ है..."
क्या अब छात्रों का प्रदर्शन खत्म हो जाएगा?
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी कहा कि सरकार ने उन्हें शनिवार दोपहर 3:30 बजे बातचीत के लिए बुलाया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा. उन्होंने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताया.
26 दिन का आंदोलन और बढ़ता दबाव
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन जारी हैं. इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिन लंबे अनशन से भी बल मिला, जिसके बाद सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता गया.
सरकार ला रही है सख्त एंटी पेपर लीक कानून
इस पूरे विवाद के बाद केंद्र सरकार अब देशभर में पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए एक सख्त कानून लाने की तैयारी में है. प्रस्तावित कानून में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट, स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और पेपर लीक से जुड़े मामलों में त्वरित जांच एवं सख्त कार्रवाई जैसे प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं. सरकार का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करना और छात्रों का विश्वास बहाल करना है.




